25 साल का था तब हर दिन आते थे सुसाइड के ख्यालः एआर रहमान

25 साल का था तब हर दिन आते थे सुसाइड के ख्यालः एआर रहमान
ए.आर. रहमान

रहमान ने कहा, "पिता की मृत्यु के दुःख ने मुझे कमजोर बना दिया. उस दौरान मुझे तकरीबन 35 फ़िल्में मिलीं लेकिन मैं उनमें से सिर्फ 2 ही फ़िल्में कर सका."

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 4, 2018, 3:32 PM IST
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देश के फेमस म्यूजिक कम्पोज़र एआर रहमान ने एक इंटरव्यू में अपनी जिंदगी को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा किया है. उन्होंने बताया कि उनकी जिंदगी में एक ऐसा दौर भी आ चुका है जब उन्हें लगता था कि उन्हें सिर्फ नाकामयाबी ही मिलेगी और इस वजह से तकरीबन हर दिन सुसाइड का ख्याल आता था. ऑस्कर विजेता ने बताया कि दरअसल उनकी जिन्दगी के सबसे कमजोर वक्त ने ही उन्हें असल मायने में मजबूत बनने में मदद की है.

एआर रहमान ने बताया कि जब वह 25 साल के थे तब उन्हें आत्महत्या जैसे ख्याल आते थे क्योंकि कम उम्र में ही मेरे सिर से पिता का साया हट चुका था. इसके अलावा भी काफी कुछ ऐसा था जिसकी वजह से मुझे ऐसे ख्याल आते थे. उन्होंने कहा हममें में से कई लोग ऐसा सोचते हैं कि वो बेहतर नहीं हैं. लेकिन इन सभी ख्यालों नें मुझे बेख़ौफ़ बना दिया. मृत्यु अटल है, सब कुछ अपनी एक्सपायरी डेट के साथ आते हैं तो हम क्यों इस बात से डरें.

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51 वर्षीय संगीतकार की जिन्दगी में तब बदलाव आया जब उन्होंने चेन्नई में अपने घर के पीछे रिकॉर्डिंग स्टूडियो पंचथन रिकॉर्ड इन का निर्माण किया. उन्होंने बताया इससे पहले सब कुछ बहुत ही निष्क्रिय जैसा था. पिता की मृत्यु के दुःख ने मुझे कमजोर बना दिया. उस दौरान मुझे तकरीबन 35 फ़िल्में मिलीं लेकिन मैं उनमें से सिर्फ 2 ही फ़िल्में कर सका.



ऐसे में सभी लोग हैरान थे कि 'तुम कैसे जीवित रहोगे? तुम्हारे पास सब कुछ तो है, इसे जाने मत दो.' रहमान कहते हैं, "उस वक़्त मैं 25 साल का था और ये सब नहीं समझ सका. ये सब कुछ खाने की तरह है अगर आप एक बार में काफी सारा खाना खा लेते हैं तो सुस्ती आने लगती है, इसे हमें धीरे-धीरे प्रयोग में लाना चाहिए ये हमें चुस्त बने रखता है."

रहमान महज 9 साल के थे जब उनके पिता आर के शेखर जोकि एक फिल्म स्कोर कम्पोजर थे, इस दुनिया को अलविदा कह गए और उनके हाथ में म्यूजिक की कमान थमा गए. रहमान कहते हैं कि 12 से 22 साल की उम्र के दौरान मैंने तकरीबन सब कुछ सीख लिया था और मैं इन सबसे बोर हो चुका था.

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हाल ही में अपनी बायोग्राफी ‘नोट्स ऑफ ए ड्रीम : द ऑथोराइज्ड बायोग्राफी ऑफ एआर रहमान’ की लॉन्चिंग के मौके पर एआर रहमान ने अपनी ज़िंदगी से जुड़ी कई बातें शेयर की. एआर रहमान इस किताब के बारे में बारे में कहते हैं कि यह किताब उनके लिए एक यात्रा रही है. रहमान का कहना है कि उनकी यह किताब उन्हें जीवन के उन कोनों तक लेकर गई है, जो उनके लिए लंबे समय से विशेष रहे हैं.

लेखक कृष्णा त्रिलोक द्वारा लिखित, लैंडमार्क और पेंगुइन रैंडम हाउस की मदद से रहमान की बायोपिक शनिवार को लॉन्च की गई. रहमान ने कहा, 'नोट्स ऑफ ए ड्रीम…' मेरे लिए एक यात्रा रही है, जिसने मेरे जीवन के उन पलों को ताजा किया है, जो मेरे लिए विशेष रहे हैं. कृष्णा त्रिलोक के साथ व्यावहारिक बातचीत ने मेरे रचनात्मक और व्यक्तिगत जीवन के कुछ हिस्सों को उजागर किया है, जिसके बारे में ज्यादा लोग नहीं जानते हैं.’

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ए आर रहमान ने कहा कि उन्हें यह किताब काफी इंटरेस्टिंग लगी. यही सही टाइम था किताब के विमोचन का और यही मेरी जिंदगी भर की मेहनत का पेड ऑफ है. अपनी बायोग्राफी के आइडिया के बारे में बात करते हुए एआर रहमान कहते हैं ‘यह कृष्णा त्रिलोक का विचार था. मैं इसका क्रेडिट कृष्णा त्रिलोक को देना चाहूंगा कि उन्होंने यह किताब लिखी ताकि लोग मेरे बारे में जान सकें. यह कुछ नया लगा मुझे.

उन्होंने आगे कहा कि वैसे लोग मेरे बारे में बहुत कुछ जानते हैं पर कहानियां बदलती रहती हैं जिंदगी की. हर 10 साल में कुछ ना कुछ बदलाता रहता है। पिछले 10 सालों में मैं एक अलग ही दुनिया में था और कृष्णा ने इसे काफी खूबसूरती से कवर किया है.

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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