UPSC Preparation: पूर्व सिविल सर्वेन्‍ट से समझिए आई.ए.एस. के बहुआयामी व्‍यक्तित्‍व को

यदि आप सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो यह मानकर चलिये कि आप ‘लौह-स्‍तम्‍भ’बनने जा रहे हैं.

यदि आप सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो यह मानकर चलिये कि आप ‘लौह-स्‍तम्‍भ’बनने जा रहे हैं.

परीक्षा में सफल हो जाने के बाद निश्चित तौर पर मसूरी अकादमी में आपको इसके लिए प्रशिक्षित किया जायेगा. वहाँ कक्षाएं लगने के साथ-साथ अन्‍य कई तरह की गतिविधियां कराई जाती हैं, ताकि आपका व्‍यक्तित्‍व अधिक मुखर एवं बहुआयामी बन सके.

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नई दिल्ली. थोड़ी देर के लिये मान लीजिये कि तीन साल पहले आपका सिविल सर्विस के लिये चयन हो गया था. इसके बाद आपकी ट्रेनिंग हुई और ट्रेनिंग के पश्‍चात अब आपकी कहीं पोस्टिंग हो गई है. यह पोस्टिंग जिले में किसी भी रूप में है. तो फिलहाल आप क्‍या कर रहे होते? मेरी समझ से इसके बारे में कल्‍पना करने के लिये आपको थोड़ा वक्‍त देना ही चाहिये.

फिलहाल लोग बुरी तरह से कोरोना संक्रमण से जूझ रहे हैं. आतंकित हैं, भयभीत हैं. चारों तरफ अफरा-तफरी मची हुई है. ऐसी परिस्थिति में आपको कोई एक जिम्‍मेदारी सौंप दी गई है. जब भी आप अपने घर से निकलकर बाहर जाते हैं, आपके परिवार के सदस्‍य आपके स्‍वास्‍थ्‍य के लिए चिन्तित हो उठते हैं. आप भी लगातार आतंकित रहते हैं कि कहीं कुछ हो न जाये. फील्‍ड में आप लोगों के आक्रोश का सामना करते हैं और उनकी गंभीर स्थिति को देखकर करूणा से भर भी उठते हैं.

आप जो कुछ भी कर सकते हैं, करने के लिये अपनी टीम के साथ जुटे हुए हैं. लेकिन स्थिति नियंत्रण में आ नहीं रही है. मुश्किल तो यह है कि ऐसा पता नहीं कितने दिन तक चलेगा. लेकिन आप छुट्टी नहीं ले सकते. परिवार वालों की जिद को मानकर अपने दायित्‍वों से मुंह भी नहीं मोड़ सकते. आपको जो सार्वजनिक दायित्‍व सौंपे गये हैं, वे सभी आपको करने हैं और पूरी मुस्‍तैदी तथा दायित्‍वपूर्ण तरीके से करने हैं.

अधिकारी एक मजबूत लौह-स्‍तम्‍भ की तरह 
पढ़ने में ये बातें भले ही आसान-सी लग रही हों, लेकिन जब इन्‍हें व्‍यवहार में लाने की नौबत आती है, तो बड़ों-बड़ों के हौसले जवाब देने लगते हैं. लेकिन समाज और सरकार यह आशा करती है कि इस भयावह तूफान के बीच भी उसके अधिकारी एक मजबूत लौह-स्‍तम्‍भ की तरह खड़े रहेंगे. यदि आप सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो यह मानकर चलिये कि आप ‘लौह-स्‍तम्‍भ’बनने जा रहे हैं.

लेकिन आप बनेंगे कैसे? नि:संदेह रूप से इसका सबसे ज्ञात रास्‍ता है- सिविल सेवा परीक्षा में सफल होना. लेकिन दूसरा अज्ञात किन्‍तु उतना ही महत्‍वपूर्ण रास्‍ता है- अपने विवेक और अपनी भावनाओं को उस स्थिति में पहुंचा देना, जहाँ इन दोनों पर पूरी तरह से आपका अपना नियंत्रण हो. आप दूसरे की भावनाओं को बहुत अच्‍छी तरह समझ लेते हैं. साथ ही अपनी भावनाओं की भी आपको बहुत अच्‍छी समझ है. फिर इन दोनों की भावनाओं का प्रबंधन आप इस प्रकार से करते हैं, ताकि अधिक से अधिक सार्वजनिक हित सध सके.

परीक्षा में सफल हो जाने के बाद निश्चित तौर पर मसूरी अकादमी में आपको इसके लिए प्रशिक्षित किया जायेगा. वहाँ कक्षाएं लगने के साथ-साथ अन्‍य कई तरह की गतिविधियां कराई जाती हैं, ताकि आपका व्‍यक्तित्‍व अधिक मुखर एवं बहुआयामी बन सके.



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लेकिन यहाँ अपने अनुभव से मैं आपसे जो अनुरोध करना चाह रहा हूं, वह यह है कि जीवन में जब भी इस तरह की ‘भावनात्‍मक बुद्धिमत्ता’के अवसर आयें, आपको उनसे बचने की बजाए उनका सामना करने के लिए आगे आना चाहिए. ऐसा करने से न केवल आपके अनुभव और आत्‍मविश्‍वास ही बढ़ेगा, बल्कि व्‍यक्तित्‍व भी बहुआयामी रूप ग्रहण कर सकेगा.

सिविल सेवा में चयन हो जाना एक बात है. लेकिन चयन के बाद बहुत अच्‍छा प्रदर्शन करके कुछ विशेष करने का आत्‍मसंतोष प्राप्‍त करना अलग बात होती है. और उसे इस तरह के अवसरों का उपयोग करके प्राप्‍त किया जा सकता है. (लेखक डॉ. विजय अग्रवाल पूर्व सिविल सर्वेन्‍ट एवं afeias के संस्‍थापक हैं.)

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