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Know Your Army Pride: दुश्‍मनों पर मौत बनकर टूटे 'रूसी', पाक की सरजमीं में लहराया तिरंगा

लेफ्टिनेंट कर्नल रूसी होर्मुसजी बाजिना को वीर चक्र से सम्‍मानित किया गया था.

लेफ्टिनेंट कर्नल रूसी होर्मुसजी बाजिना को वीर चक्र से सम्‍मानित किया गया था.

Indo Pakistan War 1965: लेफ्टिनेंट कर्नल रूसी होर्मुसजी बाजिना के नेतृत्‍व में चंद सैनिकों ने न केवल पाकिस्‍तानी सेना के 100 सैनिकों को उनके अंजाम तक पहुंचा दिया, बल्कि एक अधिकारी सहित कई सैनिकों को बंदी बना लिया.

  • News18Hindi
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नई दिल्‍ली. Indo Pakistan War 1965: भारत-पाकिस्‍तान युद्ध 1965 को अंजाम तक पहुंचाने के लिए भारतीय सेना लगातार पाकिस्‍तानी इलाकों में अपनी विजय पताका फहरा रही थी. अमेरिकी सैन्‍य हथियारों, टैंकों और लड़ाकू विमानों से लैस पाकिस्‍तानी सेना की पकड़ लगातार अपने इलाको से छूटती जा रही थी. वहीं, भारतीय सेना के रणबांकुरे एक के बाद एक पाकिस्‍तानी गांवों में अपनी विजय पताका लहराते नजर आ रहे हैं.

भारतीय सेना के इन्‍हीं रणबांकुरों में शामिल थे महार रेजिमंट के लेफ्टिनेंट कर्नल रूसी होर्मुसजी बाजिना. कर्नल रूसी के अद्भुत युद्ध कौशल, साहस और नेतृत्‍व क्षमता के लिए वीर चक्र से सम्‍मानित किया गया था. आइये, आपको रूबरू कराते हैं कर्नल रूसी से और बताते हैं बहादुरी की वह दस्‍तां, जिसने इतिहास के पन्‍नों पर हमेशा के लिए नाम दर्ज कर दिया.

सामरिक नजरिये से पाकिस्‍तान का सियालकोट इलाका बेहद अहम रहा है. लिहाजा, पाकिस्‍तान ने इस इलाके के तमाम गांवों को बेहद मजबूत किले में तब्‍दील कर रखा था. वहीं भारतीय सेना भी इस इलाके से पाकिस्‍तानी सेना को खदेड अपनी विजय पताका फहराना चाहती थी.

इसी कड़ी में महार रेज‍िमेंट की एक बटालियन का नेतृत्‍व कर रहे लेफ्टिनेंट कर्नल रूसी होर्मुसजी बाजिना को सियालकोट सेक्‍टर के मुहादीपुर और छनी गांव में अपनी विजय पताका फहराने की‍ जिम्‍मेदारी सौंपी गई. अपने लक्ष्‍य की तरफ बढ़ रही भारतीय सेना को रोकने के लिद दुश्‍मन ने मोर्टार और तोपों से भारी गोलाबारी की.

लेकिन, भारतीय सेना के जोश और युद्ध कौशल के सामने पाकिस्‍तान की हर कोशिश नाकाम रही. आखिर में, लेफ्टिनेंट कर्नल रूसी होर्मुसजी बाजिना के नेतृत्‍व में भारतीय सेना ने 18 सितंबर 1965 की रात मुहदीपुर और छनी इलाके पर पूरी तरह कब्‍जा कर अपनी विजय पताका फहरा दी.

लेफ्टिनेंट कर्नल रूसी होर्मुसजी बाजिना के लिए चुनौती यहां पर खत्‍म नहीं हुई थी. युद्ध का यह पड़ाव पार करने के बाद, जैसे ही लेफ्टिनेंट कर्नल रूसी होर्मुसजी बाजिना ने अपनी बटालियन को पुनर्गठित करने की कवायद शुरू की ही थी, तभी पाकिस्‍तान ने एक बार फिर आर्टलरी फायरिग शुरू कर दी.

मौके की परिस्थितियों का फायदा उठाने के लिए पाकिस्‍तानी सेना ने एक बार फिर हमला किया, लेकिन भारतीय सेना ने इस हमले को सिरे से नाकाम कर दिया. युद्ध के इस पड़ाव में भारतीय सेना ने पाकिस्‍तान के 100 सैनिकों को मौंत की नींद सुला दिया और एक अधिकारी सहित नौ को युद्ध बंदी बना लिया.

इस साहसिक कार्रवाई में उच्च कोटि की वीरता, सूझबूझ और नेतृत्व का परिचय देने के लिए लेफ्टिनेंट कर्नल बाजिना को वीर चक्र से सम्‍मानित किया गया.

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