रंजीत सिंह दिसाले: दो हजार की आबादी वाले गांव से ‘ग्लोबल टीचर’ पुरस्कार तक का सफर

(photo: www.globalteacherprize.org)

(photo: www.globalteacherprize.org)

शिक्षा में नए प्रयोगों के हिमायती दिसाले ने लड़कियों की शिक्षा पर जोर दिया और ‘क्विक रिस्पांस’ (क्यू आर ) कोड पाठ्यपुस्तक लेकर आए जो जिले से राज्य और फिर पूरे देश में लागू हो गई.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 6, 2020, 7:10 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. देश में शिक्षा प्रणाली में बदलाव लाने का रंजीत सिंह दिसाले का जज्बा ‘थ्री इडियट्स’ या ‘तारे जमीं पर’ के आमिर खान की याद दिलाता है. इसी जज्बे की वजह से 12,000 उम्मीदवारों के बीच उन्हें ‘ग्लोबल टीचर’ पुरस्कार मिला है, जिसमें विजेता को सात करोड़ रुपये मिलते हैं. उनकी इस उपलब्धि ने भारत ही नहीं, बल्कि अभावों के बीच दुनिया में तालीम के बीज बो रहे असंख्य शिक्षकों को गौरवान्वित किया है.

‘ग्लोबल टीचर’ पुरस्कार से पहले पाए ये अवॉर्ड

माइक्रोसॉफ्ट के ‘इनोवेटिव एजुकेटर एक्सपर्ट’ पुरस्कार और राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान के ‘वर्ष 2018 के सर्वश्रेष्ठ नवप्रवर्तक’ पुरस्कार से लेकर ‘ग्लोबल टीचर’ पुरस्कार तक, ये सब दिसाले की प्रतिभा और समर्पण की कहानी बयां करते हैं.

12,000 उम्मीदवारों के बीच ‘ग्लोबल टीचर’ पुरस्कार जीता
महाराष्ट्र के सोलापुर जिले की माढा तालुका स्थित दो हजार से भी कम की आबादी वाले परीतेवाडी गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाले दिसाले का 12,000 उम्मीदवारों के बीच ‘ग्लोबल टीचर’ पुरस्कार जीतना न सिर्फ भारत के लिए गौरव की बात है, बल्कि दुनिया में अभावों के बीच शिक्षा के बीज बो रहे असंख्य शिक्षकों के लिए भी बड़े गौरव की बात है.

पहली बार भारत के किसी शिक्षक को यह पुरस्कार मिला

दिसाले को ‘ग्लोबल टीचर’ पुरस्कार के लिए चुने जाने की घोषणा लंदन में एक ऑनलाइन समारोह में अभिनेता स्टीफन फ्राई ने की थी. पहली बार भारत के किसी शिक्षक को यह पुरस्कार मिला है. बड़ी बात यह है कि डिसले को विश्व के 140 देशों से 12 हजार से अधिक शिक्षकों में से चुना गया है.



पुरस्कार के 7 करोड़ का बड़ा हिस्सा बाकी दावेदारों के साथ बांटने की घोषणा

यूनेस्को और लंदन के वार्की फाउंडेशन द्वारा दिए जाने वाले इस पुरस्कार में उन्हें सात करोड़ रुपये दिए जाएंगे. दिसाले ने हालांकि पुरस्कार का बड़ा हिस्सा बाकी दावेदारों के साथ बांटने की घोषणा की और यह भी कहा कि यह फैसला भावनाओं में बहकर नहीं, बल्कि सोच समझकर काफी पहले ही ले लिया था.

शिक्षक ‘इनकम’ के लिए नहीं ‘आउटकम’ के लिए काम करते हैं

उन्होंने बार्शी में अपने घर से न्यूज एजेंसी से कहा ,‘अगर मैं अकेले यह पुरस्कार ले लूं तो सही नहीं होगा क्योंकि सभी ने शानदार काम किया है. शिक्षक ‘इनकम’ के लिए नहीं ‘आउटकम’ के लिए काम करते हैं. हम सभी मिलकर समाज की दशा और दिशा बदल सकते हैं.’

पिता ने शिक्षक बनने की प्रेरणा दी

रैगिंग से परेशान होकर इंजीनियरिंग बीच में ही छोड़ने वाले दिसाले को उनके पिता ने शिक्षक बनने की प्रेरणा दी. प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद वह 11 साल पहले सूखाग्रस्त परीतेवाड़ी में जिला परिषद प्राथमिक शाला में शिक्षक नियुक्त हुए. स्कूल के नाम पर टूटी-फूटी इमारत, 110 छात्र और पांच शिक्षक लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी.

‘क्विक रिस्पांस’ (क्यू आर ) कोड पाठ्यपुस्तक लेकर आए 

शिक्षा में नए प्रयोगों के हिमायती दिसाले ने लड़कियों की शिक्षा पर जोर दिया और ‘क्विक रिस्पांस’ (क्यू आर ) कोड पाठ्यपुस्तक लेकर आए जो जिले से राज्य और फिर पूरे देश में लागू हो गई. इसमें छात्र क्यू आर कोड स्कैन कर ऑडियो, वीडियो व्याख्यान, कहानी और प्रोजेक्ट देख सकते थे.

शिक्षा को रोचक और मनोरंजक बनाने वाले दिसाले के प्रयास

शिक्षा को रोचक और मनोरंजक बनाने वाले दिसाले के इन प्रयासों से स्कूल में छात्रों की उपस्थिति सौ फीसदी रही और उसे जिले के सर्वश्रेष्ठ स्कूल का पुरस्कार मिला. लेकिन यह पुरस्कारों की एक कड़ी की शुरुआत भर थी जिसकी परिणिति दुनिया के सर्वश्रेष्ठ शिक्षक के पुरस्कार के साथ हुई. उन्हें माइक्रोसॉफ्ट ने ‘इनोवेटिव एजुकेटर एक्सपर्ट’ का पुरस्कार दिया और उन्होंने राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान का ‘वर्ष 2018 के सर्वश्रेष्ठ नवप्रवर्तक’ का पुरस्कार भी जीता.

दिसाले इस बार सारी प्रक्रियाओं में खरे उतरते रहे

‘ग्लोबल टीचर’ पुरस्कार के लिए प्रक्रिया करीब साल भर चली और कोरोना महामारी के कारण विलंब भी होता गया. पहले प्रयास में नाकाम रहे दिसाले इस बार सारी प्रक्रियाओं में खरे उतरते रहे और लड़कियों की शिक्षा तथा क्यूआर कोड ने उन्हें दूसरों से बेहतर बनाया. ‘थ्री इडियट्स ’ या ‘तारे जमीं पर’ के आमिर खान जैसे किरदारों की तरह डिसले का भी मानना है कि शिक्षकों को नयी पहल कर शिक्षा को रोचक बनाना चाहिए और सरकार से उनकी इतनी सी मांग है कि एक पूरी पीढ़ी को तैयार करने वाले शिक्षकों की आवाज सुनी जानी चाहिए.

ये भी पढ़ें-

JRB त्रिपुरा ने मल्टी-टास्किंग स्टाफ के लिए निकालीं 2500 वैकेंसी, 5वीं-8वीं पास करें अप्लाई

UPPCL JE रिक्रूटमेंट 2020: जूनियर इंजीनियर ट्रेनी के लिए 212 वैकेंसी, डायरेक्ट लिंक से करें अप्लाई

जरूरी है कि शिक्षकों की आवाज सुनी जाए.

उन्होंने कहा, शिक्षा के क्षेत्र में कई चुनौतियां हैं, मसलन लड़कियों की शिक्षा के आंकड़े अभी भी अच्छे नहीं हैं. बच्चों के बीच में ही स्कूल छोड़ देने की समस्या है जो कोरोना महामारी के बीच और बढ़ गई. सरकार और शिक्षकों को मिलकर इन चुनौतियों से निपटना होगा. इसके लिए जरूरी है कि शिक्षकों की आवाज सुनी जाए. (भाषा के इनपुट के साथ)

सभी राज्यों की बोर्ड परीक्षाओं/ प्रतियोगी परीक्षाओं, उनकी तैयारी और जॉब्स/करियर से जुड़े Job Alert, हर खबर के लिए फॉलो करें- https://hindi.news18.com/news/career/

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज