• Home
  • »
  • News
  • »
  • education
  • »
  • Know Your Army Heroes: मेजर खान ने दुश्‍मन के गांव में लहराया तिरंगा, साथियों की जान बचाते वक्‍त हुई शहादत

Know Your Army Heroes: मेजर खान ने दुश्‍मन के गांव में लहराया तिरंगा, साथियों की जान बचाते वक्‍त हुई शहादत

1965 के भारत पाक युद्ध में मेजर अब्‍दुल रफ़ी खान ने देश के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्‍च बलिदान दिया था.

1965 के भारत पाक युद्ध में मेजर अब्‍दुल रफ़ी खान ने देश के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्‍च बलिदान दिया था.

India-Pakistan War 1965: दुश्‍मनों का मुकाबला करते हुए मेजर अब्‍दुल खान ने देश के लिए प्राणों का सर्वोच्‍च बलिदान दे दिया.  

  • News18Hindi
  • Last Updated :
  • Share this:

नई दिल्‍ली. India-Pakistan War 1965: पाकिस्‍तान की तरफ से थोपे गए 1965 के युद्ध को भारतीय सेना अपने रण कौशल और बहादुरी से अंजाम तक ले जा रही थी. यह बात 17 सितंबर 1965 की है. मेजर अब्‍दुल रफ़ी खान के नेतृत्‍व में भारतीय सेना की गढ़वाल राइफल्‍स ने पाकिस्‍तान के पश्चिम चाविंडा इलाके में आने वाले देवगंडी गांव पर कब्‍जा कर लिया था. चूंकि, दुश्‍मन की फितरत लगातार पीठ पर वार करने की रही है, लिहाजा गांव के बाहर गढ़वाल राइफल्‍स की पूरी बटालियन ने रक्षात्‍मक स्थित ले रखी थी.

गढ़वाल राइफल्‍स की इस कामयाबी से पाकिस्‍तान बुरी तरह बौखलाया हुआ था. अपने ही घर में हार की मार झुठलाने के लिए पाकिस्‍तान ने एक बार फिर टैंकों को देवगंडी गांव की तरफ रवाना कर दिया. मेजर अब्‍दुल रफ़ी खान के नेतृत्‍व में भारतीय सेना ने एक बार फिर पाकिस्‍तानी सेना को मुंहतोड़ जवाब देना शुरू किया. देखते ही देखते, पाकिस्‍तानी सेना अपने टैंक को रणभूमि में छोड़कर भाग खड़ी हुई. देवगंडी गांव पर भारतीय सेना की विजय पताका लगातार लहराती रही.

बटालियन को मिले थे बेस वापसी के आदेश, लेकिन…
पाकिस्‍तान को उसकी सरजमीं पर लगातार दो बार धूल चटाने के बाद भारतीय सेना का उत्‍साह कई गुना बढ़ गया था. इसी बीच, मुख्‍यालय से गढ़वाल राइफल्‍स की बटालियन को वापस आने के आदेश दे दिए गए. मुख्‍यालय के इस आदेश ने मेजर खान को दुविधा में डाल दिया. दुविधा इस बात को लेकर थी कि वे आदेश का पालन कर सुरक्षित बेस में वापस लौट जाएं या फिर युद्ध में गंभीर रूप से जख्‍मी हुए अपने साथियों की देखभाल के लिए वहां रुकें. आखिर में, मेजर खान ने युद्ध भूमि पर रुककर अपने साथियों की देखभाल करने का फैसला किया.

और देश के लिए प्राणों का बलिदान दे गए मेजर खान
देवगंडी गांव से गढ़वाल राइफल्‍स की वापसी की जानकारी अब तक पाकिस्‍तान के पास पहुंच चुकी थी. पाकिस्‍तान ने एक बार फिर हमले की साजिश रची. इस बार, हमले के लिए आर्टलरी, टैंक और इंफेन्‍ट्री को एक साथ जंग में उतारा गया. इधर, मेजर अब्‍दुल खान रफी खान बीते दो लड़ाइयों में जख्‍मी हुए अपने साथियों को सुरक्षित स्‍थान पहुंचाने की कवायद में जुटे हुए थे. तभी घात लगाए बैठी पाकिस्‍तानी सेना ने आर्टलरी फायरिंग शुरू कर दी और दुश्‍मन सेना के एक गोले की चपेट में मेजर अब्‍दुल रफी खान आ गए.

Major Abdul Rafey Khan Garhwal Rifles Chawinda Butur Devgandi Pak War 1965 Indian Army Pride Heroes nodakm - Know Your Army Heroes: मेजर खान ने दुश्‍मन के गांव पर लहराया तिरंगा, साथियों की जान बचाते वक्‍त हुई शहादत Major Abdul Rafey Khan, Garhwal Rifles, Chawinda, Butur Devgandi, Indo Pakistan War 1965, Indian Army, Army Pride, Army Heroes, मेजर अब्‍दुल रफी खान, गढ़वाल राइफल्‍स, चाविंडा, बुटूर देवगंडी, भारत पाकिस्‍तान युद्ध 1965, भारतीय सेना, भारतीय सेना का गौरव, भारतीय सेना के वीर योद्धा

इंडो-पाक युद्ध 1965 में भारतीय सेना ने पाकिस्‍तान को हर मोर्चे पर शिकस्‍त दी थी.

इस युद्ध में मेजर अब्‍दुल रफी खान ने देश की रक्ष्‍ज्ञा के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्‍च बलिदान दिया. मेजर अब्दुल रफ़ी खान के अनुकरणीय साहस और कर्तव्य के प्रति समर्पण को देखते हुए उन्‍हें वीर चक्र से सम्‍मानित किया गया.

पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

हमें FacebookTwitter, Instagram और Telegram पर फॉलो करें.

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज