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Bhojpuri: दिल से भोजपुरिया अंजान, हिंदिये ना, भोजपुरियो फिल्म में दिहले एक से बढ़के एक हिट गीत. आज ह पुण्यतिथि

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भोजपुरिया गीतकार लालजी पांडे उर्फ अंजान एह दिन के ही दुनिया के अलविदा कहले रहले. आज उनकर पुण्यतिथि बा. उनका के हमनी लोगन के बीच से गईल लगभग 24 साल हो गईल ह, लेकिन उनकर याद और गाना सब कुछ अबहीनों लोगन के जुबां पर रहेला.

  • News18Hindi
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आज के दिने, 13 सितम्बर के एगो महान गीतकार अउरी दिल-दिमाग से विशुद्ध भोजपुरिया लालजी पांडे उर्फ अंजान एह दुनिया के अलविदा कहले रहलें. आज उनका हमनी के बीच से गइला लगभग 24 साल हो गइल बाकिर उ अपना गीतन में सजीव बाड़ें, अपना श्रोता सभ से रोज बतियावेलें. अंजान जी नाम के खाली अंजान रहलें बाकिर उनके गीत संगीत प्रेमी बहुत पहिले से जानेला. हिन्दी में त उनके गीतन के सिक्का खूब चलबे कइल, भोजपुरी में भी जब उ 1979 के फिल्म बलम परदेसिया से गीत लिखल चालू कइलें त एक से एक यादगार गीत भोजपुरी सिनेमा के देहलें. ‘गोरकी पतरकी रे, मारे गुलेलवा जियरा उड़ उड़ जाये’ केकरा इयाद ना होई. आशा भोंसले के इठलात आवाज अउरी मोहम्मद रफी के छेड़छाड़ से भरल गायकी के अदा अउरी अंजान के गीत पर चित्रगुप्त के संगीत के मिश्रण भइल त एगो मधुर गीत के सोआद सभके कान चिखलस.

बनारस के ओदार गांव में स्व. शिवनाथ पांडे के घरे लाल जी पाण्डे के जनम भइल. उनके माई के नाम इंदिरा देवी रहे. 28 अक्टूबर 1930 के पैदा भइल अंजान शुरुए से कविता, गीत, साहित्य अउरी कला में रुचि राखत रहलें. अंजान के परिवार बहुत अच्छा स्थिति में ना रहे बाकिर उ जइसे तइसे जोड़ गेंठ के बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से वाणिज्य में परास्नातक कइलें. पढ़े-लिखे के सौखीन रहबे कइलें. पढ़ाई के दौरान गीत, शाइरी के चलते दोस्त-इयारन में काफी लोकप्रिय रहलें. कादो, इयारे लोग उनकर नाम ‘अंजान’ रखल. अंजान के जवानिए में अस्थमा जइसन असाध बेमारी धर लेहलस. अब उनके पूरा जीवन एह के लेके जीए के रहे.

बंबई बेमारी के चलते गइलें अउरी महान गीतकार बन गइलें

एही दौरान उनके एगो मित्र शशि बाबू डी पेरिस होटल के मालिक रहलें, एक दिन जिद कs के अंजान के अपना चिन्हार के क्लार्क होटल में होत एगो संगीत कार्यक्रम में ले गइलें. एह प्रोग्राम में मशहूर गायक मुकेश आइल रहलें. शशि बाबू मुकेश से अंजान के मिलववलें. जब मुकेश उनके गीत अउरी रचना सुनलें त वाह-वाह करे लगलें आ कहलें कि रउआ इहाँ ना बंबई रहे के चाहीं. हालांकि तब अंजान एह बात पर विशेष धेयान ना देहलें. साइत ई सोचले होखस कि बंबई गइल त पहाड़ बा, के जाई उहाँ जब इहवें के खर्चा नइखे आंटत. बाकिर भाग में कुछ और लिखल रहे. उनके अस्थमा अउरी बिगड़त गइल. डाक्टर इहाँ ले कहि देहलस कि रउआ अगर जिए के बा त बनारस छोड़ दीं. इहाँ के शुष्क हवा राउर स्थिति साफ बिगाड़ दी. रउआ समुद्री किनारा वाला शहर में जाईं, उहाँ के हवा रउआ के सूट करी. अब अंजान के बंबई आवे के विचार आइल. उ जइसे तइसे बंबई अइलें बाकिर इहाँ उनका खातिर संघर्ष के एगो मैदान तइयार रहे.

उनका लगे पइसा त रहे ना, दोस्तन से लिहल पइसा ओरा गइल. बंबई में रहे के जगह ना रहे त कुछ दिन ले उ अपना चार गो इयार के साथे एरोमा गेस्ट हाउस में एगो रूम लेके रहलें. बाद में उनके दोस्त चल गइलsसन त उनका से अकेले उहाँ के खर्चा ना सम्हराइल. उ बंबई में ट्यूशन पढ़ावे लगलें. ओही बीचे उ मुकेश से मिललें जे उनके बंबई आवे के सलाह देहले रहलें. मुकेश उनके प्रेमनाथ से मिलववलें. प्रेमनाथ तब प्रिजनर ऑफ गोलकोंडा बनावत रहलें. एह में उनके गाना लिखे के मिलल. ‘लहर ये डोले, कोयल बोले’ उनके पहिला हिन्दी गीत रहे. एह फिल्म में एगो अउरी गाना उ लिखलें बाकिर एह गीतन से उनके करियर के कवनो रफ्तार ना मिलल. बाकिर छोट छोट फिल्मन में गीत लिखे के मौका मिले लागल. आ उनके शोहरत त ना बाकिर रोटी के जोगाड़ हो गइल. एकरा से पहिले कई साल तक उ कबो ट्रेन में, कबो प्लेटफ़ॉर्म पर, कबो अपार्टमेंट के सीढ़ी पर आपन समय कटले रहलें.

1963 के फिलिम से गोदान में उनके मौका मिलल, राजकुमार के एह फिलिम के संगीत रवि शंकर देहले रहलें. उ एह फिल्म के लिखल गीतन से इंडस्ट्री में आपन धमक दे देहलें. एकरा चलते उनके तबके बड़ संगीतकार ओ.पी. नैय्यर संपर्क कइलें अउरी बड़ फिल्मन में गीत लिखे के मौका दिहलें. फिल्म बंधन के गीत ‘बिन बदरा बिजुरिया कइसे चमके’ अंजान के पहिला सफल गीत रहे. एही समय कल्याण जी-आनंद जी से भी अंजान के नजदीकी भइल आ फेर शुरू भइल अंजान के हिट गीतन के सिलसिला. तब अमिताभ बच्चन खातिर अंजान एक से बढ़के एक हिट गीत लिखल शुरू कइलें अउरी फिल्म इंडस्ट्री के बहुते बड़ गीतकार बन गइलें. प्रकाश मेहरा के साथे भी अंजान के खूब चलल आ उ मेहरा के अक्सर फिल्मन में गीत लिखलें. अमिताभ खातिर कल्याण जी-आनंद जी के साथे अंजान के गीतन के लिखे के सिलसिला शुरू भइल 1976 के फिल्म दो अजनबी से. ओकरा बाद हेरा फेरी के ‘बरसों पुराना ये याराना’, खून पसीना के टाइटल सॉन्ग, मुकद्दर का सिकंदर के ‘रोते हुए आते हैं सब’, ‘दिल तो है दिल’, ‘ओ साथी रे तेरे बिना भी क्या जीना’, लावारिस के ‘कब के बिछड़े’ आ आपन सबसे हिट गीत ‘खइके पान बनारस वाला’ डॉन खातिर उ लिखलें. अंजान अमिताभ बच्चन खातिर दोसर संगीतकारन के साथे भी मिलके गीत लिखलें. साइत गंगा किनारे वाला रिश्ता दुनू जाना खूब निभावल लोग. बनारस के अंजान आ प्रयाग के अमिताभ के जोड़ी खूब जमल.

अंजान भोजपुरी में भी नगदे गीत लिखलें. उ भोजपुरी में गीत संगीतकार चित्रगुप्त खातिर लिखलें आ दुनू जाना के दोस्ती बाद में उनके लइका लोग के बीच निभल. अंजान के बेटा समीर अंजान आ चित्रगुप्त के बेटा आनंद अउरी मिलिंद के तिकड़ी बाद के साल में एक से एक हिट गाना देहले बा. अंजान के हिट भोजपुरी फिल्मन में बलम परदेसिया के अलावा हमार भौजी, बिरहिन जनम-जनम के, भईया हमार राम जइसन भउजी हमारी सीता आदि बा. फ़िल्मी मनोरंजन गीत में भी चेतना जगावे के काम अंजान करत रहलें. बलम परदेसिया में उनकर गीत बा – जगत रहs भईया तू सोये मति जइहs, पसीना के कमइया, मुफत जिन गँवइहा …

अंजान हमेशा अपना गीतन से संगीत प्रेमियन के जगावत रहिहें, हँसावत रहिहें, रोआवत रहिहें आ दिल में जगह बनावत रहिहें. अमर रहिहें अंजान. पुण्यतिथि पर पावन स्मृति के नमन.

(लेखक मनोज भावुक भोजपुरी साहित्य और सिनेमा के जानकार हैं. )

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