नाम वही है लेकिन ये फिल्म नसीरुद्दीन शाह की फिल्म जैसी नहीं है!

सौमित्र रानाडे की फिल्म में बदला हुआ भारत दिखता है जिसे करप्शन ने डस लिया है.

News18Hindi
Updated: April 13, 2019, 4:59 PM IST
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Updated: April 13, 2019, 4:59 PM IST
1980 में सईद मिर्ज़ा ने जब ‘एल्बर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है?’ बनाई थी तो किसी को नहीं लगा था कि वो फिल्म भारतीय सिनेमा के इतिहास में दर्ज हो जाएगी. जिसके बाद अब सिनेमा के पर्दे पर एक बार फिर वही गुस्सैल एल्बर्ट लौट आया है. फिल्म का नाम वही है 'एल्बर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है?' लेकिन सौमित्र रानाडे की ये फिल्म पुरानी फिल्म से कई मायनों में अलग है और इसे रीमेक कहा जाना गलत होगा. हाल ही में फिल्म को लेकर एक्टर मानव कौल और अभिनेत्री नंदिता दास ने न्यूज़18 से ख़ास बातचीत की. जहां उन्होंने बताया कि फिल्म कितने मायनों में नसीरुद्दीन शाह  की फिल्म से अलग है.

इन दोनों फिल्मों की थीम एक जैसी है, जैसे ये एक आम आदमी के गुस्से को दिखाती है. सौमित्र का एल्बर्ट, जिसका रोल मानव कौल ने निभाया है, एक नौजवान है जिसका खून गर्म है. अपने पिता को एक झूठे गबन के इल्जाम में फंसते देख बौखला जाता है. जहां सईद की फिल्म मार्क्सवाद और पूंजीवाद के बीच की खाई को दिखाती थी.



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सौमित्र की फिल्म में बदला हुआ भारत दिखता है जिसे करप्शन ने डस लिया है. फिल्म में नंदिता दास का भी खास किरदार है.

एल्बर्ट एक सुपारी किलर नायर (सौरभ शुक्ला) के साथ एक खतरनाक मिशन पर गोआ निकल जाता है और इस दौरान नंदिता दास के रुप लगातार बदलते रहते हैं. क्यों और किसलिए, ये जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी.

हालांकि इतना कहा जा सकता है कि इस फिल्म के रिलीज़ का इससे अच्छा समय कोई हो ही नहीं सकता था. उससे पहले देखिये न्यूज़ 18 के साथ मानव कौल और नंदिता दास की ये ख़ास बातचीत का वीडियो...

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