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UP Board Exam 2021: बोर्ड परीक्षा पर भी दिख सकता है आरक्षण में देरी का असर, बदल सकती हैं तारीखें

यूपी पंचायत चुनावों में देरी का असर बोर्ड परीक्षाओं की तारीखों पर भी दिख सकता है

यूपी पंचायत चुनावों में देरी का असर बोर्ड परीक्षाओं की तारीखों पर भी दिख सकता है

UP Board Exam and Panchayat Chunav: 24 अप्रैल से यूपी बोर्ड की परीक्षाएं (UP Board Exams) भी शुरू होनी हैं. ऐसे में अगर चुनावों में देरी हुई तो बोर्ड परीक्षाओं की तारीख में बदलाव भी हो सकता है.

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    लखनऊ. उत्तर प्रदेश के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव (UP Panchayat Chunav 2021) में आरक्षण को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) की लखनऊ बेंच (Lucknow Bench) के आदेश के बाद माना जा रहा है कि चुनावों में देरी संभव है. कोर्ट ने 2015 को आधार वर्ष मानकर आरक्षण की व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं. साथ ही 25 मई तक चुनाव करवाने के निर्देश दिए हैं. इस बीच 24 अप्रैल से यूपी बोर्ड की परीक्षाएं (UP Board Exams) भी शुरू होनी हैं. ऐसे में अगर चुनावों में देरी हुई तो बोर्ड परीक्षाओं की तारीख में बदलाव भी हो सकता है.

    इस संबंध में जब डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि अभी हमारी बोर्ड परीक्षा की तारीखें 24 अप्रैल से 12 मई ही हैं. पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट के आदेश का अध्ययन हो रहा है. पंचायत चुनाव की तारीखें तय होने के बाद ही बोर्ड परीक्षा की तारीखों पर बात होगी. दरअसल, पंचायत चुनाव में भी पोलिंग बूथ स्कूलों में बनाए जाते हैं. साथ ही शिक्षकों की ड्यूटी भी लगती है. ऐसे में पंचायत चुनाव और बोर्ड परीक्षाएं एक साथ संभव नहीं होंगी. यही कारण है कि पंचायत चुनाव की तारीखें बदलने पर बोर्ड परीक्षा की तारीखें भी बदल सकती हैं.

    यह है पूरा मामला
    गौरतलब है कि सोमवार को न्यायमूर्ति रितुराज अवस्थी और न्यायमूर्ति मनीष माथुर की खंडपीठ ने अजय कुमार की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर 11 फरवरी 2021 के उस शासनादेश को रद्द कर दिया जिसमें आरक्षण की व्यवस्था 1995 को आधार वर्ष मानकर की थी. साथ ही आरक्षण लागू करने के रोटेशन के लिए वर्ष 1995 को आधार वर्ष मानने को मनमाना व अविधिक करार दिये जाने की बात कही गई थी. न्यायालय ने 12 मार्च को अंतरिम आदेश में आरक्षण व्यवस्था लागू करने को अंतिम रूप देने पर रोक लगा दी थी. सोमवार को महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए माना कि सरकार ने वर्ष 1995 को मूल वर्ष मानकर गलती की. उन्होंने कहा कि सरकार को वर्ष 2015 को मूल वर्ष मानते हुए सीटों पर आरक्षण लागू करने को लेकर कोई आपत्ति नहीं है.

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