अंतत: आई.ए.एस. की परीक्षा तो होगी ही, तैयारी में कमी न करें स्‍टूडेंट्स

लगातार करते रहें आईएएस परीक्षा की तैयारी.

लगातार करते रहें आईएएस परीक्षा की तैयारी.

आपको कम से कम इस सच्‍चाई पर भी संदेह नहीं करना चाहिए कि अंतत: परीक्षाएं तो होगी हीं – प्रारम्भिक परीक्षा भी ,मुख्‍य परीक्षा भी और इन्‍टरव्‍यू भी. परीक्षाएं होंगी, इन्‍हीं में से कुछ लोगों का चयन होगा और वे चयनित युवा सिविल सर्वेन्‍ट बनेंगे.

  • Share this:
नई दिल्ली. कोरोना के वर्तमान खौफनाक माहौल से यदि आई ए एस की तैयारी करने वाले स्‍टूडेंट स्‍वयं को असहाय और निरूत्‍साहित महसूस कर रहे होंगे, तो इसमें आश्‍चर्य की बात नहीं है. वर्तमान परिस्थितियाँ उन्‍हें अपने तैयारी के प्रति ही आशंकित नहीं कर रही हैं, बल्कि इससे भी खतरनाक बात यह है कि वे अपनी सफलता और सफलता के बाद के जीवन के प्रति भी निराश होते जान पड़ रहे हैं. जब कई-कई स्‍टूडेन्‍टस यह कहने लगें कि ‘बन भी जाएंगे, तो क्‍या होगा, क्‍योंकि इस जिन्‍दगी का भला क्‍या ठिकाना है’, तो इसे युवा मानसिकता के प्रतिनिधि के तौर पर एक चिन्‍तन करने वाला वक्‍तव्‍य माना जाना चाहिए. लेकिन यहाँ सवाल यह है कि क्‍या उनकी यह बात सच है?

पहली बात तो यह है कि इस तरह के विचार ही अपने-आपमें किसी प्रतियोगी के आय ए एस बन पाने के मस्तिष्‍क के अनुकूल नहीं हैं. निश्चित तौर पर वातावरण बहुत अनुकूल नही है. कोचिंग संस्‍थान अपनी मौजूदगी में तैयारी करने वालों के अन्‍दर लगातार जोश एवं उत्‍साह का निर्माण करते रहते थे. फिलहाल वे पूरी तरह से गायब हैं. स्‍टूडेंटस पढ़ने जाते थे. वहाँ तैयारी करने वाले अपने ही नौजवान साथियों से मिलते थे. उनकी तैयारी का जायजा लेते थे और अपनी तैयारी के बारे में बताते थे. टॉपिक्‍स पर डिस्‍कशन करते थे. ये सारी बातें परीक्षा की तैयारी करने की उनकी गर्मी को लगातार बनाये रखती थीं.

फिलहाल यह सिरे से ही नदारद है. स्‍टूडेंटस अपने-आपको अपने ही आजाद घर के कमरे में कैद पा रहे हैं. ऐसा होते-होते एक साल का वक्‍त बीत चुका है. इन सबके कारण ऊब और खीझ की मानसिकता का विकास होना एक सहज मनोवैज्ञानिक स्थिति है.

तैयारी के वक्‍त स्‍टेडेंटस के मन में कई तरह के सवाल तो उठते हैं, लेकिन उन सवालों के जवाब उन्‍हें नहीं मिल पाते. प्रत्‍यक्ष मार्गदर्शन शून्‍य हो गया है. हालांकि विकल्‍प के तौर पर तैयारी के लिए ऑनलाइन क्‍लासेस उपलब्‍ध हैं. लेकिन उससे लाभ लेने की जो मानसिकता विकसित होनी चाहिए, अधिकांश के अन्‍दर वह विकसित हो नहीं पायी है. ऐसे युवाओं की संख्‍या कम नहीं है जिन्‍होंने कोचिंग क्‍लासेस की लाखों रूपये की फीस दे रखी है और अब वे उनके खुलने का इंतजार कर रहे हैं. ऐसे लोगों के लिए फिर से ऑनलाइन क्‍लासेस की फीस दे पाना सरल नहीं है. और वह भी एक ऐसे माहौल में, जबकि लोगों के आय के साधन सिकुड़ गये हैं और अधिकांश के तो खत्‍म ही हो गये हैं.
लेकिन जहाँ तक आय ए एस बनने का सवाल है, मुझे लगता है कि युवाओं को इन सभी विपरीत और कठिन परिस्थितियों को एक प्रकार से अपने मनोवैज्ञानिक परीक्षण के रूप में लेना चाहिए. इस कोरोना के समय में सारी व्‍यवस्‍थाएं करने वाले ये वे ही प्रशासक हैं, जिन्‍होंने किसी समय आपकी तरह ही तैयारियाँ की थीं. यदि आप इन प्रशासकों और इनके परिवार के लोगों की मानसिकता में प्रवेश कर सकें, तो पायेंगे कि उनकी मानसिक स्थिति आपसे कोई बहुत अलग नहीं है. फर्क इतना ही है कि आप फिलहाल खुद को परीक्षा की तैयारी करने से अलग कर सकते हैं, लेकिन वे अपने दायित्‍वों से विमुख नहीं हो सकते. एक सकारात्‍मक सोच के अन्‍तर्गत आप वर्तमान समय को इस रूप में ले सकते हैं. आगे चलकर अंतत: आपको भी ऐसी ही स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है. उस तरह की परिस्थिति से आप अभी ही जूझ रहे हैं.

किसी भी प्रतियोगिता में सबसे बड़ी बात यह होती है कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी बुरी क्‍यों न हों, लेकिन यदि वे सबके लिए समान हैं, तो प्रतियोगिता पर उसका प्रभाव शून्‍य हो जाता है. हाँ, यदि कुछ ही इसके गिरफ्त में है; जिसमें आप स्‍वयं को पा रहे हों, तो यह निश्चित तौर पर नुकसानदेह होगा. लेकिन ऐसा होता नहीं है.

आपको कम से कम इस सच्‍चाई पर भी संदेह नहीं करना चाहिए कि अंतत: परीक्षाएं तो होगी हीं – प्रारम्भिक परीक्षा भी ,मुख्‍य परीक्षा भी और इन्‍टरव्‍यू भी. परीक्षाएं होंगी, इन्‍हीं में से कुछ लोगों का चयन होगा और वे चयनित युवा सिविल सर्वेन्‍ट बनेंगे. आखिर जो बनेंगे, वे लोग कौन होंगे? ये भी वे ही लोग होंगे, जो इस तरह की परिस्थितियों और मानसिकता से गुजरे हैं. यदि वे बन सकते हैं, तो फिर आप क्‍यों नहीं? इसलिए आपको अपनी पूरी मानसिक दृढ़ता का परिचय देते हुए अपने इस एक साल को बर्बाद होने से बचाने के लिए अपने स्‍तर पर कोई कसर नहीं उठा रखनी चाहिए. अपने दिमाग में केवल एक ही वाक्‍य को रचा-बसा लें कि ‘’अंतत: परीक्षा तो होनी है.’’हो सकता है कि यह छोटा-सा वाक्‍य आपको निराशा के गर्त में बार-बार गिरने से बचाने के लिए एक सहारे का काम कर जाये. (लेखक डॉ. विजय अग्रवाल पूर्व सिविल सर्वेंट और afeias.com के संस्थापक हैं.)



ये भी पढ़ें-

UPPSC Exams 2021 Postpone: कोरोना के चलते आयोग ने टाली दो बड़ी भर्ती परीक्षाएं

Sarkari Naukri 2021: इन विभागों में नौकरियों के लिए आवेदन की अंतिम तिथि आज, जानें डिटेल

सभी राज्यों की बोर्ड परीक्षाओं/ प्रतियोगी परीक्षाओं, उनकी तैयारी और जॉब्स/करियर से जुड़े Job Alert, हर खबर के लिए फॉलो करें- https://hindi.news18.com/news/career/

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज