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CBSE Marking Scheme : सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई बोर्ड की मूल्यांकन नीति को दी मंजूरी, नहीं मिलेगा दूसरा मौका

CBSE Marking Scheme : सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई बोर्ड की मूल्यांकन नीति को दी मंजूरी, नहीं मिलेगा दूसरा मौका

CBSE Marking Scheme : सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई  बोर्ड की मूल्यांकन नीति को मंजूरी दी .

CBSE Marking Scheme : सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई बोर्ड की मूल्यांकन नीति को मंजूरी दी .

CBSE Marking Scheme : न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति सी टी रविकुमार की पीठ ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील से कहा, ‘‘जहां तक ​​फार्मूले का सवाल है, हम इसे बहुत स्पष्ट कर रहे हैं कि यह अपने अंतिम रूप पर पहुंच चुकी है. हम उस मुद्दे को फिर से नहीं खोलेंगे.’’ शीर्ष अदालत ने कहा कि वह सीबीएसई की योजना को फिर नहीं खोलेगी और उन याचिकाकर्ताओं को भी इसे चुनौती देने भी अनुमति नहीं है, जिन्हें इस योजना और अंकों के मूल्यांकन को लेकर शिकायत है.

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    नई दिल्ली. CBSE Marking Scheme : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा 12वीं बोर्ड परीक्षा के लिए निर्धारित मार्किंग स्कीम को उच्चतम न्यायालय ने मंजूरी दे दी है. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा है कि सीबीएससी द्वारा निर्धारित मार्किंग स्कीम पूरी तरह से सही थी. अब किसी भी स्थिति में सीबीएसई मार्किंग स्कीम का मामला दुबारा से नहीं खोला जाएगा. इसके साथ ही कोर्ट ने कहा है कि इस मामले पर अब कोई याचिका स्वीकृत नहीं की जाएगी. बता दें कि यह फैसला साल 2021 की शुरूआत में कोविड के बढ़ते प्रकोप के कारण निरस्त हुई बोर्ड परीक्षाओं के लिए किया गया है.

    न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति सी टी रविकुमार की पीठ ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील से कहा, ‘‘जहां तक ​​फार्मूले का सवाल है, हम इसे बहुत स्पष्ट कर रहे हैं कि यह अपने अंतिम रूप पर पहुंच चुकी है. हम उस मुद्दे को फिर से नहीं खोलेंगे.’’ शीर्ष अदालत ने कहा कि वह सीबीएसई की योजना को फिर नहीं खोलेगी और उन याचिकाकर्ताओं को भी इसे चुनौती देने भी अनुमति नहीं है, जिन्हें इस योजना और अंकों के मूल्यांकन को लेकर शिकायत है.

    शीर्ष अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता सीबीएसई द्वारा तैयार की गई योजना में निर्धारित अनुपात पर सवाल उठा रहे हैं, जिसे शीर्ष अदालत की मंजूरी मिल गई है और पुनर्विचार के लिए इसी तरह की दलीलें पहले खारिज कर कर दी गई थी. याचिका का निस्तारण करते हुए, पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता इस संबंध में प्राधिकार के समक्ष अपने प्रतिनिधित्व को आगे बढ़ाएंगे और उस पर निर्णय अंतिम रूप दी गई योजना के तहत उसके गुणदोष के आधार पर लिया जाएगा.

    चुनौती देने का नहीं है अधिकार
    पीठ ने कहा, ‘‘दूसरे शब्दों में, याचिकाकर्ताओं को अंकों के मूल्यांकन के उद्देश्य से योजना या उसमें निर्धारित अनुपात को चुनौती देने का अधिकार नहीं होगा. इसे बरकरार रखा गया है और पिछले आदेशों में इस अदालत की मंजूरी मिल चुकी है.’’ पीठ ने कहा कि इस आदेश की प्रति प्राप्त होने के तीन सप्ताह के भीतर अभ्यावेदन पर शीघ्रता से निर्णय लिया जाना चाहिए. गत 17 जून को, शीर्ष अदालत ने काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (सीआईएससीई) और सीबीएसई की मूल्यांकन योजनाओं को मंजूरी दी थी, जिसने दसवीं कक्षा, 11वीं कक्षा और 12वीं कक्षा के परिणामों के आधार पर 12वीं कक्षा के छात्रों के अंक मूल्यांकन में क्रमश: 30:30:40 का फार्मूला अपनाया गया था.

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    सीबीएसई ने पहले कहा था कि वह थ्योरी के लिए कक्षा 12 के छात्रों का मूल्यांकन दसवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में प्राप्त अंक से 30 प्रतिशत, कक्षा 11 में प्राप्त अंक से 30 प्रतिशत और 40 प्रतिशत कक्षा 12 के यूनिट, मिड टर्म और प्रीबोर्ड टेस्ट में मिले अंकों के आधार पर करेगा.

    Tags: Cbse board, Cbse exam, Cbse news, Supreme Court

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