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UPSC IAS Exams Tips: आई.ए.एस. की परीक्षा की तैयारी में काम की है अनुभवों की ताकत

अधिकांश विद्यार्थी ऐसे होते हैं, जो परीक्षाओं में बैठ चाहे कितनी भी बार क्यों न रहे हों, लेकिन वे पिछले अनुभवों से कोई खास लाभ उठा नहीं पाते.

अधिकांश विद्यार्थी ऐसे होते हैं, जो परीक्षाओं में बैठ चाहे कितनी भी बार क्यों न रहे हों, लेकिन वे पिछले अनुभवों से कोई खास लाभ उठा नहीं पाते.

अधिकांश विद्यार्थी ऐसे होते हैं, जो परीक्षाओं में बैठ चाहे कितनी भी बार क्यों न रहे हों, लेकिन वे पिछले अनुभवों से कोई खास लाभ उठा नहीं पाते.

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नई दिल्ली. मुझे यह बहुत बड़ा चैलेंज लगता है. सच पूछिए तो जब मैं तैयारी कर रहा था, तब मुझे अपने लिए दो बातें सबसे कठिन मालूम पड़ती थीं. पहली यह कि आठवीं के बाद से ही प्रायवेट विद्यार्थी होने के कारण मेरे मन में हमेशा यह कुंठा बनी रहती थी कि कॉलेज में नियमित रूप से पढ़ने वाले स्टूडेन्टस् मेरी तुलना में बहुत अच्छे होते होंगे. दूसरा यह भय मन में समाया रहता था कि जो लोग कई सालों से तैयारी कर रहे हैं और कई-कई बार परीक्षाओं में बैठ चुके हैं, उनका मुकाबला मैं कैसे कर पाऊँगा, क्योंकि अनुभवों का अपना महत्व तो होता ही है.

जनरल केटेगरी के लिए केवल तीन अटेम्प्ट
हम लोगों के समय में जनरल केटेगरी के लिए केवल तीन अटेम्प्ट होते थे. मेरा सिलेक्शन सैकण्ड अटेम्प्ट में हुआ था. अब पहले की तुलना में यह चुनौती थोड़ी बढ़ गई है. हालाँकि आँकड़े यही बताते हैं कि सबसे ज्यादा सिलेक्शन सैकण्ड और थर्ड अटेम्प्ट में ही होते हैं, फिर भी किसी भी अटेम्प्ट को कमतर करके नहीं देखा जाना चाहिए. विशेषकर जब कोई विद्यार्थी पहली बार परीक्षा में बैठता है, तो उसका मुकाबला चौथी बार बैठने वाले उस परीक्षार्थी से भी हो रहा होता है, जिसके पास न केवल इस परीक्षा में तीन बार बैठने का अनुभव होता है, बल्कि स्पष्ट है कि वह लम्बे समय से इसकी तैयारी भी कर रहा है. आप क्या समझते हैं कि इनको पीछे छोड़कर आगे निकल पाना कोई आसान बात होगी ?

ज्यादातार लोग अनुभवों से लाभ उठा नहीं पाते
मैं यहाँ आपको डरा नहीं रहा हूँ, केवल सतर्क भर कर रहा हूँ. साथ ही इस सच्चाई को भी बता रहा हूँ कि इनमें से अधिकांश विद्यार्थी ऐसे होते हैं, जो परीक्षाओं में बैठ चाहे कितनी भी बार क्यों न रहे हों, लेकिन वे पिछले अनुभवों से कोई खास लाभ उठा नहीं पाते. इसलिए न तो आपको इनसे घबराकर किसी तरह के दबाव में आना है और न ही इसे बहुत हल्के-फुल्के तरीके से लेना है. अन्ततः वह समय भी आएगा, जब आप भी दूसरी बार, तीसरी बार या चौथी बार परीक्षा दे रहे होंगे. हालाँकि मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि आपके साथ ऐसा मौका न आए.

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दूसरी प्रतियोगी परीक्षाएँ भी देते रहें
अनुभव की प्रौढ़ता का एक अन्य पक्ष भी है, जो अलग-अलग तरह की प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ा हुआ है. आई.ए.एस. की तैयारी के दौरान आपको चाहिए कि आप दूसरी प्रतियोगी परीक्षाएँ भी देते रहें. इस तरह आप निरन्तर अपने-आपको अधिक मैच्योर करते जाएँगे. ध्यान रखिए कि जब आपसे वह विद्यार्थी मुकाबला करेगा, जिसके पास सिर्फ इसी परीक्षा का अनुभव है, तो वह निश्चित रूप से अपने-आपको कमजोर पाएगा. यह बात मैं आपको केवल इसलिए बता रहा हूँ, ताकि आप अपना मूल प्रतियोगी उस नए विद्यार्थी को न समझें, जो आपके साथ ही तैयारी कर रहा है, बल्कि उसको समझें, जो पता नहीं कब से तैयारी कर रहा है. (लेखक पूर्व सिविल सर्वेंट और afeias के संस्थापक हैं.)

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