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फर्स्ट क्लास करियर और IAS बनने के बीच क्या है कनेक्शन, पढे़ं सिविल सर्वेंट का जवाब

अच्छे ग्रेड के आधार पर छात्रों के पास प्रवेश लेते समय महाविद्यालयों के चुनाव के कई विकल्प होंगे.

अच्छे ग्रेड के आधार पर छात्रों के पास प्रवेश लेते समय महाविद्यालयों के चुनाव के कई विकल्प होंगे.

यदि आप फर्स्ट डिविजनर हैं, टॉपर हैं, डॉक्टरेट हैं, तो भी इस मुगालते में बिल्कुल न रहें कि इसके कारण आपको कुछ फायदा मिल जाएगा.

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नई दिल्ली. मुझसे यह प्रश्न लगभग हर वह विद्यार्थी पूछता है, जो सेकंड और थर्ड डिविज़नर रहा है, और अब आईएएस की तैयारी करने जा रहा है. उन्हें लगता है कि चूँकि इन्टरव्यू के समय उम्मीदवार का पूरा बायोडाटा बोर्ड के सदस्यों के सामने होता है, इसलिए सेकेंड डिविजन-थर्ड डिविजन का उनके ऊपर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और उन्हें कम नम्बर देकर सूची के बाहर कर दिया जाएगा. यदि आपको मेरी बात पर विश्वास नहीं है, तो कोई बात नहीं.

डिविजन के महत्व का कुछ अनुमान
यूपीएससी द्वारा प्रतिवर्ष जारी किये जाने वाले आँकड़ों पर तो विश्वास किया ही जाना चाहिए. यूपीएससी ने फिलहाल वर्ष 2017 में हुई सिविल सेवा परीक्षा के आंकड़े जारी किये हैं. हालांकि इन आँकड़ों का संबंध परीक्षा में प्राप्त श्रेणी से न होकर स्नातक एवं स्नातकोत्तर शिक्षा से है, फिर भी अप्रत्यक्ष रूप से हम इसके आधार पर डिविजन के महत्व का कुछ अनुमान तो लगा ही सकते हैं.

जारी आँकड़ों के अनुसार अंतिम रूप से सफल उम्मीद्वारों में 77.7 प्रतिशत युवा स्नातक थे. शेष 22.3 प्रतिशत सफल युवा वे थे, जिन्होंने पोस्ट ग्रेजुऐशन की हुई थी. इसे समझने की कोशिश कीजिए.

फर्स्ट डिविजन की इतनी बड़ी अहमियत नहीं
यदि यूपीएससी के लिए फर्स्ट डिविजन की इतनी बड़ी अहमियत होती, तो वह इसके लिए निर्धारित योग्यता में ही इस तथ्य को डाल देता, जैसा कि कुछ नौकरियों के लिए, खासकर कॉलेज के प्रोफेसर्स के लिए होता है. यदि उसने ऐसा नहीं किया है, तो यह बहुत सोच-समझकर लिया गया निर्णय है. वह जानता है कि उसका काम फिलहाल ऐसे युवाओं को सिलेक्ट करना है, जो प्रशासक बनने के लायक हों. बस इतना ही. वह यह जानता है की प्रशासक बनने के लिए परीक्षा में फर्स्ट डिविजन का रिकॉर्ड होना कतई जरूरी नहीं है. अकबर भारतीय इतिहास के सर्वोच्च प्रशासकों में गिना जाता है, जबकि उसे अक्षर-ज्ञान तक नहीं था.

प्रारम्भिक और मुख्य परीक्षा को क्वालीफाई करना है बड़ी बात
जब आप इन्टरव्यू में बोर्ड मेम्बर्स के सामने बैठे हुए होते हैं, तो वे सारे मेम्बर इस बात को अच्छी तरह जानते हैं कि आप प्रारम्भिक और मुख्य परीक्षा को क्वालीफाई करके ही यहाँ तक पहुँचे हैं. यहाँ तक आने की कोई डायरेक्ट एन्ट्री नहीं है. आपने स्वयं को प्रूव किया है. इसलिए आपका अतीत क्या रहा है, यह उन लोगों के लिए कोई मायने नहीं रखता. उनके लिए तो जो कुछ भी है, वह आपका वर्तमान है.

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अतीत को पूरी तरह भूलकर वर्तमान पर केन्द्रित हो
ठीक इसी प्रकार यदि आप फर्स्ट डिविजनर हैं, टॉपर हैं, डॉक्टरेट हैं, तो भी इस मुगालते में बिल्कुल न रहें कि इसके कारण आपको कुछ फायदा मिल जाएगा. नॉट एट ऑल. वहाँ का आपका प्रदर्शन ही सब कुछ होगा. इसलिए अपने अतीत को पूरी तरह भूलकर वर्तमान पर केन्द्रित होकर अपना काम करें. यूपीएससी इस मामले में बहुत उदार है.

(लेखक डॉ॰ विजय अग्रवाल, पूर्व सिविल सर्वेंट और afeias के संस्थापक हैं.)

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