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kerala 11th Exam: 11वीं की परीक्षा स्कूलों में कराने की HC ने दी इजाजत

kerala 11th Exam: ऑनलाइन माध्यम से परीक्षा आयोजित करना उन छात्रों के लिए पक्षपाती होगा जिनके पास लैपटॉप, डेस्कटॉप और मोबाइल नहीं हैं.

kerala 11th Exam: ऑनलाइन माध्यम से परीक्षा आयोजित करना उन छात्रों के लिए पक्षपाती होगा जिनके पास लैपटॉप, डेस्कटॉप और मोबाइल नहीं हैं.

kerala 11th exam: केरल उच्च न्यायालय ने 27 अगस्त को अपने आदेश में कहा था कि परीक्षाएं कराना सरकारी नीति से जुड़ा मुद्दा है और इसमें हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है.

  • News18Hindi
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    नई दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने कोरोना वायरस संक्रमण के बीच केरल सरकार को कक्षा 11वीं की परीक्षाएं स्कूलों में कराने की शुक्रवार को अनुमति दी और छात्रों को किसी अप्रिय स्थिति का सामना नहीं करना पड़े, यह सुनिश्चित करने के संबंध में राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर संतोष व्यक्त किया.

    न्यायालय ने कहा कि इस मामले में समग्र रुख अपनाया जाना चाहिए और प्राधिकारी अपने कर्तव्यों के प्रति सचेत हैं. न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति सी टी रविकुमार की पीठ ने स्कूलों में छात्रों को बुला कर परीक्षा (ऑफलाइन)आयोजित करने के राज्य सरकार के फैसले पर दखल देने से इनकार करने के केरल उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली अधिवक्ता रसूलशान की याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी.

    शीर्ष अदालत ने कहा कि राज्य ने विस्तृत हलफनामा दाखिल किया है और वे कोरोना वायरस संक्रमण संबंधी सभी प्रोटोकॉल का पालन कर रहे हैं. पीठ ने कहा,‘‘राज्य ने, जो विवरण दिए हैं, हम उनसे संतुष्ट हैं और हम विश्वास करते हैं कि प्राधिकारी सभी एहतियाती और जरूरी कदम उठाएंगे ताकि छात्रों को किसी अप्रिय स्थिति का सामना नहीं करना पड़े, जो कम उम्र हैं और प्रस्तावित परीक्षा देने जा रहे हैं. याचिका खारिज की जाती है. ’’

    न्यायालय ने कहा कि उसने पहले हस्तक्षेप किया था क्योंकि सितंबर तक कोरोना की तीसरी लहर आने की आशंका थी. याचिकाकर्ता के अधिवक्ता प्रशांत पद्मनाभन ने कहा कि राज्य सरकार के हलफनामे में संतोषजनक उत्तर नहीं दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत ने राज्य के अधिवक्ता से पूछा है कि क्या केरल में कोविड-19के मामलों के बढ़ने को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया गया था, लेकिन हलफनामे में इस बात का कोई उत्तर नहीं दिया गया है कि इस मुद्दे पर विशेषज्ञों से राय ली गई है अथवा नहीं.

    पीठ ने कहा कि केरल सरकार ने संतोषजनक स्पष्टीकरण दिया है. केरल सरकार ने एक हलफनामा दाखिल करके शीर्ष अदालत को बताया कि जिन छात्रों के पास लैपटॉप और मोबाइल फोन नहीं हैं उनके लिए ऑनलाइन परीक्षा देना मुश्किल होगा.

    राज्य सरकार ने शीर्ष अदालत से कहा,‘‘ ऑनलाइन माध्यम से परीक्षा आयोजित करना उन छात्रों के लिए पक्षपाती होगा जिनके पास लैपटॉप, डेस्कटॉप और मोबाइल नहीं हैं. समाज के नचले तबके से ताल्लुक रखने वाले छात्र ऑनलाइन कक्षाओं के लिए मोबाइल फोन अथवा टैबलेट का सराहा लेते हैं. ’’

    सरकार ने कहा,‘‘ कई इलाकों में इंटरनेट कनेक्शन अथवा मोबाइल डाटा जैसी सुविधा मौजूद नहीं है. ये छात्र कभी ऑनलाइन माध्यम से परीक्षा नहीं दे पाएंगे. ’’

    गौरतलब है कि शीर्ष अदालत ने केरल में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बढ़ने के बीच कक्षा11 की परीक्षा स्कूलों में कराने के राज्य सरकार के फैसले पर तीन सितंबर को एक सप्ताह तक के लिए रोक लगा दी थी और कहा था,‘‘राज्य में हालात चिंताजनक हैं. ’’ परीक्षाएं छह सितंबर को होनी थी.

    रसूलशान ने अपनी याचिका में कहा कि केरल में संक्रमण की तीसरी लहर की आशंका के बीच 11वीं की कक्षा के नाबालिग छात्रों, जिनका टीकाकरण नहीं हुआ है,उन पर सार्वजनिक तौर पर परीक्षा में शामिल होने के लिए दबाव बनाना ‘अन्याय, अनुचित और तर्कहीन’ है.

    गौरतलब है कि केरल उच्च न्यायालय ने 27 अगस्त को अपने आदेश में कहा था कि परीक्षाएं कराना सरकारी नीति से जुड़ा मुद्दा है और इसमें हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है. (भाषा के इनपुट के साथ)

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