अलविदा श्रीदेवी: जीवन की उजास में वह चांदनी अकेली थी..!

श्री देवी स्मृति शेष : जीवन की उजास में वह चांदनी अकेली थी..!

श्री देवी स्मृति शेष : जीवन की उजास में वह चांदनी अकेली थी..!

अभिनेत्री श्रीदेवी ऊर्फ अम्मा यंगर अय्यप्पन के निधन की सूचना पीढ़ियों के लिए व्यक्तिगत क्षति की तरह है. मीडिया और सोशल मीडिया में ये पीढ़ियां जुदाई का एक ऐसा शोक गीत रचते दिख रही हैं, जिसका राग दशकों तक फैला हुआ है. अनंत गूंज जो सुदूर एकांत के कोनों में भी गूंजती रहेगी.

  • Last Updated: February 25, 2018, 1:40 PM IST
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चांदनी अपने ही अंतस में सिमटने के लिए होती है. जीवन का हर लम्हा समय के विराट उत्सव का टुकड़ा होता है. 'श्री' अनंत की कीर्ति है, विस्तार है. यश के स्थायीत्व की दीर्घ पताका. फिर चाहे वह अम्मा यंगर अय्यप्पन में लगी हो या किसी देवी में.

अभिनेत्री श्रीदेवी ऊर्फ अम्मा यंगर अय्यप्पन के निधन की सूचना पीढ़ियों के लिए व्यक्तिगत क्षति की तरह है. मीडिया और सोशल मीडिया में ये पीढ़ियां जुदाई का एक ऐसा शोक गीत रचते दिख रही हैं, जिसका राग दशकों तक फैला हुआ है. अनंत गूंज जो सुदूर एकांत के कोनों में भी गूंजती रहेगी.

श्रीदेवी का जाना एक मोहक और सुंदर स्मृतियों का मिट जाना है.



श्रीदेवी घटनाओं के बीच स्थिर पथ पर चलते रहना का जीवन रहीं. कैमरे की चुलबुलाहट मन के किसी कोने का प्रतिबिंब रही. जीवन में जिसे आकार दिया वह वैसी आकृति थी नहीं जो कल्पना में थीं. सबकुछ वैसा रहा जो अप्रत्याशित था. उम्मीद को मुरझाने वाला.
शनिवार रात दुबई में दिल का दौरा पड़ने से श्रीदेवी का निधन हो गया.


फिल्मी दुनिया को करीब से जानने वाले बताते हैं कि जीवन का एक सन्नाटा श्रीदेवी के चेहरे पर ऐसी छाया की तरह तैरता रहा जो कैमरे में दिखाई देने वाली रौशनी से कोसों दूर थी.

मेरे मित्र ने एक बार कहा था कि वे मुंबई के एक होटल में अकेली लंच करती दिखाईं दीं थीं. उतनी ही अकेली जितना कि अकेलापन मुझे इस सूचना ने दिया. कारण कई होंगे, लेकिन उसकी निपटता मुझे लंबे समय तक सालती रही. अनूभूति के स्तर पर और जीवन के स्तर पर भी.

कैमेरे पर फिल्म ENगLISH VINGLIश और मॉम के भीतर की श्रीदेवी उस स्त्री की तरह दिखाई दी, जिसकी यात्रा रौशनी से चलकर अंधेरे में पहुंची, थमी, रुकी और फिर एक दिन जब चली तो वह स्त्री वह नहीं थी, जिसके पदचिह्न कभी स्मृतियों में अंकित होने वाले थे.

कैमरा जीवन की भव्यता और उत्सव का प्रतिबंब तलाशता है, और आंखें उस सूनेपन का झेरॉक्स होती हैं जिसे कम ही लोग पहचानते हैं. चांदनी मैंने कैमरे पर तुम्हें नहीं तुम्हारे उस अकेलेपन को देखा जो जीवन की उजास में अकेली थी..!

श्रीदेवी स्मृति शेष : 13 अगस्त 1963 से 25 फरवरी 2018.
श्रीदेवी स्मृति शेष : 13 अगस्त 1963 से 25 फरवरी 2018.


श्रीदेवी तुम स्मृतियों के बीच एक विराट स्मृति हो. गांव, कस्बे, शहर और महानगरों में धड़कती. एक उत्सव गीत और जीवन की सांझ का गान, जिसे ब्लैक एंड व्हाइट टीवी से रंगीन हो चुके दौर में हमेशा गुनगुनाया जाएगा.

एक लम्हा जो इस विराट समय का सबसे चमकता हुआ टुकड़ा होगा.

वो लम्हें, ये पल हम बरसों याद रखेंगे
ये मौसम चले गए तो हम फरियाद करेंगे

इन सपनों की तस्वीरों से, इन यादों की जंजीरों से
अपने दिल से कैसे आजाद करेंगे

ये मौसम चले गए तो हम फरियाद करेंगे
ये लम्हें तो हैं बहुत हंसी, इन लम्हों पर कुछ लिखा नहीं

ये आबाद करेंगे या बर्बाद करेंगे
ये मौसम चले गए तो हम फरियाद करेंगे

मेरी प्रिय अभिनेत्री इस जुदाई के लिए क्या कहूं कि तुम मेरा एक आभासीय प्रेम रहीं, जो आज जीवन के यथार्थ में प्रवेश कर गया. हमेशा-हमेशा के लिए, कभी नहीं लौटने के लिए.

बहुत कुछ है तुम्हारे बारे में, तुम्हारी फिल्मों के बारे में, जीवन सफर के बारे में. घटनाएं, किरदार और वह सबकुछ जो कभी कोई नहीं जान पाया और तुम्हारे अकेलेपन के साथ ही चला गया.

फिलहाल इतना ही कि श्रीदेवी तुम एक स्मृति बेल हो जो इस देश के हर व्यक्ति में ता उम्र हरी-भरी रहेगी.

अलविदा..!
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