मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में पढ़ाया जाएगा गिल्ली डंडा का पाठ

स्थानीय स्तर पर विश्वविद्यालय 30 फीसद सिलेबस में बदलाव कर सकते हैं. इसी के तहत चौधरी चरण सिंह विवि की ओर से कैंपस और कालेज दोनों को ध्यान में रखकर पाठ्यक्रम तय किया गया है.

स्थानीय स्तर पर विश्वविद्यालय 30 फीसद सिलेबस में बदलाव कर सकते हैं. इसी के तहत चौधरी चरण सिंह विवि की ओर से कैंपस और कालेज दोनों को ध्यान में रखकर पाठ्यक्रम तय किया गया है.

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में हुए इस बदलाव को लेकर छात्र छात्राओं में भी उत्साह देखने को मिल रहा है. कई छात्र छात्राएं तो ऐसे हैं जिन्होंने गिल्ली डंडे जैसे खेल के बारे में सुना तक नहीं है.

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यूपी. मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में अब गिल्ली डंडा का पाठ पढ़ाया जाएगा.फिज़िकुशल एजुकेशन की बोर्ड ऑफ स्टडीज़ की बैठक में इस पर फैसला हुआ है. यही नहीं भूगोल के छात्र भी अब हस्तिनापुर सेक्चुअरी के बारे में पढ़ सकेंगे.

पहली बार पाठ्यक्रम में परंपरागत खेल शामिल

शारीरिक शिक्षा में अब गिल्ली-डंडा भी शामिल हो गया है. नई शिक्षा नीति के तहत चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय और उससे जुड़े कालेजों में संचालित बीए शारीरिक शिक्षा का पाठ्यक्रम तय हो गया है. कला संकाय के अध्यक्ष प्रोफेसर नवीन चंद्र लोहनी का कहना है कि पहली बार पाठ्यक्रम में परंपरागत खेलों को भी शामिल किया है. इनमें छात्र गिल्ली-डंडा, स्टापू, कंचे, गुट्टे जैसे खेलों के विषय में पढ़ेंगे और उनका अभ्यास भी करेंगे.

स्नातक में शारीरिक शिक्षा का पाठ्यक्रम तय करने के लिए पाठ्यक्रम समिति की बैठक हुई. इसमें राज्य सरकार की ओर से तैयार पाठ्यक्रम में 30 फीसद संशोधन के साथ स्वीकार किया गया. शारीरिक शिक्षा में छह सेमेस्टर होंगे. पहले, दूसरे, तीसरे, चौथे में एक प्रैक्टिकल और एक थ्योरी को रखा गया है. पांचवें सेमेस्टर में दो थ्योरी और दो प्रैक्टिकल हैं. छठे सेमेस्टर में भी दो थ्योरी और दो प्रैक्टिकल रखे गए हैं.
कुश्ती, कबड्डी जैसे खेल भी पाठ्यक्रम में शामिल

इसके अलावा दो माइनर पेपर का सिलेबस तय किया गया है. जिसे शारीरिक शिक्षा के अलावा अन्य विषय में छात्र ले सकेंगे. कुश्ती, कबड्डी जैसे खेल को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है. शारीरिक शिक्षा में उत्तर प्रदेश के ऐसे खिलाड़ी जो ओलंपिक तक पहुंचे, उन्हें भी शामिल किया गया है.

बीए भूगोल का पाठ्यक्रम भी तय



यही नहीं अब हस्तिनापुर सेंक्चुरी को भी भूगोल के छात्र पढ़ सकेंगे. देश विदेश के भूगोल के साथ पहली बार स्थानीय भूगोल को भी चौधरी चरण सिंह विवि के छात्र पढ़ेंगे. विश्वविद्यालय के सिलेबस में पहली बार हस्तिनापुर सेंक्चुरी को भी शामिल किया गया है. जिसमें छात्रों को एक केस स्टडीज के तौर पर इसे समझाया जाएगा. बोर्ड आफ स्टडीज की बैठक में बीए भूगोल का पाठ्यक्रम भी तय कर लिया गया है.

हस्तिनापुर के वाइल्ड लाइफ और वहां के पर्यावरण का अध्ययन का विषय

स्थानीय स्तर पर विश्वविद्यालय 30 फीसद सिलेबस में बदलाव कर सकते हैं. इसी के तहत चौधरी चरण सिंह विवि की ओर से कैंपस और कालेज दोनों को ध्यान में रखकर पाठ्यक्रम तय किया गया है. पाठ्यक्रम में हस्तिनापुर के वाइल्ड लाइफ और वहां के पर्यावरण का अध्ययन का विषय रखा गया है. इससे छात्र उस सेंक्चुरी में जाकर स्थानीय भूगोल की विविधता को अच्छे से समझेंगे. भूगोल को एक विषय के तौर पर बीए के अलावा बीएससी के छात्र भी ले सकेंगे. भूगोल विषय में दो माइनर पेपर भी रखे गए हैं. इसमें एक पेपर मानव भूगोल का है, दूसरा भौतिक भूगोल का भी है.

इससे पहले मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय ने सीएम योगी के हठयोग बाबा रामदेव ओशो और चौधरी चरण सिंह की किताबों को स्नातक स्तर पर पढ़ाए जाने का निर्णय लिया गया था. इन लोगों को पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने के पीछे तर्क दिया जा रहा है कि ये लोग चांदी का चम्मच लेकर पैदा नहीं हुए. विश्वविद्यालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि गरीबी परिवार में जन्में लोगों ने अपनी मेधा के बल पर मुकाम हासिल किया. विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर ने बताया कि अब स्नातक स्तर पर सीएम योगी आदित्यनाथ की किताब हठयोग स्वरुप और साधना भी पढ़ाया जाएगा.

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पाठ्यक्रम में बदलाव क्षेत्रीय खेलों के बारे में जानने का मौका देंगे

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में हुए इस बदलाव को लेकर छात्र छात्राओं में भी उत्साह देखने को मिल रहा है. कई छात्र छात्राएं तो ऐसे हैं जिन्होंने गिल्ली डंडे जैसे खेल के बारे में सुना तक नहीं है. ऐसे में पाठ्यक्रम में ये बदलाव उन्हें क्षेत्रीय खेलों के बारे में भी जानने का मौका देंगे. यही नहीं महाभारतकालीन हस्तिनापुर जैसे ऐतिहासिक जगह के बारे में भी छात्रों को जानने का अवसर मिलेगा. योगी बाबा रामदेव की योग साधना जैसी पुस्तकों को शामिल करने के पीछे भी यही उद्देश्य है कि छात्र छात्राएं भारतीय संस्कृति के मूल को समझे. और अनुसरण करें.

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