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School Reopen: स्कूल खोलने की बढ़ी मांग, IIT के प्रोफेसर्स, डॉक्टर्स और अभिभावकों ने 3 राज्यों के CM को लिखा पत्र

open letter to cm for reopening of schools: स्कूलों को फिर से खोलने के लिए एक टास्क फोर्स गठित करने की मांग की गई है.

open letter to cm for reopening of schools: स्कूलों को फिर से खोलने के लिए एक टास्क फोर्स गठित करने की मांग की गई है.

School Reopen: देश भर में स्कूल खोलने (school reopening) की मांग एक बार फिर तेज होने लगी है. इसी बीच IIT बॉम्बे के प्रोफेसर भास्करन रमन ने महाराष्ट्र, दिल्ली और कर्नाटक के मुख्यमंत्रियों को एक खुला पत्र लिख कर स्कूलों को फिर से खोलने के लिए एक टास्क फोर्स गठित करने का आग्रह किया है.

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    नई दिल्ली. School Reopen: देश भर में स्कूल खोलने की मांग एक बार फिर तेज होने लगी है. कुछ राज्यों ने स्कूल खोल दिए. कुछ राज्यों में अभी भी स्कूल खोलने के फैंसले का इंतजार है. इसी बीच IIT बॉम्बे के प्रोफेसर भास्करन रमन ने महाराष्ट्र, दिल्ली और कर्नाटक के मुख्यमंत्रियों को एक खुला पत्र लिख कर स्कूलों को फिर से खोलने के लिए एक टास्क फोर्स गठित करने का आग्रह किया है. प्रोफेसर भास्करन, IIT बॉम्बे के कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग में काम करते हैं. खास बात यह है कि खुला पत्र न केवल प्रोफेसर बल्कि उनके कई सहयोगियों द्वारा आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी दिल्ली, विभिन्न डॉक्टरों, कई प्रोफेशनलस् और महाराष्ट्र, दिल्ली और कर्नाटक राज्यों के अभिवावकों द्वारा जारी किया जा चुका है.

    स्कूल खोलने के लिए इस पत्र में सबूतों को भी आधार बनाया गया है और बताया गया है कि स्कूलों को क्यों फिर से खोला जाना चाहिए. इसमें लगभग 50 डॉक्टरों, बाल रोग विशेषज्ञों, सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, आईआईटिएनस, वकीलों, अर्थशास्त्रियों सहित जीन द्रेज, रीतिक खेड़ा, चंद्रकांत लहरिया, गौतम मेनन और भास्करन रमन को शामिल किया गया है.

    पत्र की प्रमुख बातें

    1. भारत में, पिछले 16 महीनों से स्कूल बड़े पैमाने पर बंद हैं. सीखने और विकास के नुकसान के मामले में स्कूल बंद होने की लागत बढ़ रही है, जबकि वैज्ञानिक प्रमाण इंगित करते हैं कि सुरक्षा उपायों के साथ फिर से खोलना संभव है.
    2. जैसा कि यह पत्र लिखा जा रहा है, दुनिया भर के लगभग 170 देशों में स्कूल आंशिक रूप से या पूरी तरह से खुले हैं. कुछ देशों, जैसे, फ्रांस और स्वीडन ने महामारी के दौरान स्कूलों को बंद नहीं किया. जुलाई 2021 में यूनिसेफ और यूनेस्को ने कहा कि स्कूल बंद होने वाले अंतिम और सबसे पहले खुलने वाले होने चाहिए. इस बात के प्रमाण हैं कि प्री-प्राइमरी और प्राइमरी स्कूल सबसे कम जोखिम में हैं और उन्हें बड़े आयु वर्ग के स्कूलों से पहले प्राथमिकता दी जानी चाहिए.
    3. वयस्कों के टीकाकरण में कई और महीने लग सकते हैं क्योंकि दिल्ली में केवल 13% पात्र आबादी को पूरी तरह से टीका लगाया गया है और 7% योग्य आबादी को महाराष्ट्र और कर्नाटक में पूरी तरह से टीका लगाया गया है. भारत में बच्चों के लिए टीके विकसित किए जा रहे हैं, यूके जैसे देशों ने छोटे बच्चों के लिए सार्वभौमिक टीकाकरण के खिलाफ फैसला किया है और दुनिया में कहीं भी 12 साल से कम उम्र के बच्चों का टीकाकरण नहीं किया जा रहा है.

    इन बातों पर विचार करके खोले जा सकते हैं स्कूल
    -भारत में लंबे समय तक स्कूल बंद हैं ऐसे में स्कूलों को रातों-रात नहीं खोला जा सकता. इसके लिए सभी स्तरों पर विशेष रूप से स्थानीय परिस्थितियों के संबंध में सावधानीपूर्वक योजना बनाने की आवश्यकता होगी. इसके साथ ही इन बातों पर भी विचार किया जा सकता है.

    -अपने राज्य में आंशिक रूप से अभी और पूरी तरह निकट भविष्य में स्कूल खोलने की योजना बनाने के लिए तत्काल आधार पर विशेषज्ञों के साथ एक टास्क फोर्स का गठन करें.

    -जहां पॉजिटिविटी रेट कम है, वहां प्लान तरीके से स्कूल खोलने की योजना (डॉ. गुलेरिया ने 19 जुलाई 2021 को यह सुझाव दिया था).

    -माध्यमिक विद्यालयों से पहले पूर्व-प्राथमिक और प्राथमिक खोलने की कोशिश करें (20 जुलाई 2021 को, ICMR ने पहले प्राथमिक विद्यालय खोलने का सुझाव दिया).

    -स्कूल के कर्मचारियों को प्राथमिकता के आधार पर टीका लगाना और दोनों डोज के बीच के अंतर को कम करना (स्वास्थ्य कर्मियों और आगे की पढ़ाई के लिए विदेश जाने वाले छात्रों के समान).

    -शुरूआत में स्टूडेंट्स के छोटे ग्रुप्स को सप्ताह में एक या दो बार स्कूल बुलाया जाए. मास्किंग, डिस्टेंसिंग और हाथ की स्वच्छता का जरूरी मार्गदर्शन के जरिए पालन. उचित वेंटिलेशन सुनिश्चित करना.

    स्कूलों को फिर से खोलने के लिए विस्तृत सिफारिशें लैंसेट कोविड -19 आयोग इंडिया टास्क फोर्स, एसआरसीसी चिल्ड्रन हॉस्पिटल और कई अन्य संस्थानों और व्यक्तिगत विशेषज्ञों द्वारा की गई हैं. पत्र के अंत में कहा गया है कि हम आशा करते हैं कि आप इस संबंध में अन्य राज्यों के लिए एक उदाहरण स्थापित करेंगे.

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