स्कूलों के परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स को लेकर दिल्ली और पंजाब सरकार आमने-सामने

उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया. (पीटीआई फाइल फोटो)

पंजाब के शिक्षा मंत्री विजय इंदर सिंगला (Punjab Education Minister Vijay Inder Singla) ने कहा है कि मनीष सिसोदिया को पहले केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) में शिक्षा के स्तर और मानक संबंधी मानदंडों के बारे में तथ्यों की पड़ताल करनी चाहिए.

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    चंडीगढ़. केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए स्कूलों के परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पी.जी.आई.) (Performance Grading Index PGI) को लेकर अब पंजाब और दिल्ली सरकार (Punjab and Delhi governments) आमने सामने आ गई है. पीजीआई में दिल्ली के स्कूलों को नकारते हुए पंजाब के सरकारी स्कूलों को नंबर वन बताया गया है.

    जिस पर दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया (Deputy CM Manish Sisodia) ने केंद्र सरकार पर पक्षपात करने का आरोप लगाया है. वहीं अब पंजाब के शिक्षा मंत्री विजय इंदर सिंगला (Punjab Education Minister Vijay Inder Singla) ने सिसोदिया पर इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा है कि मनीष सिसोदिया को पहले केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) में शिक्षा के स्तर और मानक संबंधी मानदंडों के बारे में तथ्यों की पड़ताल करनी चाहिए.

    तर्कहीन बयानों से लोगों को गुमराह कर रहे हैं सिसोदिया
    सिंगला ने कहा कि दिल्ली के शिक्षा मंत्री सिसोदिया और उनकी पार्टी स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में पंजाब की उपलब्धि से इतना घबरा गए हैं कि उन्होंने अपने झूठे और तर्कहीन बयानों के द्वारा लोगों को गुमराह करना शुरू कर दिया है. शिक्षा मंत्री ने आगे कहा कि मनीष सिसोदिया यह कह रहे थे कि पंजाब ने हाल ही के परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स में शिक्षा के स्तर और मानक में बुरा प्रदर्शन किया था. लेकिन तथ्य यह है कि अगर पंजाब की कारगुजारी बुरी है तो इसी मापदंड के अंतर्गत दिल्ली के स्कूलों की कारगुजारी इससे भी बुरी है, क्योंकि जहां दिल्ली ने 124 अंक प्राप्त किए हैं वहीं 2017 में करवाए गए राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण (एन.ए.एस.) में पंजाब का स्कोर 126 रहा था.

    मुद्दे पर राजनीति करने से पहले करें जांच
    उन्होंने यह भी कहा कि यदि सिसोदिया इस मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं तो उनको इस बात की जांच कर लेनी चाहिए थी कि जब साल 2017 में राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण किया गया था तब दिल्ली में उनकी सरकार ने पहले ही अपने कार्यकाल के दो से अधिक साल पूरे कर लिए थे और उस समय पर पंजाब में कांग्रेस की सरकार आए को सिर्फ कुछ ही महीने हुए थे. उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण नवंबर 2020 में राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण नहीं हो सका, इसलिए पंजाब को पुरानी कारगुजारी से संतुष्ट होना पड़ा. इस बार पंजाब पूरी तरह तैयार था और यदि राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण करवाया जाता तो पंजाब के स्कूलों ने शिक्षा के स्तर और मानक संबंधी मानदंडों में भी चोटी का दर्जा हासिल किया होता.

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