कॉलेजों में उड़ रहीं कोविड नियमों की धज्जियां, छात्र नहीं लगा रहे मास्क, मैनेजमेंट निष्क्रिय

कॉलजों में छात्र न ही मास्क लगा रहे हैं और न ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं.

कॉलेज कैंपस में छात्र आपको बिना रोक-टोक के घूमते नज़र आ जाएंगे. डीएवी, डीबीएस, एमकेपी वो कॉलेज हैं जहां कोविड नियमों का कोई पालन नहीं हो रहा है.

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    देहरादून. उत्तराखण्ड में फुल टाइम कॉलेज अब खुलने को ही हैं लेकिन उससे पहले जब सिर्फ प्रैक्टिकल और लास्ट ईयर के स्टूडेंट्स की क्लासेज को ही ऑफलाइन मोड में करवाने का फैसला लिया गया है तो ऐसे में ही कोविड नियमों की धज्जियां उड़ती हुई दिख रही हैं. अगर आपको इसकी सच्चाई जाननी है तो देहरादून के किसी भी सरकारी कॉलेज, यूनिवर्सिटी का चक्कर लगा आइए, आपको सारी हकीकत खुद ही दिख जाएगी.

    बिना मास्क, बिना सोशल डिस्टेंसिंग, कोई कोविड संक्रमण का डर नहीं. कॉलेज कैंपस में छात्र आपको बिना रोक-टोक के घूमते नज़र आ जाएंगे. डीएवी, डीबीएस, एमकेपी वो कॉलेज हैं जहां कोविड नियमों का कोई पालन नहीं हो रहा है. यही वजह है कि कॉलेजों को पूरी तरह से खोलने के फैसले पर सरकार को कई बार विचार करना पड़ रहा है. जब क्लास लेने आए छात्रों से मास्क न लगाने का कारण पूछा गया तो उनका जवाब था कि कोविड के साथ जीने की आदत डाल ली है, जो कि हास्यास्पद है.

    यही नहीं, इस पर कॉलेज मैनेजमेंट की दलील भी हास्यस्पद है. कहने को तो घूम-घूम कर कॉलेज में स्टूडेंट्स को मास्क बांटने से लेकर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करवाने का काम किया जा रहा है लेकिन जमीनी स्तर पर कॉलेज कैंपस की तस्वीर एकदम जुदा है. प्रोफ़ेसर डी के त्यागी, व्यवस्था अधिकारी का कहना है कि नियमों का पालन करवाया जा रहा है.

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    अब आप खुद सोचिए ये तस्वीर तब है जब ऑफलाइन मोड में कुछ ही स्टूडेंट्स को बुलाया जा रहा है , जब फुल टाइम कॉलेज खुलेंगे तो कैसे इन स्टूडेंट्स को मैनेज करना और एसओपी का पालन करवाना कितना मुश्किल होगा. कुल मिलाकर, कोई भी कोविड को सिरियसली अब नही ले रहा है, जो कि अच्छे संकेत नही हैं.