UPSC परीक्षा में इस एक टॉपिक से हर साल आता है सवाल, ‍जानें

भावनात्‍मक बुद्धिमत्ता का संबंध इससे होता है कि सार्वजनिक पद पर काम करने वाला व्‍यक्ति अपने भावनाओं को बहुत बेहतर तरीके से समझकर उन पर नियंत्रण रखे.

भावनात्‍मक बुद्धिमत्ता का संबंध इससे होता है कि सार्वजनिक पद पर काम करने वाला व्‍यक्ति अपने भावनाओं को बहुत बेहतर तरीके से समझकर उन पर नियंत्रण रखे.

आई.ए.एस. की तैयारी करने वाले परीक्षार्थियों से अपनी तैयारी को पुस्‍तकों तक सीमित न रखकर व्‍यावहारिक स्‍तर तक फैलायें.

  • Share this:

नई दिल्ली. त्रिपुरा के डिस्‍ट्रीक्‍ट मजिस्‍ट्रेट की घटना आपने जरूर पढ़ी होगी. हुआ यूं कि कोरोना संक्रमण रोकने के लिये जिले में धारा 144 लागू थी. युवा डिस्‍ट्रीक्‍ट मजिस्‍ट्रेट जब मुआयना करने निकले, तो वे एक विवाह समारोह में पहुंच गये. वहाँ जुटी हुई भीड़ को देखते ही वे आगबबूला हो उठे. उन्‍होंने पंडित की पिटाई कर दी. दुल्‍हा एवं दुल्‍हन के साथ बदतमीजी की. बारातियों को भी अपमानित करते हुए उन्‍हें गिरफ्तार करने का आदेश दिया. लोगों ने जब उन्‍हें विवाह के लिये सरकार से प्राप्‍त अनुमति का पत्र दिखाया, तो उन्‍होंने उस पत्र को फाड़कर फेंक दिया.

इस घटना का जैसे ही वीडियो डाला गया, वैसे ही पूरे देश में इसकी जानकारी आग की तरह फैल गई. शायद ही कोई ऐसा होगा, जिसने डिस्‍ट्रीक्‍ट मजिस्‍ट्रेट का पक्ष लिया हो. अंत में राष्‍ट्रव्‍यापी आलोचना को देखते हुये उन्‍होंने पद से मुक्‍त किये जाने का अनुरोध किया और उन्‍हें मुक्‍त कर भी दिया गया.

‘भावनात्‍मक बुध्दिमत्ता’ टॉपिक से लगभग हर साल प्रश्‍न आ ही जाता है

मुझे लगता है कि सिविल सर्विसेस की तैयारी करने वाले हर परीक्षार्थी के लिये यह घटना एक जीवन्‍त पाठ की तरह है. मुख्‍य परीक्षा के सामान्‍य ज्ञान के चौथे प्रश्‍न-पत्र में एक टॉपिक है.‘भावनात्‍मक बुध्दिमत्ता’ का. यह टॉपिक इतना अधिक महत्‍वपूर्ण है कि लगभग-लगभग हर साल इससे कोई-न-कोई प्रश्‍न आ ही जाता है. इसी पेपर का भाग-2; जो कुल लगभग 250 नम्‍बर के पेपर का आधा होता है, केस स्‍टडी से जुड़ा होता है. इसकी प्रत्‍येक घटना में भावनात्‍मक बुद्धिमत्ता का घटक होता ही है.
यहाँ दो तरह के प्रश्‍न खड़े होते हैं. पहला तो यह कि कैसे इस टॉपिक से पूछे गये प्रश्‍न के बहुत अच्‍छे उत्तर देकर अधिक से अधिक अंक हासिल करें, ताकि सिविल सेवा परीक्षा में सफल हो सकें? दूसरा प्रश्‍न यह कि सिविल सर्वेन्‍ट बनने के बाद कैसे हम उसका व्‍यावहारिक रूप से उपयोग करें, ताकि एक अच्‍छा से अच्‍छा सिविल सर्वेन्‍ट बन सकें.

हमें नहीं मालूम कि त्रिपुरा के डिस्‍ट्रीक्‍ट मजिस्‍ट्रेट ने इस टॉपिक से पूछे गये प्रश्‍नों के उत्तर कितने अच्‍छे तरीके से दिये थे. लेकिन यह तो साफतौर पर दिखाई दे रहा है कि जब उस पढ़े हुए ज्ञान को व्‍यवहार में लाने की मांग हुई, तो वे उसमें पूरी तरह से असफल हुये.

भावनात्‍मक बुद्धिमत्ता- भावनाओं को बेहतर तरीके से समझकर उन पर नियंत्रण



दरअसल, भावनात्‍मक बुद्धिमत्ता का संबंध इससे होता है कि सार्वजनिक पद पर काम करने वाला व्‍यक्ति अपने भावनाओं को बहुत बेहतर तरीके से समझकर उन पर नियंत्रण रखे. साथ ही उसमें दूसरों की भी भावनाओं को समझने की इतनी ही बेहतर क्षमता होनी चाहिए. और इस प्रकार दोनों की भावनाओं का बेहतर प्रबंधन ही भावनात्‍मक बुद्धिमत्ता कहलाता है.

हम सब दैनिक जीवन में जाने-अनजाने में इसका उपयोग करते रहते हैं. यहाँ हम काफी कुछ छूट भी ले सकते हैं क्‍योंकि इसका संबंध केवल हमसे और हमारे परिवार के कुछ लोगों तक सीमित रहता है. लेकिन सार्वजनिक जीवन में ऐसा नहीं चलता. चूंकि उसका प्रभाव सार्वजनिक होता है, इसलिये वहाँ चूक जाने की स्थिति में उसका प्रभाव भी व्‍यापक पड़ता है.

लेखक पूर्व सिविल सर्वेन्‍ट

इसलिये मैं आई.ए.एस. की तैयारी करने वाले परीक्षार्थियों से यह विशेष रूप से अनुरोध करना चाहूंगा कि वे अपनी तैयारी को पुस्‍तकों तक सीमित न रखकर व्‍यावहारिक स्‍तर तक फैलायें. सामाजिक जीवन में भागीदारी इसका एक अच्‍छा मंच हो सकता है. साथ ही कोरोना के इस भयावह दौर में दिल और दिमाग पर जो तनाव बन रहा है, उसके समुचित नियंत्रण और संतुलन के द्वारा भी इसका अभ्‍यास किया जा सकता है, बशर्ते कि ध्‍यान देकर ऐसा किया जाये. लेखक डॉ. विजय अग्रवाल पूर्व सिविल सर्वेन्‍ट एवं afeias के संस्‍थापक हैं.

ये भी पढ़ें-

UP Board 10th 12th Exmas: यूपी बोर्ड की 10वीं-12वीं परीक्षा की फेक डेटशीट वायरल

AILET exam 2021 postponed: 20 जून को होने वाली AILET परीक्षा 2021 स्थगित

सभी राज्यों की बोर्ड परीक्षाओं/ प्रतियोगी परीक्षाओं, उनकी तैयारी और जॉब्स/करियर से जुड़े Job Alert, हर खबर के लिए फॉलो करें- https://hindi.news18.com/news/career/

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज