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UPSC Exam: सिविल सेवा परीक्षा में निबंध लिखते समय किन बातों का ध्यान रखना है जरूरी, जानिए यहां

UPSC Exam: सिविल सेवा परीक्षा में निबंध लिखते समय किन बातों का ध्यान रखना है जरूरी, जानिए यहां

UPSC परीक्षा में निबंध लिखते समय किन बातों का ध्यान रखना है जरूरी, जानिए यहां.

UPSC परीक्षा में निबंध लिखते समय किन बातों का ध्यान रखना है जरूरी, जानिए यहां.

UPSC Exam: आपने अपने विषय की नींव रख दी है. अब आपको इसके ऊपर एक संरचना खड़ी करनी है. स्ट्रक्चर कुछ इस तरीके से बनेगा कि आप अपनी बातों को अपेक्षाकृत विस्तार से रखने की छूट ले सकें, लेकिन ध्यान रखें कि आपका यह विस्तार आपके मूल विषय से भटकने न पाए. यहां आपको यह भी सावधानी रखनी होगी कि कहीं ऐसा तो नहीं कि आप एक ही बात को सिद्ध करने के लिए कई-कई उदाहरण और किस्से-कहानियाँ दे रहे हैं.

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नई दिल्ली. UPSC Exam: निबंध अध्ययन और समझ की परख से भी अधिक अभिव्यक्ति की परख करने वाली विधा है. इस तथ्य की मुख्य परख इस बात से होती है कि निबंध का आपने जो स्ट्रक्चर खड़ा किया है, वह कितना गुंथा हुआ है। यानी कि – तथ्य कितने सिलसिलेवार आये हैं. कहीं ऐसा तो नहीं कि तथ्यों में बहुत अधिक बिखराव हो गया है. कभी कुछ तो कभी कुछ. जब जो याद आया, उसे उसी वक्त वहीं लिख दिया. तथा आपके निबंध का प्रभाव पढ़ने वाले के ऊपर कितना पड़ा है.

निबंध का आकार एक तरीके से पिरामिड की तरह होता है. इसका धरातल चौड़ा होता है, जो ऊपर की ओर क्रमशः संकरा होता जाता है. यह ‘लॉ लॉफ नेचर‘ है, यानी कि प्रकृति का सिद्धान्त. इस सिद्धान्त से जो भी स्ट्रक्चर खड़ा किया जाएगा, वह पिरामिडों की ही तरह स्थायी होगा. निबंध का स्ट्रक्चर भी ऐसा ही होता है कि पहले आप अपनी बात की स्थापना करते हैं. हालांकि यह काफी कुछ भूमिका की तरह है, लेकिन मैं इसे ‘स्थापना‘ कहना पसन्द करता हूं. सीधे अपनी बात पर आ जाना ऊटपटांग-सा लगता है. यह कुछ वैसा ही है कि किसी को आपने लंच पर बुलाया. जैसे ही वह आपके यहां आया, आप उससे पूछते हैं कि ‘खाना लगाएं‘ यह भद्दा लगता है, बेहतर होगा यदि आप इससे पहले, भले ही एक वाक्य में ही क्यों न सही, यह पूछ लें कि ‘आप कैसे हैं?‘

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आपने अपने विषय की नींव रख दी है. अब आपको इसके ऊपर एक संरचना खड़ी करनी है. स्ट्रक्चर कुछ इस तरीके से बनेगा कि आप अपनी बातों को अपेक्षाकृत विस्तार से रखने की छूट ले सकें, लेकिन ध्यान रखें कि आपका यह विस्तार आपके मूल विषय से भटकने न पाए. यहां आपको यह भी सावधानी रखनी होगी कि कहीं ऐसा तो नहीं कि आप एक ही बात को सिद्ध करने के लिए कई-कई उदाहरण और किस्से-कहानियाँ दे रहे हैं. ऐसा करके आप अपने आपको ही बार-बार दोहरा रहे हैं. इससे आपका स्ट्रक्चर खराब हो जाएगा. इसे एक प्रकार का ‘अनर्गल प्रलाप‘ कहा जा सकता है, जिसे मैं निबंध लेखन का पागलपन और एक बहुत बड़ी कमजोरी मानता हूं. आपको छूट लेनी है, लेकिन इतनी भी नहीं कि विषय ही छूट जाए.

निबंध में कसावट की है जरूरत
अब आपका निबंध जैसे-जैसे आगे बढ़ता जाएगा, विस्तार और छूट लेने की आदत को कम करके आप तथ्यों को रखना शुरू कीजिए, लेकिन रोचकता से समझौता किए बिना ही. ऊपर की ओर जाने की इस प्रक्रिया में अब निबंध क्रमशः नुकीला होता जा रहा है. आप जो भी बात कहना चाह रहे हैं, उसे अपनी तरफ से धीरे-धीरे सिद्ध करते जा रहे हैं. फैलाव कम करते जा रहे हैं और अपनी बातों को क्रमशः ठोस तरीके से रख रहे हैं. ऐसा करने से इस हिस्से के निबंध में अपने आप ही पहले की तुलना मे अधिक कसावट आ जाएगी.

निबंध के अंतिम भाग में लिखें निष्कर्ष
निबंध का अंतिम भाग आपके निष्कर्ष का भाग होगा. आप जो भी सिद्ध करना चाह रहे हैं, वह इस अंतिम भाग में होगा. हां, यह न सोचें कि यह निष्कर्ष केवल एक ही पैराग्राफ में होना चाहिए. यह निष्कर्ष पर निर्भर करता है कि उसे कितने पैराग्राफ की जरूरत है. बेहतर यही माना जाता है कि जितने निष्कर्ष हों, उतने ही पैराग्राफ हों. किन्तु टोटल स्ट्रक्चर की दृष्टि से इतना संयम बरतना बेहतर होता है कि निष्कर्ष बहुत बड़ा न हो. इससे निबंध की बुनावट कसी हुई हो जाती है और कसी हुई बुनावट का प्रभाव अच्छा पड़ता है.

Tags: Education news, UPSC, Upsc exam

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