कितना भी 'पत्‍थर दिल इंसान' हो, इन 10 फिल्मों को देखने के बाद शर्तिया रो पड़ेगा

‌फिल्में कई बार दर्शकों का दिल छूती हैं. कई हंसने तो कई बार सोचने पर मजबूर कर देती हैं. लेकिन फिल्मों का एक जॉनर ऐसा है, जिसका कोई नाम नहीं है, लेकिन दिल के सबसे गहरे यही उतरती हैं. जानिए उन फिल्मों के बारे में जिन्होंने रुला दिया.

News18Hindi
Updated: September 7, 2019, 11:03 PM IST
कितना भी 'पत्‍थर दिल इंसान' हो, इन 10 फिल्मों को देखने के बाद शर्तिया रो पड़ेगा
उड़ान ने काफी लोगों के दिलों को छू लिया था.
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Updated: September 7, 2019, 11:03 PM IST
फिल्मों के चयन को लेकर बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान (Aamir Khan) कहते हैं कि जब मैं कहानी सुन रहा होता हूं तो इस बात खयाल रखता हूं कि इसने कितनी बार मेरे दिल को छूआ. आमिर खान ने 'लगान' के बारे में बताया कि जब आशुतोष गोवारिकर उन्हें कहानी सुना रहे थे तो वे कई बार रो दिए. जब पूरी फिल्म खत्म हुई तो उनकी आंखों में आंसू भरे थे. ये आमिर खान की एक निजी कहानी थी. हर शख्स के रोने-हंसने के अपने पैमाने होते हैं. कई बार आम सी बात रोना आ जाता है और कई बार बड़ी घटनाओं पर आंसू नहीं छलकते. लेकिन इसके बाद भी हिन्दी सिनेमा में कुछ ऐसी फिल्में बनी हैं, जो दिल की गहराई में उतरती हैं, मनोभावों को छूती हैं और पत्‍थर दिल इंसान के भी आंसू टपक जाते हैं.

1. दर्द का रिश्ता
3 मई, 1981 को नरग‌िस दत्त की कैंसर से मौत हो गई थी. इसके बाद सुनील दत्त ने एक फिल्म बनाई 'दर्द का रिश्ता'. यह फिल्म 1982 में रिलीज हुई थी. बताते हैं कि इस फिल्म के जरिए सुनील दत्त में अपनी असल जिंदगी के बेताहाशा दर्द को पर्दे पर उतार दिया था. इस फिल्म में सुनील के साथ स्‍मिता पाटिल और रीना रॉय ने काम किया था. इस फिल्म में सुनील दत्त की 11 साल की बेटी को ल्यूकेमिया (कैंसर) होता है.

फिल्म का पोस्टर


2. मदर इंडिया
महबूब खान की 14 फरवरी 1957 को आई फिल्म मदर इं‌डिया के दो हिस्से हैं. पहले हिस्से में नरगिस और उनके पति का किरदार निभा रहे राजकुमार कहानी है. पति के घर छोड़ जाने के बाद एक अबला मां की भी कहानी है, तीन दुधमुहे बच्चों के पास खाने को कुछ नहीं है. छोटा बच्चा बुखार से तप रहा है. मझला बच्चा भूख के मारे मिट्टी खाने को मजबूर है. इस असहायपन को नरगिस इस तरह से पर्दे पर उतारती हैं और जिस स्थिति में वो लाला के पास खुद की अस्‍मिता का सौदा करने चली जाती हैं, यह सीन दिल छू जाता है. हालांकि आगे फिल्म और ज्यादा मार्मिक हो जाती है, जब अपने जिगर के टुकड़े (बिरजू, सुनील दत्त) को मां गोली मार देती है.

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फिल्‍म का एक दृश्य

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3. आनंद
हृषिकेश मुखर्जी की 12 मार्च 1971 को आई फिल्म आनंद को आज भी जो देखता है उसकी आंखें भर आती हैं. यह कहानी एक आनंद (राकेश खन्ना) की थी, जो एक कैंसर का मरीज था. वह जैसे मौत के करीब जा रहा है वैसे और ज्यादा जिंदादिल बनता जा रहा है था. लेकिन जब उसका डॉक्टर बॉबू मोशॉय भास्कर (अमिताभ बच्चन) उसके साथ संवाद करता है तो फिल्म दर्शकों के दिल में उतर जाती है.

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फिल्म का एक दृश्य


4. तारे जमी पर
आमिर खान और अमूल गुप्ते की 21 दिसंबर 2007 आई ये सामाजिक कारणों से फिल्म मानसिक तौर पर परेशान बच्चों के मनोभाव पर आधारित थी. इसी तरह के एक बच्चे दर्श‌िल सफारी ने इतने संजीदा तरीके से पर्दे जिया कि जब क्लाइमेक्स में वे एक प्रदर्शनी प्रतियोगिता में भाग लेने पहुंचते हैं तो फिल्म देख रहे दर्शकों के आंखें भर आती हैं. क्योंकि इससे पहले का पूरा दृश्य बेहद मार्मिक था.

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फिल्म का एक दृश्य.


5. ब्लैक
संजय लीला भंसाली की साल 2005 में आई एक अंधी और बहरी लड़की पर आधारित ये फिल्‍म मनोभावों और भावावेग के चरम पर ले जाती है. इसमें इस लड़की के किरदार को रानी मुखर्जी ने पर्दे पर जीवंत कर दिया है. जबकि उनके गुरु के किरदार में अमिताभ बच्चन ने जान फूंक दी है. फिल्म के हिस्से में लड़की को अपने गुरु से प्यार हो जाता है. एक स्पेशल चाइल्ड को जब प्यार हो जाए उसके बाद के भावाद्वंद को पर्दे पर देखकर कहानी दिल में उतर जाती है.

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फिल्म का एक दृश्य.


6. कल हो ना हो
अगर किसी फिल्म में मुख्य अभिनेता मौत की कगार पर खड़ा हो और तिल-तिल मौत के करीब जा रहा हो, सब उसे देख रहे हों, वो खुद भी इस बात को एहसास कर रहा हो और इसके बावजूद सबकी खुशी का खयाल रखे, अपनी प्रेमिका को जानबूझ कर एक ऐसे शख्स के करीब कर दे, जो उसे प्यार करता है, तो ऐसी फिल्में एक खास पीढ़ी के लोगों को रुला देती हैं.

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फिल्म का एक लुक.


प्रीटि जिंटा, शाहरुख खान और सैफ अली खान अभिनीत निखिल आडवाणी की फिल्म 'कल हो ना हो (28 नवंबर 2003)' एक ऐसी ही फिल्म थी.

7. सदमा
बालू महेंद्र की उन्हीं की तमिल फिल्म 'मुंद्रम पिरई' के हिन्दी संस्करण को साल 1983 में बनाया. कमल हासन और श्रीदेवी ने इस फिल्म से प्यार की एक नई परिभाषा लिख दी थी. क्लाइमेक्स में श्रीदेवी के किरदार की मौत का दृश्य और उस वक्त कमल हासन का छटपटाना कई लोगों की आंखों में आंसू ला देता है.

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सदमा का पोस्टर


8. उड़ान
विक्रमादित्य मोटवानी की साल 2010 में रिलीज हुई फिल्म 'उड़ान' एक जल्लाद पिता और उसके दो बेटों की कहानी है. क्रूर पिता के किरादार में रोनित राय ने जान फूंक दी है. उड़ान फिल्म के बाद कई बच्चों को रोनित से नफरत हो गई थी, ऐसे बयान फिल्म की कास्ट ने कई बार दिए. उसी के उलट 'रजत बारमेचा' ने एक किशोर बेटे के किरदार को पर्दे पर ऐसा उतारा कि कइयों के फेवरेट बन गए. फिल्म के एक दृश्‍य में बड़ा बेटा अपने छोटे भाई से पीठ दिखाने के लिए कहता है, छोटा भाई मना कर देता है, जब जबरन बड़ा भाई छोटे भाई की पीठ देखता है तो उसपर लाल-सुर्ख बेल्ट के निशान पड़े होते हैं. इस दृश्य को निर्देशक ने इतनी बारीकी से उतारा था कि किसी का भी कलेजा भर आए. बच्चों के साथ होने वाली बरबरता अक्सर लोगों के आंखों में आंसू भर देते हैं.

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उड़ान का एक दृश्य


9. ऑक्टोबर
सुजीत सरकार की 13 अप्रैल 2018 को रिलीज हुई फिल्म 'ऑक्टरोबर' युवा पीढ़ि के कितने ही दर्शकों को रोने पर मजबूर कर दिया. यह कहानी डैन (वरुण धवन) और शिवली (बनीता संधू) की थी. एक हादसे में शिवली बुरी तरह से घायल हो जाती है और उससे नफरत करने वाला डैन महज इस लिए सबकुछ छोड़कर उसको फिर से ठीक करने में लग जाता है क्योंकि आखिरी हादसे से पहले आखिरी बार शिवली ने उसी का नाम लिया होता है. कहानी एक बार फिर से दर्शकों का दिल टटोलती है जब शिवली ठीक होने लगती है और डैन के सामने अपने प्यार का इजहार कर ही रही होती है कि एक बार फिर से उसे अटैक आते हैं. आखिरकार वो डैन को छोड़कर चली जाती है.

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फिल्म का एक दृश्य.


10. आशिकी 2
साल 2013 में रिलीज हुई मोहित सुरी की एक म्यूजिक ड्रामा फिल्म ने ग्लैमर जगत के लोगों के भीतर के खोखलेपन को पर्दे पर उकेरा था. एक स्टार सितारे की जिंदगी कितनी खोखली है. उसके जीवन में शराब के अलावा कोई और मकसद नहीं है. एक नादान सी लड़की को बार में देखने के बाद उसे स्टार बनाने की ठान लेता है. लेकिन जब लड़की स्टार बन जाती है तो खुद को ही उसका सबसे बड़ा दुश्मन बनते पाता है. एक समय के बाद वो अपने प्यार के लिए जान दे देता है. इस लड़के (आदित्य रॉय कपूर) और इस लड़की (श्रद्धा कपूर) की कहानी ने काफी लोगों के दिलों को छू लिया था.

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फिल्म का एक दृश्य


इस लिस्ट में 'हाईवे, लाल दुपट्टा मल-मल का, तेरे संग' से लेकर 'आवारापन' और 'जन्नत' जैसी फिल्में भी शामिल की जा सकती हैं. लेकिन ऊपर लिखी 10 फिल्मों को लेकर कई लोग एकमत हैं कि इन फिल्मों ने दिल छू लिया था.

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First published: September 7, 2019, 8:11 PM IST
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