ग्लोबल टीचर प्राइज विजेता वर्कशॉप के जरिए करेंगे शिक्षकों का मार्गदर्शन

कोर्स पूरा होने के बाद भारतीय सेना में स्थायी या शॉर्ट सर्विस कमिशन मिलेगा.

कोर्स पूरा होने के बाद भारतीय सेना में स्थायी या शॉर्ट सर्विस कमिशन मिलेगा.

दिसाले सोलापुर के परितेवादी स्थित जिला परिषद प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाते हैं. बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने एवं देश में त्वरित कार्रवाई (क्यूआर) कोड वाली पाठ्यपुस्तक क्रांति में महती प्रयास के लिए उन्हें 10 लाख डॉलर के वार्षिक ग्लोबल टीचर प्राइज, 2020 का विजेता चुना गया.

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  • Last Updated: February 11, 2021, 2:54 PM IST
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नई दिल्ली. महाराष्ट्र के ग्रामीण विकास मंत्री हसन मुश्रीफ ने कहा कि ग्लोबल टीचर प्राइज 2020 के विजेता रंजीत सिंह दिसाले शिक्षा के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर ‘शिक्षक प्रेरणा’ कार्यशालाओं के जरिए शिक्षकों को मार्गदर्शन करेंगे.

एक बयान में कहा गया, ''इन कार्यशालाओं के माध्यम से राज्य के शिक्षकों में नया आत्मविश्वास और उमंग पैदा होगी. इस पहल से सरकारी विद्यालयों को देखने के लोगों के नजरिए में भी बदलाव आएगा.''

कोड आधारित पाठ्य पुस्तक क्रांति में प्रयास 

महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के परीतेवाड़ी स्थित जिला परिषद प्राथमिक विद्यालय में दिसाले शिक्षक हैं. बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने और देश में त्वरित प्रतिक्रिया (क्यूआर) कोड आधारित पाठ्य पुस्तक क्रांति में प्रयास के लिए उन्हें ग्लोबल टीचर 2020 से सम्मानित किया गया था.
दिसाले सोलापुर के परितेवादी स्थित जिला परिषद प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाते हैं. बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने एवं देश में त्वरित कार्रवाई (क्यूआर) कोड वाली पाठ्यपुस्तक क्रांति में महती प्रयास के लिए उन्हें 10 लाख डॉलर के वार्षिक ग्लोबल टीचर प्राइज, 2020 का विजेता चुना गया. पुरस्कार जीतने के बाद उन्होंने घोषणा की कि वे 50 फीसदी पुरस्कार राशि अपने प्रतिभागियों में समान रूप से वितरित करेंगे.

पुरस्कार की 50 फीसदी राशि अन्य प्रतिभागी शिक्षकों के साथ साझा

जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने पुरस्कार राशि इस पुरस्कार की दौड़ में शामिल अन्य प्रतिभागियों के साथ साझा करने का निर्णय क्यों लिया तो उन्होंने कहा, ‘‘ अगर मैं पुरस्कार की 50 फीसदी राशि अन्य प्रतिभागी शिक्षकों के साथ साझा करता हूं तो इससे उन्हें वह करने में मदद मिलेगी, जो वह अपने देश में करना चाहते हैं.’’



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वर्ष 2009 में दिसाले जब सोलापुर के पारितवादी के जिला परिषद प्राथमिक विद्यालय पहुंचे थे तब वहां स्कूल भवन जर्जर दशा में था तथा ऐसा लग रहा था कि वह मवेशियों की रहने की जगह और स्टोररूम के बीच का स्थान है.

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