'आधार' में हैं वोटर आईडी कार्ड से डेढ़ गुना ज्‍यादा कमियां

आधार कार्ड में नाम, पते, पहचान और लिंग संबंधी गलतियों का आंकड़ा मतदाता पहचान पत्र (वोटर आईडी कार्ड) के मुकाबले डेढ़ गुना ज्‍यादा है. 9.9 फीसदी लोग राजस्‍थान में और 1.1 फीसदी लोग आंध्र प्रदेश में पीडीएस का लाभ नहीं ले पाते हैं.

Priya Gautam | News18Hindi
Updated: May 18, 2018, 12:10 PM IST
'आधार' में हैं वोटर आईडी कार्ड से डेढ़ गुना ज्‍यादा कमियां
बायोमीट्रिक ऑथेंटिकेशन वाले आधार कार्ड में काफी कमियां सामने आई हैं
Priya Gautam | News18Hindi
Updated: May 18, 2018, 12:10 PM IST
वर्तमान में भारत का सबसे लोकप्रिय पहचान पत्र बन चुका आधार कार्ड किसी न किसी मुद्दे को लेकर चर्चा में रहता है. लेकिन अब इसे लेकर एक नया खुलासा हुआ है. 12 अंकों के यूनिक आईडेंटिफिकेशन नंबर अौर बायोमीट्रिक ऑथेंटिकेशन वाले आधार कार्ड में काफी कमियां सामने आई हैं. यहां तक कि  नाम, पते, पहचान और लिंग संबंधी गलतियों का आंकड़ा आधार कार्ड में मतदाता पहचान पत्र (वोटर आईडी कार्ड) के मुकाबले डेढ़ गुना ज्‍यादा पाया गया है. गौरतलब है कि गलतियों को लेकर वोटर आईडी कार्ड हमेशा से ही निशाने पर रहा है.

आधार में कमियों का खुलासा भारत में काम कर रही आईडी इनसाइट अ ग्‍लोबल डेवलपमेंट एनालिटिक्‍स फर्म ने स्‍टेट ऑफ आधार रिपोर्ट 2017-18 में किया है. रिपोर्ट बताती है कि 8.8 फीसदी आधार कार्डों में गलतियां हैं. इस फर्म ने आधार को लेकर भारत के तीन राज्‍यों राजस्‍थान, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल में घर-घर जाकर सर्वे किया था. जिसमें 21 जिलों के 2947 परिवाराें से बात की. यह सर्वे नवंबर 2017 से फरवरी 2018 तक किया गया.

सर्वे रिपोर्ट बताती है कि 9.9 फीसदी लोग राजस्‍थान में और 1.1 फीसदी लोग आंध्र प्रदेश में पीडीएस (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) का लाभ नहीं ले पाते हैं. लेकिन यह भी सामने आया है कि लाभ न ले पाने के पीछे आधार की समस्‍या राजस्‍थान में सिर्फ 2.2 फीसदी और आंध्र प्रदेश में 0.8 फीसदी ही पाई गई है.

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यहां तक कि दोनों राज्‍यों में लोग आधार कार्ड से राशन लेने के तरीके को बेहतर बता रहे हैं. उनका कहना है कि बायोमीट्रिक ऑ‍थेंटिकेशन से पहचान संबंधी फ्रॉड पर रोक लगी है.

यूआईडीएआई के सीईओ डॉ. अजय भूषण्‍ा पांडे का कहना है कि आधार को जमीन पर बड़े स्‍तर पर समर्थन मिल रहा है. आधार से राशन लेने में आ रही परेशानियां लोकल प्रशासन की असफलता है हालांकि इस मामले में गंभीरता से गौर किया जाएगा और देखा जाएगा कि कोई भी लाभार्थी वंचित न रहे.

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आधार की पहुंच बढ़ी, गोपनीयता काे लेकर लोगों में चिंता 
सर्वे रिपोर्ट कहती है कि आधार की पहुंच काफी विस्‍‍तृत है लेकिन डेटा की गुणवत्‍ता को सुधारने की जरूरत है. इसके साथ ही 96 फीसदी लोग आधार कार्ड से जुड़ी प्राइवेसी (निजता अथवा गोपनीयता) को लेकर भी चिंतिज हैं. सर्वे के दौरान लोगों ने कहा कि यह जानना जरूरी है कि सरकार उनके आधार डेटा का क्‍या करने वाली है? वहीं 87 फीसदी लोगों ने पब्लिक डिस्‍ट्रीब्‍यूशन सिस्‍टम (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) को आधार से जोड़ने के लिए रजामंदी दिखाई है.

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इन तीनों राज्‍यों में बैंक अकाउंट खोलने के लिए 67 फीसदी लोग आधार कार्ड (पेपर आईडी) का अनुरूप (एनालॉग) ही इस्‍तेमाल कर रहे हैं. जबकि सिर्फ 17 फीसदी लोग इसके डिजिटल रूप ई-केवाईसी का इस्‍तेमाल कर रहे हैं.

आईडी इन साइट के सहयोगी रोनाल्‍ड अब्राहम का कहना है कि प्राइवेसी को बचाना और आधार के बहिष्‍कार को रोकना दो गंभीर मुद्दे हैं. इस रिपोर्ट का मकसद यही है कि इसका उपयोग योजनाओं को और बेहतर बनाने में उपयोग किया जा सके.

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ये है आईडी इन साइट
आईडी इन साइट एक अंतरराष्‍ट्रीय विकास संगठन है.जोहांसबर्ग, नैरोबी, मनीला, नई दिल्‍ली, सैन फ्रांसिस्‍को और वाशिंगटन डीसी में इसके ऑफिस हैं. यह एशिया और अफ्रीका में विभिन्‍न गैर सरकारी संगठनों के साथ मिलकर काम करता है. यह संगठन डिजिटल आईडी, शिक्षा, वित्तीय पहुंच, शासन, स्वास्थ्य और स्वच्छता सहित कई क्षेत्रों में काम करता है. इसका मुख्‍य उद्धेश्‍य नीति नियंताओं के आगे आंकड़े पेश करना है ताकि योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू किया जा सके.
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