केरल में 290 दिन बाद खुले विश्वविद्यालय, बिहार में 9 महीने बाद खुले सभी शिक्षण संस्थान

(सांकेतिक तस्वीर)

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कोरोना वायरस के अन्य दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करना होगा. परिसर में सबके लिए मास्क अनिवार्य होगा.

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  • Last Updated: January 4, 2021, 10:24 PM IST
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नई दिल्ली. कोविड-19 महामारी को फैलने से रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन तथा अन्य पाबंदियों के चलते 290 दिन से अधिक समय से बंद कॉलेज और विश्वविद्यालय केरल में सोमवार को आंशिक रूप से खुल गए.

कोविड प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन 

मार्च से बंद पड़े स्कूल भी एक जनवरी से आंशिक रूप से खोले जा चुके हैं तथा दसवीं एवं बारहवीं के छात्रों के लिए कक्षाएं लगाई जा रही हैं. कोविड प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करते हुए 1,350 से अधिक उच्च शिक्षण संस्थानों में सीमित संख्या में छात्र आए. जो संस्थान खोले गए हैं उनमें कला एवं विज्ञान कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, राज्य के विश्वविद्यालय तथा राज्य के कासरगोड़ में स्थित एकमात्र केंद्रीय विश्वविद्यालय शामिल है.

मास्क पहनना अनिवार्य, सामाजिक दूरी के नियम का पालन 
स्नातक और स्नातकोत्तर के अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए कक्षाएं पुन: आरंभ हो चुकी हैं. हर संस्थान में थर्मल स्क्रीनिंग हो रही है, मास्क पहनना अनिवार्य है. सामाजिक दूरी के नियम का पालन किया जा रहा है तथा परिसरों को लगातार सैनिटाइज भी किया जा रहा है. सरकार के निर्देशों के मुताबिक हर कक्षा में मात्र 50 फीसदी छात्रों को बैठने दिया गया तथा छात्रों की संख्या के आधार पर कई संस्थानों में शिफ्ट व्यवस्था शुरू की गई है.

बिहार में नौ महीने बाद फिर से खुले सभी शिक्षण संस्थान

बिहार में स्कूल, कॉलेज और कोचिंग सेंटर सहित सभी शिक्षण संस्थान करीब नौ महीने के बाद सोमवार को फिर से खुल गए. कॉलेजों में अंतिम वर्ष के छात्रों तथा स्कूलों में 9वीं से 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए कक्षाएं शुरू की गयी हैं. कोरोना वायरस के कारण राज्य के शिक्षण संस्थान 14 मार्च से बंद थे.



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शिक्षण संस्थानों में मास्क, सैनिटाइजर का उपयोग

शिक्षण संस्थानों में मास्क, सैनिटाइजर का उपयोग और सामाजिक दूरी को अनिवार्य बनाया गया है. इसके साथ ही कक्षाओं में सामाजिक दूरी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है. संस्थानों में छात्रों की उपस्थिति हालांकि कम ही रही क्योंकि कई अभिभावक अपने बच्चों को टीका लगाए जाने से पहले भेजने को लेकर आशंकित हैं. वहीं, दूसरी ओर कई छात्र अपने शिक्षण संस्थानों के फिर से खुलने से काफी उत्साहित थे.

ज्यादातर बच्चों के पास ऑनलाइन पढ़ाई करने के लिए लैपटॉप नहीं

पटना के मिलर हाई स्कूल के एक छात्र ने कहा, ‘‘मुझे खुशी है कि स्कूल फिर से खुल गए हैं क्योंकि विद्यार्थी काफी प्रभावित हो रहे थे. सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले ज्यादातर बच्चों के पास ऑनलाइन पढ़ाई करने के लिए लैपटॉप नहीं हैं. हमारा पाठ्यक्रम पिछड़ रहा है और हम इसे पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करेंगे."

एक अन्य छात्र ने कहा कि हालांकि कोविड-19 का खतरा बरकरार है, लेकिन पढ़ाई भी महत्वपूर्ण है और इसे छोड़ा नहीं जा सकता है. छात्र ने आश्वासन दिया कि सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन किया जाएगा.

कक्षा 11वीं और 12 वीं में छात्रों की उपस्थिति कम

शिक्षक भी कक्षाएं फिर से लेने को लेकर खुश लग रहे थे. मिलर हाई स्कूल के एक शिक्षक ने कहा, "यह अच्छा है कि हमें कक्षाओं में छात्रों को पढ़ाने का अवसर मिल रहा है. इन महीनों में हम स्कूलों में आते थे, लेकिन शिक्षण कार्य नहीं करते थे." उन्होंने कहा कि कक्षा 11वीं और 12 वीं में छात्रों की उपस्थिति 9वीं और 10वीं के विद्यार्थियों की तुलना में कम है.

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छात्रों को अभिभावकों से सहमति पत्र लाना होगा

एक अन्य शिक्षक ने कहा कि छात्रों को अपने अभिभावकों से सहमति पत्र लाना होगा. शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने पहले कहा था कि कक्षाएं कुल छात्रों के आधे हिस्से के साथ संचालित होंगी और कोरोना वायरस के अन्य दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करना होगा. परिसर में सबके लिए मास्क अनिवार्य होगा. उन्होंने कहा कि स्कूली बच्चों के बीच दो-दो मास्क वितरित किए जाएंगे. (भाषा के इनपुट के साथ)

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