'बालिका वधू' के डायरेक्टर को सब्जी बेचते देख इमोशनल हुए अनूप सोनी, कहा- हमारी टीम उनकी मदद करेगी

आजमगढ़ शहर के हरबंशपुर में डीएम आवास के आसपास सड़क के किनारे ठेले पर सब्जी बेच रहे हैं रामवृक्ष गौर (तस्वीर- अभिषेक उपाध्याय, न्यूज 18 हिंदी)
आजमगढ़ शहर के हरबंशपुर में डीएम आवास के आसपास सड़क के किनारे ठेले पर सब्जी बेच रहे हैं रामवृक्ष गौर (तस्वीर- अभिषेक उपाध्याय, न्यूज 18 हिंदी)

आर्थिक तंगी के कारण टीवी सीरियल 'बालिका वधू' (Balika Vadhu) के असिस्टेंट डायरेक्टर रामवृक्ष गौर (Rambriksh Gaur) फुटपाथ पर सब्जी का ठेला लगा रहे हैं. उन्हें परेशान देख 'बालिका वधू' शो का हिस्सा रह चुके एक्टर अनूप सोनी (Anup Soni) ने मदद करने की इच्छा जताई है.

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  • Last Updated: September 29, 2020, 7:43 PM IST
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मुंबई. एक शख्स जिसने 'बालिका वधू', 'कुछ तो लोग कहेंगे' जैसे टीवी सीरियल के जरिए कुरीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद की. यशपाल शर्मा, मिलिंद गुणाजी, राजपाल यादव, रणदीप हुडा, सुनील शेट्टी जैसे बड़े कलाकारों की फिल्म में बतौर सहायक निर्देशक काम किया, आज वह दो वक्त की रोटी का मोहताज है. हम बात कर रहे हैं रामवृक्ष गौर की. दरअसल, आर्थिक तंगी के कारण टीवी सीरियल 'बालिका वधू' (Balika Vadhu) के असिस्टेंट डायरेक्टर रामवृक्ष गौर (Rambriksh Gaur) यूपी के आजमगढ़ में फुटपाथ पर सब्जी का ठेला लगा रहे हैं. उन्हें परेशान देख 'बालिका वधू' शो का हिस्सा रह चुके एक्टर अनूप सोनी (Anup Soni) ने मदद करने की इच्छा जताई है.

अनूप सोनी ने ट्विटर पर लिखा, ''ये दुखद है.. हमारी बालिका वधू की टीम को इस बारे में जानकारी मिली है और हम इनसे संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं.''


आजमगढ़ में सब्जी बेच रहे रामवृक्ष ने बताया कि मुंबई में उनका अपना मकान है लेकिन दो साल पहले बीमारी के कारण उनका परिवार घर आ गया था. कुछ दिन पूर्व एक फिल्म की रेकी के लिए वो आजमगढ़ आए. वो काम कर ही रहे थे कि कोरोना संक्रमण के चलते लाकडाउन लग गया. इसके बाद उनकी वापसी संभव नहीं हो पायी. काम बंद हुआ तो आर्थिक संकट खड़ा हो गया. प्रोड्यूसर से बात की तो उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट पर एक से डेढ़ साल बाद ही काम शुरू हो पाएगा.



फिर उन्होंने अपने पिता के कारोबार को अपनाने का फैसला किया और आजमगढ़ शहर के हरबंशपुर में डीएम आवास के आसपास सड़क के किनारे ठेले पर सब्जी बेचने लगे. इससे परिवार आसानी से चल जा रहा है. चूंकि बचपन में भी वे अपने पिता के साथ सब्जी के कारोबार में मदद करते थे. इसलिए यह काम उन्हें सबसे बेहतर लगा. वो अपने काम से संतुष्ट हैं.
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