ये सात फिल्में नहीं देखीं तो आप नहीं हैं भोजपुरी सिनेमा के फैन, राष्ट्रपति ने खुद कहकर बनवाई थी ये फिल्म

भोजपुरी में सिनेमा बनाने की कहानी बेहद ही दिलचस्प है. लोगों की हिम्मत नहीं पड़ रही थी कि भोजपुरी में सिनेमा बनाए, तब देश के राष्ट्रपति ने आगे बढ़कर एक एक्टर से भोजपुरी में फिल्म बनाने को कहा.

News18Hindi
Updated: July 19, 2019, 9:24 AM IST
ये सात फिल्में नहीं देखीं तो आप नहीं हैं भोजपुरी सिनेमा के फैन, राष्ट्रपति ने खुद कहकर बनवाई थी ये फिल्म
ये फिल्म अब तक सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भोजपुरी फिल्म है.
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Updated: July 19, 2019, 9:24 AM IST
भारत में हर साल करीब 60 भोजपुरी फिल्में बनती हैं. साल 2019 में सबसे भोजपुरी फिल्म जगत में पूरी तरह से भोजपुरी गायकों का कब्जा हैं. इस दौर के प्रमुख हीरो दिनेश लाल यादव, पवन सिंह, खेसारी लाल यादव, रितेश पांडेय, अरविंद अकेला कल्लू या मनोज तिवारी सभी मुख्य पेशा गायकी है. अपनी गायकी लोकप्रियता की बदौलत भोजपुरी इंडस्ट्री में ऐसी फिल्में बनानी शुरू कर दी हैं, जो किसी मेट्रो सिटी में ना मल्टीप्लेक्स का हिस्सा बन पा रही हैं, ना ही सिनेमा के चाहने वालों में जगह बना पा रही हैं. लेकिन भोजपुरी सिनेमा हमेशा से ऐसा नहीं था.

1. गंगा मैया तोहे पीयरी चढ़ाईबो, राष्ट्रपति की मांग पर बनी फिल्म
भोजपुरी फिल्मों की शुरुआत 1960 के दशक से हुई. तब भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने बॉलीवुड अभिनेता नाजीर हुसैन को बुलाया और उनसे भोजपुरी भाषा में सिनेमा बनाने को कहा. इसका प्रतिफल साल 1963 में 'गंगा मैया तोहे पीयरी चढ़ाईबो' के रूप में सामने आया. यह एक क्रांति थी. लोगों ने कभी बड़े पर्दे पर हीरो-हीरोइन को भोजपुरी बोलते नहीं सुना था.

कुंदन कुमार के निर्देशन में बनी इस फिल्म के बारे में कहा जाता है कि तब इसे भोजपुरी समझने वाले करीब हर शख्स ने देखा था. निर्नाल पिक्चर्स के बैनर के तहत बिसननाथ प्रसाद शाहाबादी ने इस फिल्म का निर्माण किया था.

2. लागी नाहीं छूटे राम
साल 1963 में ही पहली फिल्म के निर्देशक कुंदन कुमार ने ही 'लागी नाहीं छूटे राम' बनाई. इसे आर तिवारी ने प्रोड्यूस किया था. इस फिल्म के गानों को तलत महमूद और लता मंगेशकर ने गाया. लाल लाल होठवा से चुवेला ललइया हो कि... आपने कई मौकों पर सुना होगा.

3. बिदेसिया
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दो फिल्मों की कामयाबी को देखते हुए साल 1963 में ही एनएन त्रिपाठी ने 'विदेसिया' बनाई. इस फिल्म ने भी कामयाबी के सोपान चढ़े. ये साल की तीसरी हिट बनी. कहते हैं कि उस दौर में भोजपुरी सिनेमा ने बॉलीवुड को टक्कर दे दी थी, क्योंकि तब भी इस भाषा को बोलने और समझने वाले लोग भारत में सबसे ज्यादा हुआ करते थे.

स्थिति ये थी कि तीन भोजपुरी फिल्मों ने वह प्रभाव पैदा किया था जिसकी सिनेमा में जरूरत थी. ये फिल्में भोजपुरी माटी से जुड़ी हुई थीं. इस फिल्म में बॉलीवुड के बड़े कलकार भी शामिल थे.

4. बलम परदेसिया
तीन फिल्मों की कामयाबी ने लोगों की इस विधा की ओर ऐसा खींचा कि सबने हाथ आजमाना शुरू किया. लेकिन करीब चार साल तक कोई उल्लेखनीय फिल्म पटल पर नहीं आई. साल 1979 में नासिर हुसैन ने ये फिल्म बनाई.

5. चनवा के ताके चकोर
दो साल बाद साल 1981 में नाजीर हुसैन और नासिर हुसैन ने मिलकर ये फिल्म बनाई थी. इसमें मोहम्मद रफी ने गाने गाए थे. साल 1963 से शुरू हुआ ये सफर इस फिल्म पर आकर खत्म हो गया ऐसा माना जाता है. भोजपुरी फिल्मों के इस विधा को चाहने वाले कहते हैं कि इस फिल्म के बाद भोजपुरी फिल्में बंद हो गईं.

6. नदिया के पार (हिन्दी/भोजपुरी)
साल 1982 में आई नदिया के पार की भाषा हिन्दी थी. लेकिन इस फिल्म की पृ‌ष्ठभूमि और इसके बनाने के अंदाज को भोजपुरिया बताया जाता है. यहां कि कई बार लोग इस फिल्म को लेकर लोग भ्रम में रहते हैं कि भोजपुरी है या हिन्दी. असल में यह फिल्म उपन्यास 'कोहबर की शर्त' पर आधारित है. उपन्यास की पृष्ठभूमि भोजपुरी है.

7. ससुरा बड़ा पैसा वाला
इसे अब तक की भोजपुरी की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म माना जाता है. साल 2003 में आई ‌इस फिल्म के हीरो मनोज तिवारी थे. अर्से बाद कोई यूपी-बिहार पृष्ठभूमि का आदमी हीरो बनकर आया था. इस फिल्म में टी-सीरिज ने भी पैसा लगाया था. मौजूदा भोजपुरी कलाकार मानते हैं इस फिल्म ने उन्हें पैसे कमाने सिखाए. लेकिन इसी फिल्म ने चटनी सॉन्ग गाने वाले और गिरमिटिया मजदूरों के इंटरटेनमेंट के लिए ऐसा सिनेमा बनाना शुरू दिया, जिससे भोजपुरी को दिल से मानने वालों ने भोजपुरी सिनेमा देखना बंद कर दिया.

यहां रवि किशन और अमिताभ बच्चन का जिक्र करना होगा. क्योंकि रवि किशन को भोजपुरी का अमिताभ कहा जाता है.
First published: July 19, 2019, 9:24 AM IST
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