CBSE के पाठ्यक्रम से कुछ टॉपिक्स को हटाने पर मनगढ़ंत बातें हो रहीं: पोखरियाल

CBSE के पाठ्यक्रम से कुछ टॉपिक्स को हटाने पर मनगढ़ंत बातें हो रहीं: पोखरियाल
रमेश पोखरियाल ने दी प्रतिक्रिया.

बता दें कि CBSE ने 9वीं कक्षा से 12वींं कक्षा तक करीब 30 फीसदी पाठ्यक्रम (CBSE Syllabus) घटाने का ऐलान किया है. इसमें धर्मनिरपेक्षता, राष्ट्रवाद, नागरिकता, नोटबंदी और लोकतांत्रिक अधिकारों जैसे विषयों से संबंधित पाठ शामिल हैं.

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नई दिल्‍ली. केंद्रीय माध्‍यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की बोर्ड परीक्षाओं में अगले साल शामिल होने वाले विद्यार्थियों को धर्मनिरपेक्षता, राष्ट्रवाद, नागरिकता, नोटबंदी और लोकतांत्रिक अधिकारों के बारे में पढ़ने की जरूरत नहीं होगी क्योंकि इन विषयों से संबंधित पाठों तथा कई अन्य पाठों को पाठ्यक्रम से हटा दिया गया है. सिलेबस से इन विषयों से संबंधित सामग्री हटाए जाने के बाद उपजे विवाद पर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक (Ramesh pokhriyal nishank) ने गुरुवार को प्रतिक्रिया दी.

उन्‍होंने साफतौर पर कहा कि सीबीएसई के पाठ्यक्रम से कुछ टॉपिक्स को हटाए जाने पर मनगढंत बातें की जा रही हैं. उन्‍होंने कहा, 'ये मेरा विनम्र निवेदन है कि बच्‍चों तक शिक्षा पहुंचाना हमारा समर्पित कार्य है. हमें शिक्षा को राजनीति से रखना होगा और राजनीति को और शिक्षित बनाना होगा.' रमेश पोखरियाल निशंक ने इस मामले पर गुरुवार को अपने ट्विटर अकाउंट पर कई ट्वीट किए. उन्‍होंने कहा, 'सीबीएसई के सिलेबस से कुछ विषयों को हटाए जाने पर पर बहुत सारी असंसदीय टिप्पणी की गई हैं. इन टिप्पणियों के साथ समस्या यह है कि वे झूठी बातों को बताने के लिए चुनिंदा विषयों को जोड़कर सनसनी का सहारा लेते हैं.'


उन्‍होंने कहा, 'जैसा सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि स्कूलों को सलाह दी गई है कि वे एनसीईआरटी वैकल्पिक अकादमिक कैलेंडर का पालन करें. बताए गए सभी विषयों को एक ही अकादमिक कैलेंडर के तहत कवर किया गया है. कोविड 19 महामारी के कारण विषयों से पाठ हटाना परीक्षा के लिए केवल 1 बार का उपाय है.' पोखरियाल ने कहा, 'इस निर्णय का एकमात्र उद्देश्य सिलेबस को 30% कम करके छात्रों पर पड़ रहे तनाव को कम करना है. यह निर्णय विभिन्न विशेषज्ञों की सलाह और सिफारिशों के बाद लिया गया है और हमारे सिलेबस फॉर स्टूडेंट्स 2020 अभियान के माध्यम से शिक्षाविदों से प्राप्त सुझावों पर विचार किया गया.'



बता दें कि सीबीएसई ने बाद में इस मामले पर स्‍पष्‍टीकरण भी दिया था. सीबीएसई की ओर से कहा गया है कि स्‍कूली पाठ्यक्रम को युक्तिसंगत बनाने के कदम की अलग अलग ढंग से व्याख्या की जा रही है, यह कदम केवल 2020-2021 अकादमिक सत्र के लिए उठाया गया.

यह भी बताया गया कि पाठ्यक्रम से जिन विषयों को हटाया गया है, उन्हें लॉकडाउन के दौरान स्कूलों में लागू वैकल्पिक अकादमिक कैलेंडर के तहत पहले की पढ़ाया जा चुका है. सीबीएसई ने कहा है कि पाठ्यक्रम से जिन विषयों को हटाया गया है, 2021 बोर्ड परीक्षाओं में उनसे कोई प्रश्न नहीं पूछा जाएगा.

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने शैक्षणिक सत्र 2020-21 के लिए कक्षा नौवीं से 12वीं के लिए 30 प्रतिशत पाठ्यक्रम को घटाते हुए बुधवार को नया पाठ्यक्रम अधिसूचित किया. 10वीं कक्षा के पाठ्यक्रम से हटाए गए पाठ वे हैं जो लोकतंत्र एवं विविधता, लिंग, जाति एवं धर्म, लोकप्रिय संघर्ष एवं आंदोलन और लोकतंत्र के लिए चुनौतियां जैसे विषय से संबंधित थे. वहीं, 11वीं कक्षा के लिए हटाए गए हिस्सों में संघवाद, नागरिकता, राष्ट्रवाद, धर्मनिरपेक्षता और भारत में स्थानीय सरकारों के विकास से संबंधित पाठ शामिल हैं. 12वीं कक्षा के छात्रों को भारत के अपने पड़ोसियों- पाकिस्तान, म्यांमार, बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल के साथ संबंध, भारत के आर्थिक विकास की बदलती प्रकृति, भारत में सामाजिक आंदोलन और नोटबंदी सहित अन्य विषय पर पाठों को नहीं पढ़ना होगा.
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