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Bhojpuri Film Review: 6 प्वॉइंट्स में समझे क्यों देखें निरहुआ की भोजपुरी फिल्म 'आए हम बाराती बरात लेके'?

Bhojpuri Film Review: जानें कैसी है निरहुआ की फिल्म 'आए हम बाराती बरात लेके'?

Bhojpuri Film Review: जानें कैसी है निरहुआ की फिल्म 'आए हम बाराती बरात लेके'?

Bhojpuri Film Aaye Hum Barati Barat Leke: भोजपुरी एक्टर और सांसद दिनेश लाल यादव निरहुआ (Dinesh lal Yadav Nirahua) की फि ...अधिक पढ़ें

  • News18Hindi
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भोजपुरी सिनेमा एक्टर और सांसद दिनेश लाल यादव निरहुआ (Dinesh Lal Yadav Nirahua) को यूं ही जुबली स्टार का टैग नहीं मिला हुआ है. वो इंडस्ट्री में लंबे समय से एक्टिव हैं और इस दौरान एक से बढ़कर एक फिल्मों में काम कर चुके हैं. उनका दमदार अभिनय कमाल का है. अपने अभिनय को एक बार फिर से उन्होंने साबित कर दिखाया है. उनकी भोजपुरी मूवी ‘आए हम बाराती बारात लेके’ (Aaye Hum Barati Barat Leke) को यूट्यूब पर रिलीज कर दिया गया है, जिसे दर्शकों से अच्छा खासा रिस्पांस मिल रहा है. मूवी को छह मिलियन से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं. ऐसे में आपको उनकी इस फिल्म के बारे में कुछ प्वॉइंट्स के जरिए बताने की कोशिश कर रहे हैं कि क्यों देखना चाहिए…?

कहानी
निरहुआ की फिल्म ‘आए हम बाराती बारात लेके’ की स्टोरी आपको कमजोर दिखेगी मगर स्टोरी भले ही कमजोर हो इसमें आपको जगह-जगह दिनेश लाल यादव सामाजिक सीख देते हुए नजर आने वाले हैं और सबसे बड़ी बात ये ही कि भोजपुरी में पहली बार किसी फिल्म में पंजाबी तड़का देखने के लिए मिल रहा है. इसमें कॉमेडियन संजय महानंद और संजय पांडे तक का पंजाबी लुक और किरदार देखने के लिए मिल रहे हैं. साथ ही इनका संवाद भोजपुरी के साथ-साथ पंजाबी में मिक्स है, जो अभी तक सबसे अलग है. इसे देखकर आपको शाहरुख खान और काजोल की ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ की याद आ जाएगी. कुछ सीक्वेंस ‘वीर जारा’ और ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ जैसा लगेगा, जो कि भोजपुरी में अलग ही रोमांच पैदा करता है. ये फिल्म की कहानी को मजबूती देते हैं.

बाप-बेटे के रिश्ते का पढ़ाया पाठ
फिल्म ‘आए हम बाराती बारात लेके’ में जो पहली सामाजिक सीख निरहुआ देते हुए दिखे हैं वो है बाप-बेटे के रिश्ते का पाठ. इसमें आप देखेंगे कि कैसे निरहुआ एक बाप को ये बताते हैं कि मां-बाप बच्चे को जन्म देते हैं तो उसके जीवन का हर फैसला वो ही लेते हैं कि वो क्या खाएगा, क्या पहनेगा, क्या पढ़ेगा, क्या बनेगा और यहां तक कि वो किससे शादी करेगा. बच्चे को उसके पसंद की चीज चुनने का कोई अधिकार नहीं होता है, जो कि मां-बाप के द्वारा बच्चे को दिया जाना चाहिए. इसके अलावा वो बच्चे को भी मां-बाप के प्रति उसकी जिम्मेदारियों का पाठ पढ़ाते भी दिखते हैं कि अगर एक बच्चा जीवन से हारकर मौत को गले लगा लेता है तो उसके पीछे घरवालों का क्या हाल होता है. वो अपनी बात को मां-बाप के सामने रख सकता है साथ ही अगर वो ठीक है तो उसे मनवाने के लिए उसे कोशिश करते रहना चाहिए.

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बेटियां नहीं हैं किसी से कम
निरहुआ की इस फिल्म में बेटी के जन्म लेने पर जहां लोग उदास नजर आते हैं. वहीं, निरहुआ फिर से एक सीख देते हुए नजर आते हैं कि बेटियां भी आज इस समय में किसी से कम नहीं हैं. इस दौरान वो दिवंगत स्पेस साइंटिस्ट कल्पना चावला, महावीर फोगाट की पहलवान बेटियों गीता और बबीता और झांसी की रानी की वीरता के बारे में बताते हैं. साथ ही बेटियों से नफरत करने वालों को वो ये भी बताते हैं कि बेटियां ही हैं, जो सृष्टि को चलाने वाला महान काम करती हैं. वो बेटियों की खूबियों को बताते हैं और उनका मान बढ़ाते दिखाई देते हैं.

सामाजिक ढकोसलों के प्रति सोच बदलें- निरहुआ
इसमें एक जगह आपको निरहुआ सामाजिक ढकोसलों के प्रति अपनी सोच बदलने की राय देते हैं, जिससे ना जाने कितनों के घर तबाह हो जाते हैं. इसमें से एक ढकोसले की चर्चा में फिल्म में की जाती है कि लड़की मांगलिक होती है और उससे शादी तय होते ही किसी का निधन हो जाता है. सब काम अमंगल में बदलते हैं. निरहुआ कहते दिखते हैं कि ‘जब एक औरत को देवी का रूप माना जाता है तो उसके घर में आने से कैसे अमंगल हो सकता है और जिसके जन्म से ही उसके आगे मांगलिक जुड़ा हो उसके आने से कैसे अमंगल हो सकता है’. यहां पर बदलाव की बात की जाती है.

दोस्ती का पढ़ाया पाठ
वहीं, मूवी में आपको एक्टर दोस्ती का भी पाठ पढ़ाते दिखते हैं कि कैसे अनजाने में बिना एक-दूसरे से बात किए दो दोस्त 25 साल तक एक-दूसरे से बिना बात किए काट देते हैं सिर्फ और सिर्फ एक गलतफहमी के कारण. यहां सीख ये है कि किसी गलतफहमी की शिकार हों उससे पहले आपस में एक बार बात जरूर करें और हर झगड़े की तह तक जाएं. फिर कोई फैसला लें.

कैसी है फिल्म?
निरहुआ की फिल्म ‘आए हम बाराती बारात लेके’ एक पारिवारिक और लव स्टोरी पर आधारित मूवी है. इसमें ना तो आपको द्विभाषीय शब्द और अश्लीलता जरा भी देखने के लिए नहीं मिलेगी. फिल्म में आपको बॉलीवुड की कई फिल्मों ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ और ‘वीर जारा’ की मिश्रण देखने के लिए मिलेगा. मगर इसमें भोजपुरी टच होता है, जिसके कारण इसमें काफी मिठास पैदा होती है. पहली बार भोजपुरी में पंजाबी तड़का मिलता है. संजय महानंद और संजय पांडे (Sanjay Pandey) का किरदार आपको पंजाबी में मिलेगा. संजय पांडे थिएटर आर्टिस्ट रह चुके हैं, जिसका सबूत आप इसमें देख सकते हैं. वो जिस भी किरदार में आते हैं अलग छाप छोड़ जाते हैं. मूवी में अवधेश मिश्रा ने भी कमाल का अभिनय किया है वो निरहुआ के पिता के रोल में हैं. पंजाबी एक्ट्रेस जसविंदर ने एक्टर के अपोजिट लीड रोल प्ले किया है. कुल मिलाकर आप इसे परिवार के साथ देख सकते हैं और भोजपुरी में बॉलीवुड के मिश्रण का मजा ले सकते हैं.

Tags: Bhojpuri, Dinesh lal yadav nirahua, Nirahua

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