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Bhojpuri में पढ़ें- केहू लेखक के फेड़ पर घर त केहू के गोल घूमे वाला घर

प्रतिभावान लोगन के कौनो भी रचनात्मक कदम सराहनीय होला. लेखक लोग कई बार दिलचस्प काम क देला. एह लेख में भारत समेत दुनिया के कुछ प्रसिद्ध लेखक लोगन के खास आदत के बारे में रोचक तथ्य दिहल जा रहल बा. अब सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ के लीं.

प्रतिभावान लोगन के कौनो भी रचनात्मक कदम सराहनीय होला. लेखक लोग कई बार दिलचस्प काम क देला. एह लेख में भारत समेत दुनिया के कुछ प्रसिद्ध लेखक लोगन के खास आदत के बारे में रोचक तथ्य दिहल जा रहल बा. अब सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ के लीं.

प्रतिभावान लोगन के कौनो भी रचनात्मक कदम सराहनीय होला. लेखक लोग कई बार दिलचस्प काम क देला. एह लेख में भारत समेत दुनिया क ...अधिक पढ़ें

ऊ फेड़ पर एगो बहुत सुंदर घर बना के रहत रहले. ओही में ऊ लिखस- पढ़स आ ओही में आराम करसु. फेड़ पर रहल माने प्रकृति के साहचर्य में डूबि के रचना कइल. फेड़ का बारे में एगो कविता में अज्ञेय जी का कहले बाड़े, पढ़ीं (भोजपुरी अनुवाद)-

हम कहनीं, “फेड़, तूं एतना बड़ बाड़,
एतना कड़ा बाड़, न जाने केतना सौ बरस के आंधी-पानी में
सिर ऊंचा कइले अपना जगह अड़ल बाड़.
सूरज उगता-डूबता, चांद भरता-छीजता

ऋतु बदलतारी सन, मेघ उमड़ता-पसीजता; आ तूं सब सहत संतुलित शांत धीर रहत विनम्र हरियाली से तोपाइल, बाकिर भीतर ठोठ कठैठे खड़ा बाड़ !” त एही से बूझाता कि अज्ञेय जी फेड़ भा प्रकृति के गोद में रहल कतना पसंद करत रहलन.

नोबेल पुरस्कार विजेता जार्ज बर्नार्ड शा जनमल रहले आयरलैंड में बाकिर जीवन भर रहले इंग्लैंड में. उनकर घर रिवाल्विंग रहे. माने ओह घर के जेने मन करे घुमा दीं. काहें? त जार्ज बर्नार्ड शा के इच्छा रहे कि जब तक दिन के उजाला रहे, ऊ सूर्य के रोशनी में ही लिखिहें. त सूर्य सुबह जेने रहसु उनका घर के रुख ओनिए राखल जाउ. दुपहरिया भइल त घर के दिशा सूर्य का ओर क दिहल जाउ. उनका कमरा के बनावट अइसन रहे कि धूप डाइरेक्ट उनका पर ना परे बाकिर सूर्य के पर्याप्त प्रकाश उनका लेखन के टेबुल पर परत रहे. उनकर प्रसिद्ध नाटक ‘आर्म्स एंड द मैन’ के आज भी चर्चा होला.

फ्रेंच लेखक बालजाक (पूरा नांव- होनोरे डी बाल्जाक)
दिन भर में 50 कप कॉफी पियत रहले. कॉफी पी के ऊ लेखन में गहिर उतरि जासु. त कहल जा सकेला कि थोरे- थोरे देर के बादे उनका कॉफी के जरूरत परत रहल ह. कहल जाला कि कभी- कभी जब एक बार ऊ लिखे बइठि जासु त रात का बेरा ऊ सुतबो ना करसु. लिखत- लिखत कब सबेर हो गइल उनका ना बुझाउ. लेखन में एतना गहिर डूबि जासु.

लेखन का प्रति कतना समर्पण रहेला एकर उदाहरण देखीं. एक बार प्रसिद्ध लेखक विक्टर ह्यूगो के आपन उपन्यास पूरा करेके रहे आ एही बीच में उनकर कई गो जरूरी काम आ गइल. एने प्रकाशक के बार- बार आग्रह रहे कि उपन्यास जल्दी पूरा करीं. त बाकी काम निपटा के ऊ अपना नोकर से कहले कि देखु भाई, हमार काम त ओराए के नइखे. हम आपन कुल कपड़ा खोल के लंगटे हो जातानी. तें हमार खोलल कपड़ा दोसरा कमरा में राखि दे ताकि हम बाहर निकले लायक ना रहीं आ चुपचाप बइठि के लिखीं. ऊहे भइल. विक्टर ह्यूगो लंगटे बइठि के लिखे लगले. जतना दिन में उपन्यास पूरा ना भइल लंगटे रहि के लिखले. उपन्यास के नांव रहे- ‘द हंच बैक आफ नोट्रेडम’.

मशहूर किताब ‘ब्लू एंजेल’ के लेखिका फ्रैंसिन प्रोज लिखे का घरी देवाल का ओर मुंह क के बइठस. काहें? त देवाल का ओर मुंह रहला से मन एने- ओने ना जाई. ध्यान लेखन पर रही. लेखन का प्रति कतना समर्पण बा, एहू से जाहिर होता. एक समय विवादास्पद रहल किताब ‘द विची कोड’ (Da Vinci Code) के लेखक डैन ब्राउन हर एक घंटा पर उठि के दंड- बैठक भा सपाट (पुश अप) नियर कसरत कके तब लिखत रहले ह. कभी- कभी शीर्षासन नियर कसरत भी करत रहले ह. कारण? उनका लागत रहल ह कि लिखत- लिखत उनकर शरीर अकड़ि गइल बा. तरोताजा होखे खातिर ऊ हल्का कसरत क लेत रहले ह.

चर्चित किताब ‘लोलिता’ के लेखक व्लादिमीर नोबोकोव के आदत रहे कि ऊ सामान्य पन्ना पर ना लिखसु. हमेशा ऊ ग्रीटिंग कार्ड भा इंडेक्स कार्ड नियर कार्ड पर लिखसु. अइसन कुल कार्ड उनका तकिया का नीचे भी हमेशा रहे. कब कौन आइडिया आ जाई आ लिखे के रही ई ठीक ना रहे. त मान लीं सूतल बाड़े आ दिमाग में कौनो विचार आइल, बस तकिया का नीचे से कार्ड निकलले आ लिखि दिहले. समर्पित लेखन के बात अउरी सुनीं.

प्रसिद्ध लेखक अर्नेस्ट हेमिंग्वे, चार्ल्स डिकेंस आ लेखिका वर्जीनिया वोल्फ खड़ा होके लिखत रहल ह लोग. सामान्य आदमी के बइठि के लिखे के आदत होला. बाकिर एह लेखक लोगन के खड़ा होके लिखे के आदत रहल ह. ओह लोगन के लागत रहल ह कि खड़ा होके लिखला पर एगो जिम्मेदारी आ जाला आ गहराई में डूबल आसान हो जाला. ऊ लोग आपन डेस्क के ऊंचाई खड़ा रहला के ऊंचाई अनुसार बनवावत रहल ह. डेस्क पर खड़ा हो गइला का बाद दिन- दुनिया के भुला के लेखन में व्यस्त हो जात रहल ह लोग.

मार्क ट्वेन आ जार्ज आरवेल लेटि के लिखत रहल ह लोग. सोफा पर पीठ टेका के आ आधा सुतला नियर बइठि जात रहल ह लोग आ लिखे में मशगूल हो जात रहल ह. कभी- कभी पेटकुनिया सूति के भी लिखत रहल ह लोग. एह लोगन के मान्यता रहल ह कि सूति के लिखला पर दिमाग बड़ा शांत रहेला आ लेखन में नयापन आवेला. त लेखक लोगन के कौनो ठीक नइखे कि ओह लोगन के कौना मुद्रा में रहला पर मन गहराई से लेखन में डूबी. बाकिर एक बात बा, लेखन के प्रति अतना डेडिकेशन देखि के मन एह लोगन के प्रति सरधा से झुकि जाता. एह लेखक/लेखिका लोगन के बार- बार प्रणाम बा.

(विनय बिहारी सिंह स्वतंत्र पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

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