IIT Goa: फाइनल एग्‍जाम के लिये खुद प्रश्‍न तैयार करेंगे छात्र, लेकिन होगी ये शर्त

आईआईटी गोवा का अनोखा कदम

आईआईटी गोवा का अनोखा कदम

आईआईटी गोवा ने छात्रों को फाइनल परीक्षा के लिये खुद प्रश्‍न तैयार करने को कहा और उसके उत्‍तर देने को भी कहा है. लेकिन उसके साथ संस्‍थान ने एक शर्त भी रखी है. पढ़ें पूरी खबर

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IIT Goa: इंडियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी(IIT), गोवा ने परीक्षा लेने का एक नया रास्‍ता निकाला है. संस्‍थान ने अपने छात्रों को फाइनल परीक्षा के लिये खुद ही प्रश्‍न तैयार करने को कह दिया है. छात्र अपनी टर्म-एंड परीक्षा के लिये खुद प्रश्‍न तैयार करेंगे और उनके उत्‍तर भी खुद ही देंगे. जी हां, एनालॉग सर्किट कोर्स के छात्रों को कुछ ऐसा ही करने को कहा गया है.

इसी बीच एनालॉग सर्किट का एक प्रश्‍न पत्र सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. इस अनोखे प्रश्‍न पत्र में सिर्फ दो प्रश्‍न है. पहला प्रश्‍न 30 अंक का है. इसके बाद छात्रों को कहा गया है कि इंस्‍टीट्यूट की ओर से जो लेक्‍चर मटेरियर दिये गए हैं, उसके आधार पर छात्र 60 अंकों के प्रश्‍न तैयार करें. साथ ही यह भी कहा गया है कि जो प्रश्‍न छात्रों द्वारा तैयार किए जाएंगे, उससे ये पता चल सकेगा कि कोर्स की समझ उन्‍हें कितनी है.

दूसरा प्रश्‍न 40 अंकों का है, जिसमें छात्रों को निर्देश दिया गया गया है कि उन्‍होंने जो प्रश्‍न पहले हिस्‍से में तैयार किए हैं, उसके उत्‍तर दें. साथ ही छात्रों को सचेत भी किया गया है कि वे अपने दोस्‍तों से अपने प्रश्‍नों और उत्‍तर के बारे में बात ना करें. दो छात्रों के प्रश्‍न और उत्‍तर में समानता पाए जाने पर अंक काट दिये जाएंगे.

इस क्‍वेश्‍चन पेपर के वायर होने के बाद सोशल मीडिया पर लोग अलग-अलग रिएक्‍शन दे रहे हैं. कुछ सोशल मीडिया यूजर ने इस नायाब तरकीब के लिये इंस्‍टीट्यूट की तारीफ की है, वहीं कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने इसका मजाक उड़ाया और इस कदम की निंदा की.
एक यूजर ने लिखा कि खुद से जवाब देने के लिए प्रश्नों को चुनना आसान नहीं है. क्योंकि यह अखंडता की भी परीक्षा लेगा. उन्होंने छात्रों का स्वयं मूल्यांकन करने का यह अनूठा तरीका खोजने के लिए विश्वविद्यालय की सराहना की. एक अन्य यूजर ने लिखा कि संस्थान इस कठिन समय के बीच परीक्षा आयोजित करने के लिए एक नया विकल्प लेकर आया है.

आईआईटी गोवा के कंप्‍यूटर साइंस और इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के असिस्‍टेंट प्रोफेसर शरद सिंहा के अनुसार संस्‍थान के एक्‍सपेरिमेंट और पेडागोगी और टीि‍चंग मेथड का नतीजा है. हम दरअसल, देखना चाहते हैं कि आईआईटी गोवा में पढ़ने वाले छात्र यहां की पढ़ाई को एंज्‍वाय करते हैं या नहीं. यहां की पढ़ाई उनके ऊपर बोझ तो नहीं.

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