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पारिवारिक पृष्ठभूमि और आईएएस बनने का क्या है कनेक्शन, जानिए पूर्व सिविल सर्वेंट से

पारिवारिक पृष्ठभूमि के महत्व की बात बीते दिनों की घटना

पारिवारिक पृष्ठभूमि के महत्व की बात बीते दिनों की घटना

पारिवारिक पृष्ठभूमि कुछ भी मायने नहीं रखती है. यहाँ जो कुछ भी मायने रखते हैं, वह हैं - आप, आपका वर्तमान और आपकी अपनी योग्यता.

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नई दिल्ली. जिस प्रकार अंग्रेजी की जानकारी का अभाव या फर्स्ट डिविजनर न होने की कुंठा विद्यार्थियों के मन में संदेह पैदा करके उनके जोश को कमजोर कर देती है, लगभग वही स्थिति पारिवारिक पृष्ठभूमि को लेकर भी है. युवाओं को लगता है कि ‘मैं गाँव का रहने वाला हूँ, मेरे पिता मजदूर हैं, किसान हैं, मेरा परिवार अनपढ़ है, मैं स्मार्ट नहीं हूँ, मेरे परिवार की आमदनी बहुत कम है और इसीलिए मैं अन्य प्रतियोगियों के मुकाबले काफी पिछड़ा हुआ हूँ. मेरी यह पारिवारिक स्थिति मेरे लिए रोड़े का काम कर सकती है.‘

 प्रशिक्षण सारी कमियों को दूर करने के लिए ही होता है
इनके लिए मेरा यह ही कहना है कि यूपीएससी का काम केवल ऐसे युवाओं का चयन करके उन्हें सरकार को सौंप देना है, जिन्हें प्रशासक बनाया जा सकता है. सरकार के सभी मंत्रालय और विभागों के पास अपने-अपने प्रशिक्षण संस्थान होते हैं, जहाँ वे डेढ़-दो साल तक इन चयनित युवाओं को अपने हिसाब से ट्रैन्ड करते हैं, प्रशिक्षण देते हैं. जाहिर है कि यह प्रशिक्षण आपकी उन सारी कमियों को दूर करने के लिए ही होता है जो एक प्रशासक में नहीं होनी चाहिए और उन गुणों को भरने के लिए होता है, जो एक प्रशासक में होने चाहिए.

पारिवारिक पृष्ठभूमि के महत्व की बात बीते दिनों की घटना 
हाँ, यदि आपने अपना यही सन्देह सन् 1980 से पहले व्यक्त किया होता, तो मैं उतने दमखम के साथ उसका खण्डन करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता, जितना कि आज कर पा रहा हूँ. आज तो हिम्मत जुटाने की जरूरत ही नहीं है, क्योंकि यही सच्चाई है. अंग्रेजी भाषा के जमाने में इसकी काफी कुछ भूमिका थी. लेकिन आज देश में जिस प्रकार का राजनैतिक स्वरूप बन चुका है, जो कहीं न कहीं सामंत विरोधी है, उसमें पारिवारिक पृष्ठभूमि के महत्व की बात बीते दिनों की घटना ही समझी जानी चाहिए.

ग्रामीण पृष्ठभूमि के युवाओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है
आपको यह जानकर सुखद आश्चर्य होगा कि पिछले 20-25 सालों में आईएएस की परीक्षा में सफल होने वाले विद्यार्थियों में ग्रामीण पृष्ठभूमि के युवाओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. यदि आप अखबारों एवं ब्लाग्स से जुड़े हुए हों, तो आपने एक विशेष तथ्य का अनुभव किया होगा. इनमें खासकर आई.ए.एस. की परीक्षा में सफल ऐसे युवाओं के समाचार आते हैं, जिनकी पृष्ठभूमि बहुत ही सामान्य रही है. ये दूर-दराज के गाँवों में रहते थे. आर्थिक रूप से बहुत कमजोर थे.

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पारिवारिक पृष्ठभूमि कुछ भी मायने नहीं रखती
सांस्कृतिक दृष्टि से भी ये लोक जीवन से सम्बद्ध थे. माता-पिता लगभग-लगभग अशिक्षित से ही थे. किन्तु इन्होंने आई.ए.एस. की परीक्षा में सफलता हासिल की. ये सच्ची कहानियां इस तथ्य को पूरे जोशखरोश के साथ प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त हैं कि यहाँ आपकी पारिवारिक पृष्ठभूमि कुछ भी मायने नहीं रखती है. यहाँ जो कुछ भी मायने रखते हैं, वह हैं - आप, आपका वर्तमान और आपकी अपनी योग्यता. डॉ॰ विजय अग्रवाल (लेखक पूर्व सिविल सर्वेंट और afeias के संस्थापक हैं.)

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