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Sunday special: असिस्‍टेंट प्रोफेसर बनने के लिए PhD होगा अनिवार्य, जानें कब से लागू होंगे नए नियम

Sunday special: असिस्‍टेंट प्रोफेसर बनने के लिए PhD होगा अनिवार्य, जानें कब से लागू होंगे नए नियम

मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने जून 2018 में घोषणा की थी कि जुलाई 2021 से कॉलेज और यूनिवर्सिटी में पढ़ाने के लिए पीएचडी की डिग्री अनिवार्य होगी.

मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने जून 2018 में घोषणा की थी कि जुलाई 2021 से कॉलेज और यूनिवर्सिटी में पढ़ाने के लिए पीएचडी की डिग्री अनिवार्य होगी.

एक जुलाई 2021 से कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज (Universities) में असिस्टेंट प्रोफेसर (Assistant Professor) बनने के लिए पीएचडी (Phd) अनिवार्य हो जाएगा. रेगुलेशन 2018 के तहत मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर (Prakash Javadekar) ने इस बात की घोषणा की थी.

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Sunday Special 2020: अगर आप मास्टर डिग्री और एमफिल करने के बाद किसी कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में टीचिंग से अपने करियर की शुरूआत करना चाहते हैं तो ये खबर आपके काम की है. मोदी-1 सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने जून 2018 में घोषणा की थी कि जुलाई 2021 से कॉलेज और यूनिवर्सिटी में पढ़ाने के लिए पीएचडी की डिग्री अनिवार्य होगी.

इन नए नियमों को समझने के लिए न्यूज18 इंडिया ने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा  के जनसंचार विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर संदीप वर्मा से बात की. वर्मा ने कुछ महत्वपूर्ण बातें बताईं, जिनको हम आपके साथ साझा कर रहे हैं.

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दुनिया के पांच सौ टॉप रैंकिंग देशी- विदेशी शैक्षणिक संस्थानों से पीएचडी करने वाले लोगों को भारत में सहायक प्रोफेसर पद पर नियुक्ति में मान्यता दी जाएगी.


क्या कहता है रेगुलेशन 2018?
मानव संसाधन मंत्रालय ने कहा था कि 2021 से कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए संबंधित विषय में न्यूनतम पीएचडी होना जरूरी होगा. यहां नेट जेआरएफ की अनिवार्यता नहीं रह जाएगी. अगर किसी के पास नेट या जेआरएफ के साथ पीएचडी है तो यह सोने में सुहागा जैसा है.

टॉप 500 यूनिवर्सिटीज को दिया जाएगा महत्व
जावड़ेकर ने कहा था कि नई गाइडलाइंस में दुनिया के पांच सौ टॉप रैंकिंग विदेशी शैक्षणिक संस्थानों से पीएचडी करने वाले लोगों को भारत में सहायक प्रोफेसर पद पर नियुक्ति में मान्यता दी जाएगी.

2009 से पहले पीएडी वालों का क्या?
जिन्होंने 2009 से पहले पीएचडी किया है, वह असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए योग्य होंगे. नेट जेआरएफ एग्जाम क्वालिफाई करने की जरूरत अब किसी को भी नहीं होगी.

वर्तमान में सहायक प्रोफेसर पदों के लिए न्यूनतम पात्रता
- उम्मीदवार के पास संबंधित विषय में मास्टर डिग्री होनी चाहिए.
- उम्मीदवार को राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NET) परीक्षा पास होना जरूरी है.
- उम्मीदवार के संबंधित विषय में तीन रिसर्च पेपर प्रकाशित हों तो यह अच्छा है. किताब लिखी हो तो और भी अच्छा है.

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सातवें वेतन आयोग द्वारा अनुशंसित विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए नई योग्यताएं निर्धारित की गई हैं.


सातवें वेतन आयोग द्वारा अनुशंसित विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए न्यूनतम योग्यता (जुलाई 2021 से)
- विश्वविद्यालयों में सहायक प्रोफेसर बनने और सहायक से एसोसिएट प्रोफेसर पद पर प्रमोशन के लिए पीएचडी होना जरूरी है.
- नई व्यवस्था के तहत एक सरलीकृत शिक्षक मूल्यांकन ग्रेडिंग प्रणाली शुरू की जाएगी. इसके द्वारा टीचरों का चयन किया जाएगा.
- शैक्षणिक प्रदर्शन संकेतक (एपीआई) आधारित मूल्यांकन प्रणाली को भी हटा दिया जाएगा.
- कॉलेजों में एसोसिएट प्रोफेसर के पदों पर पदोन्नति उसके शिक्षण केंद्रित मीट्रिक पर आधारित होगी.
- विश्वविद्यालय आधारित शिक्षण में, पदोन्नति पर और विश्वविद्यालयों में शिक्षण और शोध-केंद्रित मीट्रिक पर आधारित होगी.

निजी विश्वविद्यालय से पीएचडी की मान्यता है?
देश और विदेश के किसी भी निजी विश्वविद्यालय से पीएचडी की मान्यता है, लेकिन उसकी रैंकिंग दुनिया के टॉप 500 के अंदर होनी चाहिए.

नोट- फिलहाल 2021 तक पहले जैसे नियमों के आधार पर ही कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में असिस्टेंट प्रोफेसर पदों पर भर्ती होती रहेगी. रेगुलेशन 2018 अभी लागू नहीं हुआ है. अगर जुलाई 2021 से यह लागू हो जाता है तो पीएचडीधारी लोगों को इसका बड़ा लाभ मिलेगा. वहीं जिन्होंने नेट या जेआरएफ कर रखा है उनको निराश होगा पड़ सकता है. इसलिए अगर आप असिस्टेंट प्रोफेसर बनना चाहते हैं तो अभी से पीएचडी शुरू कर दें.

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Tags: 10 top universities, HRD ministry, Prakash Javadekar, Teacher, Teacher job, UGC-NET exam

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