मां के पर्स से 100 रुपये चुराकर चंडीगढ़ भागे थे अनुपम खेर

अनुपम खेर का लंबा फिल्मी सफर काफी उतार चढ़ाव से भरा रहा. इस सफर में कभी उन्होंने मुश्किल दिन देखे तो कभी शोहरत की ऊंचाइयां देखीं.

News18Hindi
Updated: July 16, 2019, 12:43 PM IST
मां के पर्स से 100 रुपये चुराकर चंडीगढ़ भागे थे अनुपम खेर
बॉलीवुड एक्टर अनुपम खेर और शाहरुख खान.
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Updated: July 16, 2019, 12:43 PM IST
बॉलीवुड एक्टर अनुपम खेर करीब 500 से ज्यादा फिल्में कर चुके हैं. उनका ये लंबा फिल्मी सफर काफी उतार चढाव से भरा रहा. इस सफर में कभी उन्होंने मुश्किल दिन देखे तो कभी शोहरत की ऊंचाइयां देखीं. ये सफर बिल्कुल भी आसान और मखमली राहों से भरा नहीं था. इस रास्ते में उन्होंने तमाम परेशानियों का सामना किया है. हाल में ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे से खास बातचीत में अनुपम खेर ने अपने उन दिनों की बात की. अनुपम ने बताया कि किस तरह एक्टिंग में उनकी रुचि जागी.

उन्होंने कहा, ''एक्टर बनने का खयाल स्कूल के दिनों में आया. उस वक्त मैं 9वीं में पढ़ता था. मुझे स्कूल में एक नाटक में रोल मिला. लेकिन मैं अपनी लाइंस ठीक से नहीं बोल पा रहा था तो वो लाइनें किसी और को दे दी गईं. लेकिन स्टेज पर वह बच्चा भूल गया कि उसे मेरी लाइंस दे दी गई हैं. वह बार-बार मुझे कहने को इशारे करने लगा. मैं अपनी टूटी फूटी अंग्रेजी में उसे बताने लगा कि टीचर ने लाइन उसे दी है. लेकिन वह समझा नहीं और मुझे बोलने को कहने लगा. फिर जब मैंने बोलना शुरू किया तो ऑडियंस का हंस हंस कर बुला हाल था.''



अनुपम को स्टेज तब से ही भा गया था. उन्होंने बताया, ''मैंने एक कोर्स का इश्तहार देखा. यह चंडीगढ़ में था और इसके लिए मुझे 100 रुपये चाहिए थे. मैंने यह पैसे अपनी मां के पर्स से चुराए और उन्हें कहा कि मैं पिकनिक पर जा रहा हूं. किस्मत से मैं चुन लिया गया और एक्टिंग की पढ़ाई के लिए चंडीगढ़ चला गया. इसके बाद दो साल तक मैंने वहां पढ़ाया. फिर एक दिन पता चला कि मुंबई के एक ड्रामा स्कूल में वैकेंसी है.''



इसके बाद अनुपम सपनों की नगरी मुंबई शिफ्ट हो गए. यहां आकर पता चला कि मुंबई ड्रामा स्कूल के पास कोई फंड नहीं है. उन्होंने मुझे पढ़ाने के लिए एक छोटी से जगह दी और एक कमरा दे दिया. मैं फेल होकर लौटना नहीं चाहता था इसलिए मैं वहीं पढ़ाने लगा, ऑडिशन देता रहा और नाटकों में काम करता रहा. एक समय ऐसा आ गया था जब मेरे पास कोई काम नहीं था, पैसा नहीं था और ना ही कोई मदद करने वाला था.


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अनुपम ने बताया कि एक वक्त पर मैं पूरी तरह हार चुका था, घर लौटा तो दादाजी ने याद दिलाया 'एक आदमी जो पूरी तरह भीग चुका हो उसे बारिश से नहीं डरना चाहिए'. अनुपम की मेहनत और लगन काम आई और उन्हें अपनी डेब्यू फिल्म सारांश मिली.

डेब्यू फिल्म मिलने के बाद अभी अनुपम ने पहली सफलता देखी ही थी कि इतने में एक झटका लगा. उन्हें बताया गया कि उनकी जगह किसी और को लिया जा रहा है. 'मैंने महेश भट्ट को फोन लगाया और पूछा क्या ये सच है? मैं इसे बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था और घर जाने का फैसला ले चुका था. लेकिन इससे पहले मैं महेश भट्ट से मिला और कहा कि मुझसे बेहतर ये किरदार कोई और नहीं कर सकता. वह गलती कर रहे हैं. इस पर महेश भट्ट ने प्रोड्यूसर से कहा कि वह मेरे बिना ये फिल्म नहीं बनाएंगे. इस तरह मुझे मेरी पहली फिल्म मिली.'



अनुपम का सफर किसी रोलर कोस्टर राइड से कम नहीं रहा. लेकिन वह अपने सफर की कहानी में कुछ भी बदलना नहीं चाहते. बल्कि वह अपनी सभी असफलताओं को शुक्रिया कहते हैं जिन्होंने आज उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है.

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First published: July 16, 2019, 12:11 PM IST
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