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parents will not be forced to buy expensive books and change school dress in three years directorate of education issued orders

महंगी किताबें और तीन साल में स्कूल ड्रेस बदलने को मजबूर नहीं होंगे अभिभावक, शिक्षा निदेशालय ने जारी किए आदेश

महंगी किताबें और तीन साल में स्कूल ड्रेस बदलने को मजबूर नहीं होंगे अभिभावक

महंगी किताबें और तीन साल में स्कूल ड्रेस बदलने को मजबूर नहीं होंगे अभिभावक

School Education : निदेशालय ने आदेश में कहा है, ‘‘स्कूल नियमानुसार अगले सत्र के लिए आवश्यक किताबों और पठन-पाठन की अन्य सामग्री की प्रतिकक्षा के हिसाब से सूची स्कूल की वेबसाइट पर डालें और अन्य माध्यमों से इसकी स्पष्ट जानकारी अभिभावकों को दें.’’ आदेश के अनुसार, इसके अलावा स्कूल आसपास की कम से कम पांच ऐसी दुकानों के नाम, पता और फोन नंबर भी देंगे जहां सभी किताबें और स्कूल की ड्रेस उपलब्ध है.

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    नई दिल्ली. School Education : दिल्ली सरकार ने निजी स्कूलों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वे अभिभावकों को स्कूल या किसी विशेष दुकान आदि से महंगी किताबें और स्कूली ड्रेस खरीदने को मजबूर करते हैं तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि कम से कम तीन साल तक वे स्कूल ड्रेस का रंग, डिजाइन या अन्य कोई विशेष बदलाव नहीं करेंगे. शिक्षा निदेशालय ने एक आधिकारिक आदेश में कहा कि निजी स्कूल न्यास या सोसायटियों द्वारा संचालित होते हैं और उनके पास लाभ कमाने या व्यवसायिकरण का कोई विकल्प नहीं है.

    निदेशालय ने आदेश में कहा है, ‘‘स्कूल नियमानुसार अगले सत्र के लिए आवश्यक किताबों और पठन-पाठन की अन्य सामग्री की प्रतिकक्षा के हिसाब से सूची स्कूल की वेबसाइट पर डालें और अन्य माध्यमों से इसकी स्पष्ट जानकारी अभिभावकों को दें.’’ आदेश के अनुसार, इसके अलावा स्कूल आसपास की कम से कम पांच ऐसी दुकानों के नाम, पता और फोन नंबर भी देंगे जहां सभी किताबें और स्कूल की ड्रेस उपलब्ध है.

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    अभिभावकों को मिलेगी राहत
    बयान में कहा गया है, ‘‘लेकिन, स्कूल इन चीजों की खरीदी किसी विशेष दुकान से करने के लिए अभिभावकों को मजबूर नहीं कर सकते हैं. अभिभावक अपनी सुविधा के अनुसार किताबें और स्कूल ड्रेस जिस दुकान से चाहें खरीद सकते हैं.’’ उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि इस आदेश से उन अभिभावकों को राहत मिलेगी जो निजी स्कूलों की महंगी किताबों और वर्दी की बोझ तले दब रहे थे. उन्होंने कहा, ‘‘दो साल पहले शुरू हुए कोविड महामारी के दौर में कई परिवार की आजीविका चली गयी है. उनके लिए विशेष दुकानों से महंगी दामों पर किताबें और वर्दी खरीदना मुश्किल हो गया है.’’ (भाषा के इनपुट के साथ)

    Tags: Education news, School education, School news

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