मेडिकल स्टूडेंट्स को झटका- हरियाणा सरकार ने 66% बढ़ाई MBBS की फीस, यहां समझें पूरा फीस स्ट्रक्चर

हरियाणा में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की फीस में वृद्धि की गई है.
हरियाणा में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की फीस में वृद्धि की गई है.

इस नीति के तहत एमबीबीएस डिग्री कोर्स के लिए चयनित उम्मीदवारों को 10 लाख रुपये का वार्षिक बॉन्ड भरना होगा, जिसका भुगतान प्रत्येक कैलेंडर वर्ष की शुरुआत में किया जाएगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 9, 2020, 7:08 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. हरियाणा में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की फीस में, राज्य सरकार की ओर से वृद्धि की गई है. 2020-21 के एमबीबीएस पाठ्यक्रम के लिये शिक्षा शुल्क में वृद्धि के इस कदम से कई गरीब बच्चों के माता-पिता के सपने चकनाचूर हो जायेंगे.

शुल्क बढ़ाकर सालाना दस लाख रुपये 
राज्य ने सरकारी कॉलेजों में चिकित्सा शिक्षा के शुल्क को बढ़ा दिया है. राज्य सरकार ने एमबीबीएस पाठ्यक्रम के लिये शुल्क बढ़ाकर सालाना दस लाख रुपये कर दिया है, जो पूरे पाठ्यक्रम के लिये 40 लाख रुपये हो जायेगा. हालांकि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि एमबीबीएस पाठ्यक्रम की फीस में मामूली बढ़त की गई है.

चार साल में 3.71 लाख रुपये, कर्ज की राशि के तौर पर 36,28,270 रुपये भी चुकाने पड़ेंगे
चिकित्सा शिक्षा शुल्क के ढांचे में बदलाव के साथ छात्रों को अब चार साल में 3.71 लाख रुपये देने होंगे. इसके अलावा छात्रों को कर्ज की राशि के तौर पर 36,28,270 रुपये भी चुकाने पड़ेंगे. इससे पहले यह शुल्क लगभग 53,000 रुपये सलाना था. इसके अलावा हॉस्टल का खर्च 15,000-20,000 रुपये था.



कुल फीस करीब तीन लाख रुपये थी
हरियाणा में डॉक्टर बनने के लिये कुल फीस करीब तीन लाख रुपये थी. राज्य सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, चिकित्सकों के पेशे को प्रोत्साहित करने के बारे में एक नीति लायी गयी है, ताकि वे सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में हरियाणा सरकार की चिकित्सा सेवा अथवा सरकारी मेडिकल कॉलेजों का विकल्प चुनें.

बॉन्ड राशि के लिए शिक्षा ऋण की सुविधा का विकल्प 
इस नीति के तहत कहा गया है कि उम्मीदवार को बॉन्ड राशि के लिए शिक्षा ऋण की सुविधा का विकल्प देने के साथ ही राज्य सरकार एमबीबीएस पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थान में नौकरी मिलने की स्थिति में उम्मीदवारों के कर्ज की किस्त चुकाएगी.

उम्मीदवार बॉन्ड की राशि और शुल्क का स्वयं भुगतान
इसमें यह भी कहा गया है कि उम्मीदवार बॉन्ड की राशि और शुल्क का स्वयं भी भुगतान कर सकते हैं. राज्य के निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस पाठ्यक्रम का शुल्क 15 लाख रुपये से 18 लाख रुपये के बीच है. आधिकारिक विज्ञप्ति में खट्टर के हवाले से कहा गया कि फीस में कई वर्षों से वृद्धि नहीं की गई थी. उन्होंने कहा कि कई अन्य राज्यों की तुलना में हरियाणा में मेडिकल की फीस अब भी बहुत कम है.

ये भी पढ़ें-
NEET 2020 Admission: यूपी सरकार ने तय की प्राइवेट मेडिकल कॉलेज की अधिकतम फीस, जानें पूरी डिटेल
JoSAA 6th सीट अलॉटमेंट रिजल्ट 2020 josaa.nic.in पर जारी, डायरेक्ट लिंक से करें चेक

फीस में बदलाव की मुख्य बातें
-चिकित्सा शिक्षा शुल्क के ढांचे में बदलाव के साथ छात्रों को अब चार साल में 3.71 लाख रुपये देने होंगे.
-इसके अलावा छात्रों को कर्ज की राशि के तौर पर 36,28,270 रुपये भी चुकाने पड़ेंगे.
-पहले यह शुल्क लगभग 53,000 रुपये सलाना था.
-इसके अलावा हॉस्टल का खर्च 15,000-20,000 रुपये था.
-हरियाणा में डॉक्टर बनने के लिये कुल फीस करीब तीन लाख रुपये थी .

इस नीति के तहत एमबीबीएस डिग्री कोर्स के लिए चयनित उम्मीदवारों को 10 लाख रुपये का वार्षिक बॉन्ड भरना होगा, जिसका भुगतान प्रत्येक कैलेंडर वर्ष की शुरुआत में किया जाएगा.

-उम्मीदवार को बॉन्ड राशि के लिए शिक्षा ऋण की सुविधा का विकल्प देने के साथ ही राज्य सरकार एमबीबीएस पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थान में नौकरी मिलने की स्थिति में उम्मीदवारों के कर्ज की किस्त चुकाएगी.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज