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Bhojpuri: आजादी के लड़ाई के केंद्र रहल भोजपुरियो क्षेत्र में बा अमृत महोत्सव के धूम

Bhojpuri: आजादी के लड़ाई के केंद्र रहल भोजपुरियो क्षेत्र में बा अमृत महोत्सव के धूम

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बलिया के मंगल पाण्डेय आ आरा के वीर कुँवर सिंह दुइये गो नाम काफी बा. ओइसे त लमहर इतिहास बा भोजपुरियन के स्वतंत्रता-संग्राम में योगदान के. के नइखे जानत कि बागी बलिया भारत के आज़ादी से पहिलहीं (20 अगस्त 1942 के) आज़ाद हो गइल रहे. भले ऊ आज़ादी चारे दिन खातिर रहे, रहे त.

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ऊ आज़ादी एहू से खास रहे कि खुद तत्कालिन ब्रिटिश कलेक्टर जे.सी.निगम आधिकारिक तौर पर प्रशासन स्वतंत्रता सेनानी चित्तू पांडेय के सौंप देले रहलें. ई बात भारते के इतिहास में ना, ब्रिटिश हिस्ट्री में भी दर्ज बा. लेकिन ई कमाल भइल कइसे ? अइसन ना रहे कि अंग्रेज बलिया वाला क्रांतिकारी लोग के कुचले के कोशिश ना कइले स. खूब कइलें स. बहुत लोग मूअल. लेकिन बलिया के खून में देशभक्ति खातिर उबाल आ देश से प्रेम कुछ बेसिए रहे. आज़ादी खातिर प्रेम जरूरी बा. प्रेम सब करवा लेला.

इहे हाल वीर कुँवर सिंह के समय आरा के रहे. 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के नींव पर ही 1947 के आजादी के महल खड़ा भइल. अंग्रेजन खातिर 1857 के क्रांति के सबसे खतरनाक योद्धा रहलें बाबू कुँवर सिंह. तबे नू उनका से कई बार आमना सामना के युद्ध करे वाला एगो अंग्रेज अफसर डगलस उनका बारे में लिखले बा कि “कुँवर अगर जवान होता तो उसने कब का अंग्रेजों को भारत से बाहर खदेड़ दिया होता”.

त अइसन रहल बा भोजपुरिया धरती जहाँ आज अमृत महोत्सव के लेके कुछ बेसिए जूनून बा. एहू इलाका के युवा लोग सोशल मीडिया पर प्रोफाइल्स के डीपी के बदलके तिरंगा लहरा रहल बा. घरे-घरे तिरंगा फहरावे के तइयारी कर रहल बा. इहवों सेल्फी विद तिरंगा एगो अभियान के रूप लेवे जाता.

भारत के आज़ादी के 75 साल पूरा होखे वाला बा त ओकर जश्न ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के रूप में पूरा देश में मनावल जाता. देश भर में कई तरह के कार्यक्रम के आयोजन कइल जाता. रउरा सब के मालूमें बा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12 मार्च 2021 के ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के शुरुआत साबरमती आश्रम से एगो पदयात्रा के हरी झंडी देखाके कइले रहलें. दरअसल, 12 मार्च 1930 के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी नमक सत्याग्रह के शुरुआत कइले रहले. 2020 में नमक सत्याग्रह के 91 बरिस पूरा भइल त केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्रालय 75 किलोमीटर के पदयात्रा के आयोजन कइलस. ओही समय एह महोत्सव के रूपरेखा तय करे खातिर गृहमंत्री के अध्यक्षता में एगो राष्ट्रीय क्रियान्वयन समिति बनावल गइल. देश के 75 वीं वर्षगांठ के मतलब 75 साल के सफर पर विचार, 75 साल के उपलब्धियन पर चिंतन, 75 पर एक्शन आ 75 पर संकल्प शामिल बा, जवन स्वतंत्र भारत के सपनन के साकार करे खातिर आगे बढ़े के प्रेरणा दी.

ई उत्सव, महोत्सव, हर घर तिरंगा आ सेल्फ़ी विद तिरंगा के आयोजन लोग के एक-दोसरा से जोड़े खातिर आ आज़ादी के सही मतलब समझे-समझावे खातिर कइल जा रहल बा. आज़ादी के संघर्ष आ लोकतंत्र के महत्व लोग भुलाइल जाता. कहल जाला कि जे आपन इतिहास भुला जाला, ओकर भूगोल बदले लागेला. एकरा के अउर व्यापक अर्थ में, अउर गहराई से समझला के जरूरत बा. दरअसल आज़ादी के संबंध खाली देश से नइखे, हमनी के जीवन से बा. एह से आज़ादी के असली मतलब समझल जरूरी बा. जोश से भरल भोजपुरिया लोग के त अउर समझे के जरूरत बा काहे कि बिना होश के जोश अक्सर गलत दिशा में ले जाला. आखिर आजादी ह का ?

एगो गुलाम आदमी बाहरे से ना, भीतरो से गुलाम होला काहे कि ओकरा मन के भा मन से कुछुओ त होला ना. बलुक साँच कहीं त ओकर मन ओकर रहबे ना करेला. ओकरा त दोसरा के हिसाब से चले के पड़ेला. ठीक ओइसहीं नफरत आ कुंठा भरल मन के हालत होला. नफरत अपना हिसाब से आदमी के चलावेला. प्रेम में मन क्रिएटिव होला…कंस्ट्रक्टिव होला. नफरत में डिस्ट्रक्टिव.

आजादी के मूल में प्रेम बा. देश से प्रेमे रहे कि देश आजाद भइल. फेर से प्रेम पैदा कइल जाय. प्रेम रही त देश सुरक्षित रही. देश प्रगति करी. ना त जाति-पाति, धर्म-सम्प्रदाय, पार्टी-पउआ के दीवार पर नफरत के आग में देश धधकते बा. बात-बात पर रेल के पटरी उखाड़े आ रेल जरावे के काम होते बा. नफरत में आदमी अपनो माथा फोरेला. अपनो घर, अपनो देश फूँक देला.

प्रेम मानवीय गुण ह. नफरत दानवीय. प्रेम से भरल आदमी दोसरा के हृदय परिवर्तन क सकेला. नफरत से भरल आदमी नफरते पैदा करी. जहाँ नफरत रही, उहाँ आजादी रहिये नइखे सकत.

असली आजादी ह अपना के नफरत से मुक्त कइल. असली आजादी ह अपना के निगेटिविटी से मुक्त कइल. काहे कि जवना मन में ई सब रही उ मन उन्मुक्त कइसे रही? आज़ाद कइसे रही? उ त रात-दिन इर्ष्या, द्वेष, साजिश, सियासत आ नकारात्मकता के गुलामी के जंजीर में जकड़ल रही. ऊ जहाँ रही दुर्गंध फइलाई, जहर बोयी त जाहिर बा कि उहाँ खाली तनाव आ अशांतिये रही.

असली आजादी ह अमन हासिल कइल. अमन मन में. अमन समाज में. अमन देश में. जवना घर में दिन रात लड़ाई-झगड़ा होला, कुकुराहट होला, ऊ घर बर्बाद हो जाला. उहाँ कवनो क्रिएटिव काम होइए ना पावे. सभकर दिमाग दोल्हा-पाती में लागल रहेला.

वैचारिक मतभेद संभव बा बाकिर मतभेद के मतलब इर्ष्या, द्वेष, साजिश, लड़ाई ना ह. मतभेद के उदेश्य अल्टरनेटिव के सुझाव ह. विपक्ष के भूमिका सरकार के विरोधे कइल ना ह, बलुक देश के बेहतरी खातिर सरकार के सही निर्णय में साथो दीहल ह.

दरअसल, जेकरा अंदर दया, करुणा आ प्रेम के भाव ना होई, ओकरा ई कुल्ही बुझइबे ना करी. माता-पिता भी कई गो बिंदु पर, कई गो बात पर अपना संतान के विरोध करेलें बाकिर ऊ विरोध बेहतरी खातिर होला. बात बस अतने बा. एही भाव के समझे के बा. जेल भी सुधार खातिर बनल. कोर्ट भी दूनू पक्ष के बात निष्पक्ष होके सुने आ न्याय करे खातिर बनल बाकिर जहाँ-जहाँ करप्शन घूस गइल, उहाँ से नैतिकता गायब हो गइल आ साथ हीं असल आजादी ख़तम हो गइल.

अब देश जाति-पाति, गोल-गुट आ कई गो खेमा में बंट के विरोध करे खातिर विरोध करता. एह में सच्चा आदमी अकेला पड़ जाता. झूठा भा लबरा झूठ के भी अइसे आ एतना गावत बाड़न स कि लोग के झुठवे साँच लागे लागत बा. इहे खतरनाक बा.

दरअसल, आदमी के अंदर आदमीयत ना रही, दया, करुणा आ प्रेम के भाव ना रही त एही तरह के विरोध होई. विरोध करे खातिर विरोध. अइसना में चलनियो हँसेला सूप के जेकरा में सहत्तर गो छेद.

स्वार्थ, नफरत आ अहंकार के चलते देश आ समाज में उथल-पुथल बा. आजाद देश में आम आदमी घुटन महसूस करता. प्रेम, सौहार्द आ मानवता के संचार क के देश के हर नागरिक के आजादी के एहसास करावल जा सकता. प्रेम अंगुलीमाल के बदल देलस. डाकू रत्नाकर के महर्षि बाल्मीकि बना देलस. प्रेम में ह्रदय परिवर्तन के ताकत होला. जेकरा के आपन समझल जाई, ओकरा से प्रेम होखबे करी. कम से कम अपना-अपना ईगो के खोल से बहरी निकल के देश के हर नागरिक के आपन समझल जाय. असल आजादी इहे बा.

विश्व के सामने सीना तान के खड़ा होखे के बा त एक-दूसरा के टाँग खींचे के बजाय एक-दूसरा के हाथ मजबूती से थाम्हे के पड़ी. इहे राष्ट्र हित में बा आ एही खातिर ‘ आज़ादी का अमृत महोत्सव’ आयोजित भइल बा.

( लेखक मनोज भावुक भोजपुरी साहित्य और सिनेमा के जानकार हैं.)

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