नितिन चंद्र की फिल्म मिथिला मखान 2 अक्टूबर को bejod पर होगी रिलीज

नितिन चंद्र की फिल्म मिथिला मखान 2 अक्टूबर को bejod पर होगी रिलीज
मैथिली फिल्म ‘मिथिला मखान.

निर्देशक नितिन चंद्र (Nitin Chandra) ने बताया कि ‘इस फिल्म को बनाना एक बहुत बड़ी चुनौती थी क्योंकि हम टोरंटो की सर्दियों में शूटिंग करना चाहते थे, लेकिन हमें नहीं पता था कि टोरंटो में सर्दियों का मतलब ऐसा होता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 11, 2020, 12:38 AM IST
  • Share this:
मुंबई. मैथिली फिल्म ‘मिथिला मखान (Mithila Makhan)’ के निर्देशक नितिन चंद्र (Nitin Chandra) को इस फिल्म के लिए प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है. इस फिल्म को बनाने के पीछे की पूरी कहानी, इससे जुड़े संघर्ष और राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने तक के सफर को नितिन चंद्र ने हमसे शेयर किया है. उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें इस फिल्म को बनाने का विचार आया और क्या चुनौतियां रहीं? निर्देशक नितिन चंद्र कहते हैं, ‘बिहार में 2008 के बाढ़ में मैं, नेपाल - बिहार बॉर्डर पर एक NGO  के साथ काम कर रहा था और बाढ़ से हुई त्रासदी ने मन में कई कहानियों को जन्म दिया’.  मैंने इस समस्या को समझने के लिए एक डॉक्यूमेंटरी फिल्म बनाई थी.

बाढ़ के बारे में बात करते हुए वे बताते है, मैंने अनुभव किया की बिहार से भारी पलायन होने और ज़मीनी स्तर पर विकास नहीं होने के कई कारण एक साथ मौजूद हैं. सबसे ज़रूरी बात यह है की वहां ज़मीनी स्तर पर कोई आजीविका नहीं थी. उत्तर बिहार में बाढ़ का कहर था और उसके बाद रेत से ढ़की ज़मीन, जिसपर खेती नहीं हो सकती. बिहार के किसान देश के हर हिस्से में मजदूर बनने को मजबूर थे. मेरे मन में यह विचार आया कि आर्थिक रूप से कमज़ोर व्यक्तियों को उनके अपने गांव में नौकरियां कैसे मिले?

संसाधनों की कमी से जूझते रहे डायरेक्टर
मैंने 2011 में कहानी/पटकथा लिखी, धीरे धीरे कहानी विकसित हुई और तीन-चार साल तक इसके लिए पैसे ढूंढता रहा, लेकिन दुर्भाग्य से बिहार में कोई नहीं मिला. शुरूआती काम के लिए नितिन चंद्र का साथ उनकी बहन नीतू चंद्र ने दिया और लोकेशन और कास्टिंग का काम शुरू हुआ. साथ में क्राउड फंडिंग भी शुरू हुई लेकिन ये फिल्म बनाने के लिए नाकाफी था. मैं भाग्यशाली था कि सिंगापुर से समीर कुमार जी साथ आए और कुछ अन्य संसाधनों के साथ मैं फिल्म बना सका.’




आगे बात करते हुए वे कहते हैं, ‘इस फिल्म को बनाना एक बहुत बड़ी चुनौती थी क्योंकि हम टोरंटो की सर्दियों में शूटिंग करना चाहते थे, लेकिन हमें नहीं पता था कि टोरंटो में सर्दियों का मतलब सामान्य दिनों में -35 से लेकर -10 तक का तापमान होता है. हमने किसी तरह टोरंटो की गलियों में और उनके मेट्रो के अंदर गुरिल्ला शूटिंग की. टोरंटो में बीते वो सात दिन मेरे दिमाग में हमेशा छपे रहेंगे. मैं उन सड़कों पर चलता था जहां सड़क के किनारे बर्फ का कीचड़ होता था. मैं कैमरा मैन जस्टिन चेम्बर्स का शुक्रगुज़ार हूं, जिन्होंने फिल्म की शूटिंग की.

नियाग्रा फॉल्स में शूटिंग करना एक अलग अनुभव था
विश्व प्रसिद्घ नियाग्रा फॉल्स में शूटिंग करना एक अलग अनुभव था. हम आगे की शूटिंग के लिए मई के महीने में बिहार पहुंचे तो वहां का तापमान +45 डिग्री था. भीषण गर्मी में 22 दिन शूटिंग चली. इस कहानी में हम लोग जो चाहते थे उससे कोई समझौता नहीं किया.  शूटिंग नेपाल के भी कुछ हिस्सों में हुई थी. बिहार के दरभंगा के अलावा पटना, सहरसा, सुपौल, मधुबनी और कटिहार में शूटिंग हुई. नीतू चंद्र की वजह से फिल्म में हरिहरन, सोनू निगम, सुरेश वाडकर, सब मैथिली में गाने आए. बिहार की भाषाओं में सिनेमा उद्योग खड़ा हो और बिहार की ज़मीं पर ही रोज़गार हो, पिछले दस सालों से लगातार ऐसा करने वाले नितिन चंद्र बिहार के अकेले ऐसे निर्देशक हैं.

फिल्म में मुख्य कलाकार क्रांति प्रकाश झा और अनुरिता झा हैं, नितिन कहते हैं, ‘कास्टिंग फिर से आसान नहीं थी, खासकर हिरोइन के लिए. क्रांति प्रकाश झा ने मेरी पिछली फिल्म देसवा में मेरे साथ काम किया था, इसलिए मैं उन्हें कास्ट करने के लिए शुरू से ही स्पष्ट था. अनुरीता झा ने GOW किया था और वह मैथिली बोलना भी जानती थीं. पंकज झा, जो उस क्षेत्र से आते हैं, निगेटिव लीड के लिए स्वाभाविक पसंद थे.’

मिथिला मखान को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला. उत्साहित नितिन कहते हैं, ‘राष्ट्रीय पुरस्कार एक ऐसी चीज है जिसे हर फिल्म निर्माता लेना चाहेगा.’  यह राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करने का अनुभव बहुत ख़ुशी का था, दरअसल हुआ ये की फिल्म की डीवीडी पहुंचने की आखरी तारीख 15 जनवरी थी. जहां तक नितिन याद करते हैं, लेकिन किसी कारणवश 14 तारीख के रात को फिल्म भेज पाए. नितिन बताते हैं कि, ‘मुझे यकीन नहीं था कि यह पहुंची है या नहीं, लेकिन जब मैंने मार्च में राष्ट्रीय पुरस्कार के परिणामों को सुना, तब मुझे यकीन था कि यह उनके कार्यालय तक पहुंच गई थी और बाकी इतिहास है.’
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज