आईएएस की तैयारी के लिए ऑनलाइन क्‍लासेज का सहारा कितना मददगार, पूर्व सिविल सर्वेन्‍ट से समझें

करंट अफेयर्स की तैयारी के लिए प्रतिदिन 45 मिनट से एक घंटा न्यूज पेपर पढ़ें.

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आपको इस बात में कोई सन्‍देह नहीं करना चाहिए कि सिविल सर्विस परीक्षा के लिए विषय को पढ़ने और रटने से कई गुना ज्‍यादा जरूरी उसे समझना होता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 30, 2021, 3:39 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना का प्रकोप जिस तरीके से लगातार बढ़ता जा रहा है, उसको देखते हुए यह सोचना गलत होगा कि कुछ दिनों के बाद आईएएस परीक्षा का मार्गदर्शन देने वाले संस्‍थान खुलेंगे. ऐसे में परीक्षा में बैठने वाले परीक्षार्थियों का हताश होना स्‍वाभाविक है. यहाँ मैं आपकी तसल्‍ली के लिए जो कि बिल्‍कुल सही भी है, बताना चाहूंगा कि इस स्थिति को लेकर अधिक निराश होने की जरूरत बिल्‍कुल नहीं है. प्रतियोगी परीक्षा का एक बहुत ही स्‍थापित एवं मूल सिद्धांत होता है कि जो घटना सब पर लागू होती है, उस घटना का नफा-नुकसान शून्‍य हो जाता है.

आईएएस की तैयारी कराने वाले अनेक ऑनलाइन संस्‍थान

लेकिन एक अच्‍छी बात यह है कि विकल्‍प के रूप में आपके पास आज आईएएस की तैयारी कराने वाले अनेक ऑनलाइन संस्‍थान उपलब्‍ध हैं. इसे आप अपने लिए टेक्‍नॉलाजी की एक बड़ी देन कह सकते हैं. यदि सच में आपको ऐसा महसूस होता है कि प्रारंभिक एवं मुख्‍य परीक्षा के लिए निर्देशन चाहिए ही, तो आपको इस विकल्‍प पर पूरी सदाशयता के साथ विचार करना चाहिए.

मैं जानता हूं कि यदि आप ऐसा करना चाहते भी हैं, तो आपमें से बहुतों के लिए ऐसा करना इसके लिए दी जाने वाली राशि को देखते हुए थोड़ा कठिन होगा. लेकिन यहाँ सवाल यह उठता है कि हम इन कठिनाइयों से उबरकर अपनी जरूरतों को पूरा करते हैं या फिर कठिनाइयों के सामने समर्पण करके उसके शिकार हो जाते हैं.
ऑनलाइन क्‍लासेस की सुविधा का भरपूर इस्‍तेमाल करें

ऑनलाइन क्‍लासेस के साथ एक बहुत अच्‍छी बात है, जो फिजीकल क्‍लासेस के साथ नहीं है. और आपको चाहिए कि आप इस सुविधा का भरपूर इस्‍तेमाल करें. ऑफलाइन क्‍लासेस में आपके पास इस बात का मूल्‍यांकन करने का कोई ठोस आधार नहीं होता है कि वहाँ के गाइडेंस का स्‍तर क्‍या है. आप ज्‍यादा से ज्‍यादा यही कर सकते हैं कि पढ़ने वालों से इसके बारे में जान-समझकर निर्णय लें. लेकिन प्रत्‍यक्ष अनुभव की वहाँ कोई संभावना नहीं रहती है.

अलग-अलग विषयों के लेक्‍चर्स को कई-कई बार सुनें



ऑनलाइन क्‍लासेस इस मायने में अधिक व्‍यावहारिक एवं पारदर्शी हैं. ज्‍यादातर ऑनलाइन क्‍लासेस चलाने वाले संस्‍थानों ने अपने डेमो लेक्‍चर्स अपने वेबसाईट पर डाल रखे हैं. आपको चाहिए कि आप उन लेक्‍चर्स को ध्‍यान से सुनें. जितने अलग-अलग विषयों के लेक्‍चर्स डाले गये हैं, उन सबको सुनें और कई-कई बार सुनें.

फिर यह देखें कि ये लेक्‍चर्स आपकी जरूरतों को पूरा कर पा रहे हैं या नहीं. आप उसके मनोरंजक और खूबसूरती पर न जाएं. आप इस बात पर जाएं कि उसमें किसी भी टॉपिक को पढ़ाने के बजाए समझाने की कितनी कोशिश की गई है. यदि लेक्‍चर्स आपके सामने सीधे-सीधे किताबी तथ्‍यों को रख देते हैं, तो फिर आपके लिए उतने उपयोगी नहीं होंगे. आपको इस बात में कोई सन्‍देह नहीं करना चाहिए कि सिविल सर्विस परीक्षा के लिए विषय को पढ़ने और रटने से कई गुना ज्‍यादा जरूरी उसे समझना होता है.

डेमो लेक्‍चर्स सुनने को समय की बर्बादी न समझें

आज ऑनलाइन क्‍लासेस के क्षेत्र में बहुत से संस्‍थान हो गये हैं. इसलिए मैं समझ सकता हूं कि जब आप अपने लिए उपयुक्‍त संस्‍थान का चयन करने के लिए इसके डेमो लेक्‍चर्स सुनना शुरू करेंगे, तब ये आपसे काफी समय की मांग करेंगे. लेकिन यह समय दिया ही जाना चाहिए. आप इसे समय की बर्बादी न समझकर समय का सबसे अधिक उपयोग समझें, क्‍योंकि गलत रास्‍ते का चयन कभी भी किसी को सही मंजिल तक नहीं पहुंचाता है. (लेखक डॉ. विजय अग्रवाल पूर्व सिविल सर्वेन्‍ट एवं afeias के संस्‍थापक हैं.)

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