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Bhojpuri: फिल्मी सुग्गा- जन्म-मृत्यु आ पुनर्जन्म के लेके बनल कुछ फिल्म

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का जीवन के बादो कवनो जीवन होला? का मरला के बाद इंसान के अस्तित्व अनंतकाल खातिर समाप्त हो जाला? का पुनर्जन्म होला? जदि होला त पिछला जनम में जवन चेहरा मोहरा अउरी नाम के साथे इंसान जिएला, मरला के बाद नया जन्म में भी उहे शरीर आ नाम काहें ना मिलेला?

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जइसे फिल्मन के पार्ट वन टू थ्री होला, ओसहीं इंसानी जन्म के भी पार्ट 1 आ 2 होला का? जीवन का ह, एकरा के कइसे समझल जा सकेला? का आदमी मरला के बाद अपना कर्म के हिसाब से स्वर्ग आ नरक में जाला? का साचहूँ आसमान में स्वर्ग के सीढ़ी लागेला? का मर गइल लोग से बात कइल जा सकेला?

अइसन हजार सवाल आदमी के जीवन भर ओकरा मन में कौंधत रहेला. एकर सही-सही जवाब अध्यात्म में बा, वेद आ वेदान्त में बा. बाकिर सबसे बड़ दिक्कत ई बा कि अध्यात्म के बूझल ही सबसे कठिन काम बा. ओकरा के साधे में बड़ा कठिनाई बा. जदि अध्यात्म के साध लेनी त जीवन मृत्यु के गूढ़ रहस्य बूझे में आसानी होई. समाज के आईना ह सिनेमा अउरी सिनेमा अध्यात्म के रहस्यन के कुरेदत कई गो फिल्म बनवले बा. हालांकि अक्सरहा समानांतर सिनेमा में अध्यात्म के विचारन के कथानक, संवाद में पिरो के देखावल जाला. बाकी मास इंटरटेनर फिल्म अइसन गंभीर मुद्दन के छूए के ना चाहेला.

आईं जानल जाय कुछ अइसने फिल्मन के बारे में जवन रउआ वाचलिस्ट में होखे के चाहीं, अगर रउआ भी एह तरह के सवालन से परेशान बानी अउर एकर जवाब मनोरंजक तरीका से जाने के चाहत बानी.

मुंबई वाराणसी एक्सप्रेस

एह फहरितस्त में मुंबई वाराणसी एक्सप्रेस एगो बढ़िया फिल्म मानल जा सकेला. 30 मिनट के के ई शॉर्ट फिल्म रउआ के शुरू से अंत ले बान्ह के रखी. एह फिल्म के निर्देशिका आरती छाबरिया बाड़ी. फिल्म में दर्शन जरिवाला के मुख्य किरदार बा. फिल्म के कहानी बा एगो मुंबई के व्यापारी कृष्णकांत झुनझुनवाला के जब पता लागत बा कि उनके कैंसर के लास्ट स्टेज बा अउरी उ कुछ दिन के मेहमान बाड़ें त उ मुंबई-वाराणसी एक्सप्रेस पकड़ के वाराणसी चल देत बाड़ें. काशी में मुक्तिधाम करके एगो सराय बा, जहां लोग अपना अंतिम दिन में रहेला. अइसन मान्यता बा कि काशी में मरल लोग के सीधे मोक्ष मिलेला, माने जन्म-मृत्यु के चक्र से छुटकारा. लेकिन मात्र 30 दिन खातिर मुक्तिधाम में कमरा बुक होला. जदी एतना दिन में मरनी त ठीक ना त कमरा खाली करे के पड़ेला. कृष्णकांत के एगो रिक्शावाला बनारस में मिलत बा जवन उनके मुक्तिधाम ले जाता. उनका रिक्शावाला से दोस्ती हो जाता अउरी उनके अकेल जिनगी बनारस के चहल पहल अउरी मृदुभाषी लोग के बीच रही के हरिहराये लागता. नियमित योग, गंगा स्नान आ अच्छा लोग के संग से उनकर बेमारी हवा हो जाता. उनके जिनगी लवट आवत बा. आखिर उनके 30 दिन बाद मुक्तिधाम छोड़े के पड़त बा. ओकरा बाद उनकर जिनगी कइसे बदलत बा, इहे फिल्म के कहानी बा. रउआ फिल्म जरूर देखे के चाहीं. यूट्यूब पर लार्ज शॉर्ट फिल्म्स के चैनल पर मिल जाई.

मुक्तिभवन

एह फिल्म के विश्वभर में होटल सैलवेशन के नाम से रिलीज कइल गइल रहे. ई कई गो फिल्म समारोह में पुरस्कृत भी भइल आ राष्ट्रीय पुरस्कार से भी नवाजल गइल. एह फिल्म के कहानी भी मुंबई वाराणसी एक्सप्रेस जइसन ही बा. दया एगो सतहत्तर साल के बुजुर्ग बाड़ें अउरी एक दिन रात में सपना देखत बाड़ें कि उनके अंत समय आ गइल बा. अगिला दिने उठ के उ अपना बेटा के जिद करके वाराणसी ले आवत बाड़ें. उनके बेटा राजीव मन मार के आपन परिवार छोड़ के अपना पिता जी के साथे बनारस आवत बा. फिल्म में जीवन-मरण, अध्यात्म, बाप-बेटा के संबंध अउरी जीवन के अर्थ पर गहन चर्चा बा. 1 घंटा 42 मिनट के ई फिल्म काफी सुंदर बनल बा. एक बार त ई फिल्म जरूर देखे के चाहीं. ई फिल्म डिज्नी हॉटस्टार पर देखे के मिल जाई.

आंखों देखी

संजय मिश्रा के फिल्म ‘आँखों देखी’जीवन अउरी एकर विश्वास पर आधारित फिल्म बा. एकर निर्देशक रजत कपूर बाड़ें. फिल्म के कहानी दिल्ली में रहे वाला एगो संयुक्त परिवार के मालिक के बा. जिनके अचानक एक दिन सूझत बा कि आज से उ ओही बात पर भरोसा करिहें जवन देखिहें. बिना देखल कवनो बात पर भरोसा ना करिहें. उनका के लोग पागल कहे लागत बा बाकिर उ सवाल बड़ा वाजिब पूछत बाड़न. उनका मृत्यु पर भी यकीन नइखे, उ चाहत बाड़न कि पहिले ओकरा के देखब, तब हम पतियाइब, दोसर के कहल बात काहे मानी? आखिर उ मृत्यु भी अपना आँखी देखे खातिर कोशिश करिए देत बाड़न. सोचे पर मजबूर करे वाला फिल्म बा, रउआ जियो सिनेमा पर एकरा के देख सकीलें.

आफ्टर लाइफ

जापान के ई फिल्म 1998 में रिलीज भइल रहे अउरी विश्वस्तर पर एकरा 8 गो सम्मानित अवॉर्ड मिलल. फिल्म के कहानी रहे मृत लोग के एगो सराय के. जहां के कौंसिलर धरती से आइल मरल लोग से अपना जीवन के एगो कवनो याद चुने के कहत बा अउरी उहे याद अनंत तक ओकरा साथे रही. 22 लोग के एगो गोल आवत बा अउरी उ सबके आपन-आपन इयाद चुने के कहल जात बा. ई फिल्म एही 22 लोग के जीवन अउरी याद पर आधारित बा. ई फिल्म अमेजन प्राइम पर देखल जा सकेला.

हैवेन कैन वेट

ई फिल्म 1943 में हॉलीवुड में बनल रहे. फिल्म में स्वर्ग के जगह नरक के विशेष रूप से देखावल गइल बा. कइसे एगो विलेन मरला के बाद स्वर्ग मिलला पर नाखुश हो जात बा. उ मृत्यु के फरिश्ता के कई तरीका से ई कनविन्स करे के कोशिश करत बा कि हमरा स्वर्ग ना नरक मिले के चाहीं. फिल्म कॉमेडी अउरी फेर बाद में गंभीर हो जात बा. एही नाम से बाद में 1978 में भी फिल्म बनल रहे, बाकिर ओकर कहानी दोसर रहे. ई फिल्म रउआ एमेजन प्राइम पर देखे के मिली.

द फाइव पीपुल यू मीट इन हैवेन

ई फिल्म एही नाम से आइल नॉवेल से प्रेरित रहे. फिल्म के कहानी रहे एगो मेन्टीनेंस विभाग में काम करे वाला कर्मचारी के. उ बुढ़ हो गइल बा अउरी एक दिन एगो बच्चा के बचावत में खुद मर जात बा. मरला के बाद जब उ स्वर्ग के दुआर से जात बा तब ओकरा जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखे वाला पाँच गो लोग मिलत बा. उ एह पाँचु लोग से अपना जीवन के सबसे मुश्किल सवालन के जवाब पूछत बा जवन ओकरा मिलत बा. जइसे ओकर पत्नी बहुत जल्दी ओकरा के छोड़ के मर गइल, अइसन उ काहें कइलस आदि. ई फिल्म अमेजन प्राइम पर देख सकीलें.

(लेखक मनोज भावुक भोजपुरी सिनेमा व साहित्य के जानकार हैं.)

Tags: Article in Bhojpuri, Bhojpuri

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