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भोजपुरी विलेन Sanjay Pandey को पिटता देखा ऐसा होता था बेटी का रिएक्शन, एक बार तो लगी थी चिल्लाने

भोजपुरी एक्टर (Bhojpuri Actor) संजय पांडेय (Sanjay Pandey) ने बताया फिल्मों पिटता देख कैसा होता है परिवार का रिएक्शन.

भोजपुरी एक्टर (Bhojpuri Actor) संजय पांडेय (Sanjay Pandey) ने बताया फिल्मों पिटता देख कैसा होता है परिवार का रिएक्शन.

Sanjay Pandey Story: भोजपुरी एक्टर (Bhojpuri Actor) संजय पांडेय (Sanjay Pandey) इंडस्ट्री के खतरनाक विलेन में से एक हैं. वो 250 से ज्यादा फिल्मों में मार खाने का रोल कर चुके हैं. ऐसे में अब उन्होंने फिल्मों में पिटने पर परिवार का रिएक्शन और बेटी से जुड़ा एक किस्सा सुनाया है. जानें

  • News18Hindi
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    भोजपुरी के खतरनाक विलेन में गिने जाने वाले एक्टर (Bhojpuri Actor) संजय पांडेय (Sanjay Pandey) आज इंडस्ट्री में किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं. फिल्मों में उनके रोल के कारण कभी लोग उन्हें सच में ‘गुंडा’ समझने लगे थे. अब ऐसे में एक्टर हाल ही में इंस्टाग्राम (Sanjay Pandey Instagram) पर लाइव आए और अपने किरदारों को लेकर बात की. इसी बीच उन्होंने बताया कि फिल्मों में पिटता देखकर उनके परिवार का कैसा रिएक्शन होता था. उन्होंने अपनी बेटी से जुड़ा एक किस्सा भी सुनाया.

    फिल्मों में पिटने के सीन को लेकर संजय पांडेय ने बताया कि ‘जब उनकी बेटी रुमझुम छोटी थी तो वो उनकी फिल्में देखा करती थी और जब वो लास्ट में क्लाइमेक्स में मार खाते थे तब वो टीवी बंद कर देती थी. वो अपने पापा को पिटते हुए नहीं देख सकती थी. उसको तब लगता था कि ये असली में सब कुछ हो रहा है.’ इसके साथ ही एक्टर ने बेटी से जुड़ा एक किस्सा भी सुनाया. उन्होंने कहा कि ‘एक बार उनकी वाइफ किचन में काम कर रही थी और उनकी बेटी चिल्ला रही थी कि हां पापा मारो, पापा मारो. मारो मारो मारो… तो उनकी वाइफ को लगा ये किसे कह रही है कि मारो. मैं उस समय हिप्पो को मार था.’

    250 से ज्यादा फिल्मों में खा चुके हैं मार!

    खैर, एक्टर ने एक बार अपने नेगेटिव किरदार को लेकर कहा था कि वो 250 से ज्यादा फिल्मों में मार खाकर थक चुके हैं और अब पॉजिटिव किरदार निभाना चाहते हैं. इसके बाद उन्होंने पिता, भाई और दोस्त जैसे किरदार निभाए, जिसे दर्शकों की ओर से काफी पसंद भी किया गया.

    संजय ने फिल्मों में पिटने वाले सीन को लेकर एक इंटरव्यू में बताया था कि ‘जिस दिन उनका फाइट सीन होता है तो सबसे पहले मंदिर जाते हैं और जब पता चलता है कि फाइट सीन किसी नए एक्टर के साथ है तो वो भगवान को झुक कर प्रणाम करते हैं.’

    नए एक्टर के साथ फाइट सीन शूट करने को लेकर संजय ने बताया था कि ‘वो पहले कॉन्फिडेंट हो जाते हैं कि वो कैसा लड़ रहा है तभी संजय सीन को शूट के लिए जाते हैं. क्योंकि वो कई बार घायल हो चुके हैं.’

    2001 में की पहली भोजपुरी फिल्म

    संजय पांडेय (Sanjay Pandey Career) आजमगढ़ जिले के कम्हरिया गांव के रहने वाले हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत थिएटर से की थी और बाद में फिल्मों का रुख किया था. उनकी पहली भोजपुरी फिल्म ‘कहिया डोली लेके अइबा’ थी, जिसे 2001 में रिलीज किया गया था. इसे डायरेक्टर राजकुमार आर पांडेय ने निर्देशित की थी. ये दोनों की ही डेब्यू फिल्म थी.

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