अमिताभ बच्चन ने ठुकरा दी थी राजनीति में आने की पेशकश, सोनिया गांधी को लेकर दिया था सधा हुआ जवाब

अमिताभ बच्चन ने ठुकरा दी थी चुनाव लड़ने की पेशकश. (Photo Credits :amitabhbachchan/Instagam /Network 18)

अमिताभ बच्चन ने ठुकरा दी थी चुनाव लड़ने की पेशकश. (Photo Credits :amitabhbachchan/Instagam /Network 18)

अमिताभ बच्चन (Amitabh bachchan) ने एक बार कांग्रेस (Congress) के प्रस्ताव को ठुकराते हुए कहा था, ‘मेरी आदत है कि मैं जो भी जिम्मेदारी लेता हूं, उसमें पूरी तरह रच-बस जाता हूं और हर कीमत पर उसे पूरी करने की कोशिश करता हूं’.

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  • Last Updated: April 22, 2021, 6:24 AM IST
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मुंबई. बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन (Amitabh bachchan) और देश के भूतपूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) की दोस्ती किसी से छिपी नहीं है. राजीव और अमिताभ हमेशा एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े रहे. अपनी मां और देश की पीएम इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी ने अपने करीबी लोगों पर भरोसा किया, अमिताभ उनमें से एक थे. राजीव ही अमिताभ को राजनीति के गलियारों में लेकर आए.

राजीव गांधी ने अमिताभ बच्चन को 1984 में उत्तर प्रदेश की इलाहाबाद सीट से लोकसभा का चुनाव लड़वाया. उतर प्रदेश के सीएम रहे हेमवती नंदन बहुगुणा को हराकर अमिताभ संसद में पहुंचे थे. दिग्गज नेता रहें बहुगुणा को हरा पाना आसान नहीं था लेकिन अमिताभ ने ये कर दिखाया था. हालांकि अमिताभ ने संसद में अपना कार्यकाल पूरा किए बिना ही 3 साल के अंदर राजनीति छोड़ दी थी.

अमिताभ बच्चन भले ही राजनीति से अलग होकर फिल्मी दुनिया में वापस आ गए, लेकिन राजीव गांधी से उनकी दोस्ती अटूट रही. साल 1991 में जब राजीव गांधी की हत्या हुई तब अमिताभ बच्चन लंदन में थे. राजीव की हत्या की खबर सुनकर वे सदमे में आ गए थे. तुरंत लंदन से दिल्ली पहुंचे और प्रियंका गांधी के साथ मिलकर अंतिम संस्कार की सारी जिम्मेदारी भी उठाई.

राजीव गांधी की हत्या के साल भर बाद जब चुनाव हुए तब कांग्रेस चाहती थी कि अमिताभ, सोनिया गांधी की मदद के लिए दोबारा राजनीति ज्वाइन करें. अमिताभ एक तो राजीव के करीबी होने की वजह से काफी कुछ जानते भी थे, दूसरे सोनिया को भी अच्छे से समझते थे.
वरिष्ठ पत्रकार और लेखक रशीद किदवई अपनी किताब ‘नेता-अभिनेता: बॉलीवुड स्टार पावर इन इंडियन पॉलिटिक्स’ में सुमंत मिश्रा की किताब के हवाले से लिखते हैं कि अमिताभ ने इस प्रस्ताव को ठुकराते हुए बेहद सधा जवाब दिया था. किताब के हवाले से मानें तो अमिताभ ने कहा था  ‘मेरी आदत है कि मैं जो भी जिम्मेदारी लेता हूं उसमें पूरी तरह रच-बस जाता हूं और हर कीमत पर उसे पूरी करने की कोशिश करता हूं. राजीव मेरे अच्छे दोस्त थे. यह भी सच है कि मैं सोनिया जी का शुभचिंतक हूं और उनके परिवार के करीब हूं. लेकिन मेरे राजनीति में आने से उनका दर्द आखिर कैसे कम होगा? वह खुद मजबूत, समझदार और सक्षम हैं. उन्हें पता है कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए.’
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