Anbirkiniyal Review: लम्बी ही सही, लेकिन साफ-सुथरी फिल्म है 'अंबेरकिनियाल'

फिल्म का तमिल वर्जन अमेजॉन प्राइम पर रिलीज किया गया है.

फिल्म का तमिल वर्जन अमेजॉन प्राइम पर रिलीज किया गया है.

Review: फिल्म 'अंबेरकिनियाल (Anbirkiniyal)' परिवार के साथ देखी जा सकती है. फिल्म तमिल में है और सब-टाइटल अंग्रेजी में हैं. ओटीटी प्लेटफॉर्म पर वीभत्सता की जगह, अच्छा कॉन्टेंट देखना चाहते हैं तो फिल्म जरूर देखिये.

  • Share this:
Anbirkiniyal Review: ओटीटी प्लेटफॉर्म पर हिंसा, गाली गलौच, अश्लीलता और विवादित विषयों से भरी फिल्में देख कर अगर आप तंग आ चुके हैं तो साफ, सभ्य, और एक सुन्दर सी कहानी के लिए देखिये तमिल फिल्म 'अंबेरकिनियाल (Anbirkiniyal).

मोटिवेशनल स्पीकर्स अक्सर इस कहानी का जिक्र करते हैं कि कैसे एक कर्मचारी, भूलवश कंपनी के डीप फ्रीजर में बंद हो जाता है और उसके सभी सहकर्मी अपने अपने घर चले जाते हैं. कंपनी के चौकीदार को याद रह जाता है कि वो कर्मचारी तो छुट्टी होने पर भी बाहर नहीं निकला है क्योंकि वो रोज आते और जाते समय उसे नमस्ते कर के जाता है. उस एक नमस्ते की रिश्ते की अहमियत पर लिखी गयी ये छोटी सी कहानी का फिल्मी रूपांतरण किया गया है इस फिल्म में. 2019 में ये फिल्म पहले मलयालम में बनी थी 'हेलन' नाम से और अब इसका तमिल वर्जन अमेजॉन प्राइम पर रिलीज किया गया है.

कहानी में लड़की के रूढ़िवादी विधुर और आर्थिक रूप से संघर्षरत पिता और लड़की के विजातीय बॉयफ्रेंड के बीच में संघर्ष, पुलिस की लापरवाही और कनाडा में एक बेहतर भविष्य का सपना लिए परीक्षा की तैयारी जैसे सब-प्लॉट की मदद से कहानी को और रोचक बनाने की कोशिश की गयी है. फिल्म की रफ्तार थोड़ी धीमी लगती है और कुछ दृश्य अनावश्यक भी हैं. हालांकि इस रफ्तार को रियल-टाइम देखने की कोशिश करते हैं तो कहानी काफी सुलझी हुई सी लगती है.



फिल्म पूरी तरह से हीरोइन अम्बरकिनियल अर्थात कीर्ति पांडियन पर केंद्रित है. कीर्ति इसके पहले तमिल एडवेंचर फिल्म "थुम्बा" में काम कर चुकी हैं. ये उनकी दूसरी फिल्म है. पहली फिल्म में भी उनके काम की तारीफ हुई थी और इस फिल्म में भी जीवट भरा किरदार निभाने के लिए उनके काम की प्रशंसा होगी ही. डीप फ्रीजर में बंद होने के बाद कीर्ति का अभिनय देखने लायक रहा है. सर्वाइवल इंस्टिंक्ट के छोटे छोटे दृश्य, बहुत ही दमदार नज़र आये हैं. दर्शकों की सहानुभूति जगाने में सफल भी हुए हैं. पहले हिस्से में फिल्म, रफ्तार की वजह से मार खा जाती है. कीर्ति को इस्टैब्लिश करने के चक्कर में कई सीन्स डाले गए हैं जो हटाए जा सकते थे.
कीर्ति के पिता की भूमिका में हैं अरुण पांडियन जो उनके वास्तविक जीवन में भी पिता हैं और फिल्म के निर्माता भी हैं. फिल्मों से अभिनेता, निर्माता, निर्देशक और साउथ इंडियन फिल्म एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के प्रेजिडेंट के तौर पर जुड़े हुए अरुण पांडियन तमिलनाडु की राजनीति में भी दखल रखते हैं. डीएमडीके से वर्षों तक जुड़े रहने के बाद वे जयललिता की पार्टी एआईएडीएमके में शामिल हो गए थे. वर्षों का अनुभव चेहरे पर साफ नज़र आता है और पूरी फिल्म में सबसे ज़बरदस्त भूमिका इन्हीं की है. लाचार पिता से लेकर अपनी बेटी की बेइज़्ज़ती करने वाले पुलिस अफसर पर हमला करने वाला पिता और अपनी बेटी के क्रिस्चियन बॉयफ्रेंड से पहली बार मिलने वाला रूढ़िवादी पिता, ये पूरा सफर अरुण ने सक्षम ढंग से निभाया है.

कहानी के तीसरे किरदार हैं, कीर्ति के बॉयफ्रेंड की भूमिका में प्रवीण राजा यानि चार्ल्स जिनकी ये दूसरी ही फिल्म है. पहली फिल्म थी चेन्नई पलानी मार्स जो कि तमिल सुपरस्टार विजय सेतुपति ने लिखी थी और कोकीन की लत के शिकार के रूप में प्रवीण का किरदार इस अजीब से कहानी वाली फिल्म में नौजवानों में बहुत पसंद किया गया था. फिल्म को कुछ इंटरनेशनल पुरस्कार भी मिले थे.

ये फिल्म मलयालम भाषा में लिखी थी (हेलन) और लेखक अल्फ्रेड कुरियन जोसफ, मधुकुट्टी ज़ेवियर और नोबेल बाबू थॉमस ने मिल कर लिखी थी. नोबेल बाबू ने हेलन में हीरोइन के प्रेमी का किरदार निभाया था जो कि मुस्लिम किरदार था, तमिल वर्शन में इसे बदल कर क्रिस्चियन कर दिया गया है. किसी प्रकार की कॉन्ट्रोवर्सी से बचने के लिए.

एफटीआईआई से सिनेमेटोग्राफी का डिप्लोमा हासिल कर चुके महेश मुथुस्वामी ने इस फिल्म को शूट किया है, हालाँकि वो अब तक कम से कम डेढ़ दर्ज़न फिल्मों की सिनेमेटोग्राफी कर चुके हैं और उनकी डिप्लोमा फिल्म को ऑस्कर में भारत की स्टूडेंट एंट्री के तौर पर भेजा गया था, इस फिल्म की सिनेमेटोग्राफी में कोई खास कमाल नहीं किया है. डीप फ्रीजर के सीन्स में काफी कुछ करने की गुंजाईश थी.

एडिटर के तौर पर प्रदीप राघव ने निराश किया. शुरुआत में पिता और पुत्री के बीच के दृश्यों का बेजा इस्तेमाल किया गया है किरदार इस्टैब्लिश करने के लिए. हीरोइन की तलाश के दृश्यों में भी एडिटिंग की कमी नज़र आयी. फिल्म 2 घंटे लम्बी है जबकि आसानी से 15-16 मिनिट बचाये जा सकते थे.

जहाँ तक निर्देशन का सवाल है गोकुल, तमिल फिल्म इंडस्ट्री का एक उभरता हुआ नाम हैं और इस फिल्म में उनकी मेहनत नज़र आती है. हालाँकि फिल्म तेलुगु फिल्म हेलेन का रीमेक है तो बहुत कुछ करने की संभावनाएं नहीं थी. गोकुल इस फिल्म की कहानी को कसने में और बेहतर शॉट्स लेने में और थोड़ा काम करते तो संभवतः फिल्म की पकड़ दर्शकों पर पूरे समय बनी रहती.

फिल्म परिवार के साथ देखी जा सकती है. फिल्म तमिल में है और सब-टाइटल अंग्रेजी में हैं. ओटीटी प्लेटफॉर्म पर वीभत्सता की जगह, अच्छा कॉन्टेंट देखना चाहते हैं तो फिल्म जरूर देखिये.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज