अध्ययन सुमन बोले- बॉलीवुड में हुआ ग्रुपिज्म का शिकार, मुझे 14 फिल्मों से निकाला गया

अध्ययन सुमन बोले- बॉलीवुड में हुआ ग्रुपिज्म का शिकार, मुझे 14 फिल्मों से निकाला गया
अपने पिता शेखर सुमन के साथ अध्ययन सुमन.

अध्ययन सुमन (Adhyayan Suman) ने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में मौजूद ग्रुपिज्म (Groupism), कैंप्स और उन प्रोडक्शन हाउस के खिलाफ लड़िए, जो टैलेंटेड एक्टर्स को अपनी जगह नहीं बनाने देते हैं.’ मेरे पास 9 साल तक काम नहीं था और इन सालों में किसी ने मेरा फोन तक नहीं उठाया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: July 11, 2020, 11:15 AM IST
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एक्टर सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) के असामयिक निधन के बाद बॉलीवुड में नेपोटिज्म (Nepotism) पर अब तक की सबसे तीखी बहस जारी है. इस बहस में बॉलीवुड के कई कलाकार अपनी बात रख चुके हैं. इस बहस में पहली बार शेखर सुमन के बेटे अध्ययन सुमन (Adhyayan Suman) ने भी अपनी बात रखी है. उनका कहना है कि फिल्म इंडस्ट्री में नेपोटिज्म (Nepotism) नहीं, बल्कि ग्रुपिज्म (Groupism) बड़ी समस्या है. बॉलीवुड में ग्रुपिज्म लंबे समय से चल रहा है, लेकिन किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया. उन्होंने कहा कि ग्रुपिज्म के कारण उन्हें 14 फिल्मों से बाहर कर दिया गया.

सुमन ने कहा, ‘इंडस्ट्री में सालों से पावर डायनैमिक्स और ग्रुपिज्म है. इसके कारण मुझे 14 फिल्मों से निकाला गया. मेरी फिल्मों के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन को गलत तरीके से दिखाया गया. दुर्भाग्य की बात है कि इन सब चीजों के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए सुशांत सिंह राजपूत को सुसाइड जैसा आत्मघाती कदम उठाना पड़ा.’

ग्रुपिज्म, कैंप्स और उन प्रोडक्शन हाउस के खिलाफ लड़िए
बॉलीवुड बबल को दिए इंटरव्यू में अध्ययन सुमन ने कहा कि, ‘बॉलीवुड में पावरफुल कैंप्स टैलेंटेड एक्टर्स को आगे नहीं बढ़ने देते हैं. उन्होंने कहा, लोग नेपोटिज्म के खिलाफ बोल और लड़ रहे हैं. नेपोटिज्म के बजाय इंडस्ट्री में मौजूद ग्रुपिज्म, कैंप्स और उन प्रोडक्शन हाउस के खिलाफ लड़िए, जो टैलेंटेड एक्टर्स को अपनी जगह नहीं बनाने देते हैं.’
ऑडियंस करती है नेपोटिज्म फैलाने वालों का सपोर्ट


इससे पहले अध्ययन सुमन ने एक इंटरव्यू में कहा था कि स्टार किड होते हुए काम न मिलना बहुत डिप्रेसिंग होता है. इसके लिए केवल एक स्टार या एक्टर को ब्लेम नहीं करना चाहिए, ऑडियंस भी इसमें शामिल होती है क्योंकि ऑडियंस नेपोटिज्म फैलाने वालों का सपोर्ट करती है. ऑडियंस के सपोर्ट के दम पर ये लोग बड़े बनते हैं और माफिया गैंग चलाने लगते हैं.

सुमन ने आगे कहा कि, मैं खुद इस गैंग का कहीं न कहीं हिस्सा रहा हूं. हालांकि, मैं उस व्यक्ति का नाम नहीं लेना चाहता. हां, वह मुझसे मिला अपना पर्सनल नंबर भी दिया. लेकिन उसने मेरे फोन का आज तक जवाब नहीं दिया. मेरे पास 9 साल तक फिल्मों में काम नहीं था और इन सालों में किसी ने मेरा फोन नहीं उठाया. 2011 से 2015 तक मैं डिप्रेशन से जूझ रहा था.
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