अमिताभ बच्चन ने COVID-19 पीड़ितों के लिए मुंबई में शुरू किया 25 बेडों का अस्पताल

अमिताभ बढ़-चढ़कर कोरोना पीड़ितों की मदद कर रहे हैं (फोटो साभारः Instagram@viralbhayani@amitabhbachchan)

अमिताभ बढ़-चढ़कर कोरोना पीड़ितों की मदद कर रहे हैं (फोटो साभारः Instagram@viralbhayani@amitabhbachchan)

अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) ने मुंबई के जुहू में एक 25 बेडों का अस्पताल शुरू किया है, जहां ऑक्सीजन की पूरी सुविधा है. इससे पहले अमिताभ ने दिल्ली के एक कोविड केयर सेंटर को 2 करोड़ रुपये की मदद पहुंचाई थी.

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नई दिल्लीः सदी के महानायक अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) और उनकी फिल्म 'चेहरे' (Chehre) के निर्माता आनंद पंडित (Anand Pandit) फिर एक साथ आए हैं, लेकिन इस बार वे किसी फिल्म के चलते नहीं, बल्कि कोरोना (Covid-19) से पीड़ित लोगों की मदद करने के लिए आए हैं. उन्होंने महामारी के चलते अपनी अगली फिल्म 'चेहरे' (Chehre) की रिलीज डेट को भी आगे के लिए टाल दिया है. इससे उनका पूरा ध्यान लोगों की मदद करने में लग गया है. अमिताभ और आनंद ने मुंबई के जुहू में एक 25 बेड का अस्पताल शुरू किया है, जिसमें ऑक्सीजन की पूरी व्यवस्था है.

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो कल यानी बुधवार से अस्पताल में कोरोना पीड़ितों की भर्ती शुरू हो जाएगी. अभी अस्पताल में 25 मरीजों के इलाज की क्षमता है, जिसे आगे जरूरत पड़ने पर बढ़ाया भी जा सकता है. हर एक बैड के साथ ऑक्सीजन सिलेंडर और कंसंट्रेटर की व्यवस्था है. स्टार फोटोग्राफर विरल भयानी ने भी अपनी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिये, अमिताभ के काम की तारीफ की है. उन्होंने जानकारी देते हुए कहा है, 'यह देखना वाकई में काफी राहत पहुंचा रहा है कि तमाम बॉलीवुड सेलेब्स इस मुश्किल वक्त में लोगों की मदद कर रहे हैं.'

(फोटो साभारः Instagram@viralbhayani)

अमिताभ ने पूरा ध्यान रखा है कि अस्पताल में भर्ती सभी मरीजों को मुफ्त में अच्छा खाना मिले. इसके अलावा, अस्पताल में फिजियोथैरेपी और मेंटल हेल्थ काउंसलिंग की सुविधा भी दी गई है. बता दें कि अमिताभ ने इससे पहले दिल्ली के रकाबगंज गुरुद्वारे में चल रहे कोविड केयर सेंटर को 2 करोड़ रुपये की मदद पहुंचाई थी. एक्टर ने खुद इसकी जानकारी दी थी, लेकिन इसमें उनकी मंशा खुद की प्रशंसा करना नहीं था. उन्होंने कहा था, 'मैंने अपने कामों का विवरण प्रशंसा पाने के लिए नहीं दिया है. यह इसलिए है, ताकि लोगों को यह पता चल सके कि इन सभी चीजों का इस्तेमाल कहां और कैसे हो रहा है, जिससे हम फ्रॉड से बच सकें. ये बस झूठे वादे नहीं हैं.'

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