परफॉर्मेंस ग्रेड इंडेक्स रिपोर्ट: मध्यप्रदेश में सरकारी स्कूलों की हालत दयनीय, 16 मानदंडों पर फिसड्डी

प्राथमिक स्तर पर 30 बच्चों पर एक शिक्षक होना चाहिए. (सांकेतिक तस्वीर)

मध्यप्रदेश में छात्रों के अनुपात में शिक्षकों की काफी कम संख्या है. 5000 से ज्यादा स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं है. ग्रामीण इलाकों में ज्यादातर स्कूल केवल एक ही शिक्षक के भरोसे हैं. प्राइमरी स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे ही स्कूल संचालित हो रहा है.

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भोपाल. मध्यप्रदेश में स्कूली शिक्षा के करोड़ों के बजट के बाद भी सरकारी स्कूलों की हालत बेहद दयनीय है. सरकारी स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर में बीते 3 सालों से कोई सुधार नहीं हुआ है. परफॉर्मेंस ग्रेड इंडेक्स में प्रदेश तीसरे ग्रेड पर है. बीते 3 सालों से 16 मापदंडों में मध्यप्रदेश छठवें स्तर पर ही अटका हुआ है.

16 मापदंडों में लगातार पिछड़ रहा मध्यप्रदेश
परफारमेंस ग्रेड इंडेक्स (पीजीआई) में 16 मापदंडों में मध्यप्रदेश लगातार पिछड़ रहा है. इनमें स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर, ड्रॉपआउट रेट, छात्र और शिक्षकों का अनुपात,स्कूलों में बच्चों की पहुंच शामिल है. 82 फ़ीसदी से ज़्यादा स्कूली बच्चे स्कूल छोड़ देते हैं. नामांकन बढ़ाने के लिए एडमिशन होने के बाद बच्चों की संख्या लगातार कम होती जा रही है. प्राथमिक स्कूल में लड़कों का नामांकन 3942871 और लड़कियों का नामांकन 3621229 था जो हायर सेकेंडरी तक 82 फ़ीसदी कम हो गया.

इंदौर जिले में 7500  शिक्षक लगभग 1040 स्कूलों में पदस्थ
मध्यप्रदेश में इंदौर जिले में 7500  शिक्षक लगभग 1040 स्कूलों में पदस्थ हैं. जबकि 9000 से ज्यादा शिक्षकों की जरूरत है. ज्यादातर प्रभारी स्कूल प्राचार्यो के भरोसे हैं. जबलपुर जिले के 450 से 500 स्कूलों में बिजली कनेक्शन ही नहीं हुआ है. सीधी जिले के 43 स्कूलों को शिक्षको की दरकार है. सागर जिला मुख्यालय में वर्ग 1 वर्ग 2 के 3000 शिक्षक कम है. अतिथि शिक्षकों के भरोसे स्कूल चल रहे हैं.

दमोह जिले में 2143 स्कूलों में 1391 सबसे ज्यादा प्राइमरी स्कूल है इनमें 800 में बिजली और फर्नीचर की अब तक समस्या है. शिवपुरी जिले में 2748 स्कूलों में से 475 स्कूल भवन जर्जर हालत में है. 735 स्कूलों में फर्नीचर और बिजली की व्यवस्था नहीं है. करीब 1500शिक्षकों की शिवपुरी जिले में कमी है.

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शिक्षकों की भी प्रदेश में भारी कमी
मध्यप्रदेश में छात्रों के अनुपात में शिक्षकों की काफी कम संख्या है. प्राथमिक स्तर पर 30 बच्चों पर एक शिक्षक होना चाहिए. मध्य प्रदेश में 48 छात्रों पर एक शिक्षक है. 5000 से ज्यादा स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं है. ग्रामीण इलाकों में ज्यादातर स्कूल केवल एक ही शिक्षक के भरोसे हैं. प्राइमरी स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे ही स्कूल संचालित हो रहा है.

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