फर्जी B.ed डिग्री वाले 2823 अध्यापको की बर्खास्तगी सही, पढ़ें पूरा मामला

विश्वविद्यालय कुलपति की निगरानी में चार माह मे जांच पूरी करने का निर्देश दिया गया है.

विश्वविद्यालय कुलपति की निगरानी में चार माह मे जांच पूरी करने का निर्देश दिया गया है.

812 अध्यापको की जांच पूरी करने के आदेश की समय सीमा निर्धारित कर दी है. जांच के बाद सही पाये जाने पर नौकरी रहेगी अन्यथा चार माह बाद शेष की बर्खास्तगी बहाल हो जायेगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 26, 2021, 5:19 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने साल 2005 में बी. आर. अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा की बी. एड. की फर्जी डिग्री के आधार पर प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्त 2823 सहायक अध्यापकों के अंकपत्र, डिग्री, नियुक्ति रद्द करने व बर्खास्तगी आदेश को सही मानते हुए हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है.

इन लोगों ने जांच मे अपना पक्ष ही नहीं रखा. बी. एस. ए. ने इन्हें इसी आधार पर बर्खास्त कर दिया है. कोर्ट ने इन्हें कोई राहत नहीं दी है. अंक पत्र से छेड़छाड़ के आरोपी और फर्जी डिग्री पर कारण बताओ नोटिस का जवाब देने वाले 812 सहायक अध्यापकों को थोड़ी राहत दी है.

जांच पूरी होने तक बर्खास्तगी स्थगित

कोर्ट ने एकल पीठ द्वारा विश्वविद्यालय को दिए गए जांच के आदेश को सही माना है तथा जांच चार माह मे पूरी करने का निर्देश दिया है. कहा है कि जांच पूरी होने तक इनकी बर्खास्तगी को स्थगित रखा जाए. इन्हें चार माह तक वेतन पाने व कार्य करने देने का निर्देश दिया है.
-छेड़छाड़ के आरोपी 812 अध्यापकों को चार माह की राहत.

-विश्वविद्यालय कुलपति की निगरानी मे चार माह मे जांच पूरी करने का निर्देश.

-सात अध्यापको के सत्यापन का एक माह का समय.



जिनके विद्यालय में परीक्षा में बैठने की पुष्टि होगी, उनकी बर्खास्तगी वापस 

कोर्ट ने जांच की निगरानी कुलपति को सौंपते हुए कहा है कि जांच में देरी हुई तो उन्हें वेतन पाने का हक नहीं होगा. जांच की अवधि नहीं बढ़ेगी. कोर्ट ने कहा है कि जांच के बाद जिनके विद्यालय में प्रवेश व परीक्षा में बैठने की पुष्टि होगी, उनकी बर्खास्तगी वापस ले ली जाए. शेष की बर्खास्तगी चार माह बाद प्रभावी हो जायेगी.

कोर्ट ने सात अभ्यर्थियों जिन्होंने कोर्ट मे दस्तावेज पेश किए, का एक माह में सत्यापन करने का भी निर्देश दिया, कहा है कि यदि सही हो तो इनकी बर्खास्तगी रद्द की जाए.

कोर्ट ने फैसले में क्या-क्या कहा

यह आदेश न्यायमूर्ति एम एन भंडारी तथा न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की खंडपीठ ने किरण लता सिंह सहित हजारो सहायक अध्यापकों की विशेष अपील को निस्तारित करते हुए दिया है. न्यायमूर्ति शमशेरी ने वरिष्ठ न्यायमूर्ति भंडारी के फैसले से सहमति जताते हुए अलग से हिन्दी भाषा मे फैसला दिया. जिसमें उन्होंने गुरु के महत्व को बताते हुए कहा कि शिक्षा एक पवित्र व्यवसाय है, यह जीविका का साधन मात्र नहीं है. राष्ट्र निर्माण मे शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. कोई छल से शिक्षक बनता है तो ऐसी नियुक्ति शुरू से ही शून्य होगी.

कोर्ट ने कहा कि छल कपट से शिक्षक बन इन्होंने न केवल छात्रो के भविष्य से खिलवाड़ किया है. अपितु शिक्षक के सम्मान को ठेस पहुंचाई है.

ये भी पढ़ें-

Sarkari Naukri: 8वीं पास के लिए सिंचाई विभाग में निकली भर्तियां, सैलरी 56000 तक

UPSC Civil Services: 2000 से अधिक अभ्यर्थियों को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, जानें डिटेल

ये है पूरा मामला

आगरा विश्वविद्यालय की 2005 की बी. एड. की फर्जी डिग्री के आधार पर हजारों लोगो ने सहायक अध्यापक की नियुक्ति प्राप्त कर ली. हाईकोर्ट ने जांच का आदेश देते हुए एस आई टी गठित की. जिसने अपनी रिपोर्ट मे व्यापक धांधली का खुलासा किया. सभी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया. 814 लोगो ने जवाब दिया. शेष आये ही नहीं. बी एस ए ने फर्जी अंक पत्र व अंक पत्र से छेड़छाड़ की दो श्रेणियो वालों को बर्खास्त कर दिया. हाईकोर्ट की एकल पीठ ने छेड़छाड़ करने के आरोपियो व जवाब देने वालों को विश्वविद्यालय को जांच करने का निर्देश दिया. कहा कि बर्खास्त अध्यापको से अंतरिम आदेश से लिए गये वेतन की बी एस ए वसूली कर सकता है. खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश के इस अंश को रद्द कर दिया है.

812 अध्यापको की जांच पूरी करने के आदेश की समय सीमा निर्धारित कर दी है. जांच के बाद सही पाये जाने पर नौकरी रहेगी अन्यथा चार माह बाद शेष की बर्खास्तगी बहाल हो जायेगी.

सभी राज्यों की बोर्ड परीक्षाओं/ प्रतियोगी परीक्षाओं, उनकी तैयारी और जॉब्स/करियर से जुड़े Job Alert, हर खबर के लिए फॉलो करें- https://hindi.news18.com/news/career/

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज