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VIDEO: आशा पारेख ने 'दादा साहब फाल्के अवॉर्ड' मिलने के बाद जताई खुशी, बोलीं- 'सभी इच्छाएं अब जाकर पूरी हुईं'

आशा पारेख 60 सालों से फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय हैं. (फोटो साभार: Instagram@ashaparekh_ji)

आशा पारेख 60 सालों से फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय हैं. (फोटो साभार: Instagram@ashaparekh_ji)

आशा पारेख (Asha Parekh) को आज 30 सितंबर को नई दिल्ली में साल 2020 के लिए 'दादा साहब फाल्के पुरस्कार' से नवाजा गया. यह भ ...अधिक पढ़ें

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आशा पारेख (Asha Parekh) ‘कटी पतंग’, ‘तीसरी मंजिल’ और ‘कारवां’ जैसी फिल्मों के लिए जानी जाती हैं. उन्हें हिंदी सिनेमा की अब तक की सबसे प्रभावशाली अभिनेत्रियों में से एक माना जाता है. आशा पारेख को आज 30 सितंबर नई दिल्ली में ‘दादा साहब फाल्के पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया. दिग्गज एक्ट्रेस ने अवॉर्ड मिलने के बाद मीडिया से बातचीत की और अपनी खुशी जाहिर की.

आशा पारेख ने ‘दादा साहब फाल्के पुरस्कार’ प्राप्त करने के बाद ‘एएनआई’ से कहा, ‘बहुत अच्छा लग रहा है. ऐसा लगता है जैसे मेरी सभी इच्छाएं अब जाकर पूरी हुई हैं. शुरू में, मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि मुझे अवॉर्ड दिया जा रहा है. आज ऐसा लग रहा है कि मुझे वाकई में अवॉर्ड मिला है.’

आशा पारेख को 80वें जन्मदिन से एक दिन पहले मिला अवॉर्ड
वीडियो में, आशा पारेख की खुशी देखते ही बनती है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आशा पारेख को ‘दादा साहब फाल्के पुरस्कार’ ने नवाजा. उन्होंने पुरस्कार से सम्मानित होने के बाद भारत सरकार को धन्यवाद दिया. उन्होंने कहा, ‘मैं अपने 80वें जन्मदिन से ठीक एक दिन पहले यह अवॉर्ड मिलने से आभारी हूं. यह भारत सरकार से मुझे मिलने वाला सबसे अच्छा सम्मान है. मैं जूरी को धन्यवाद देना चाहूंगी, मैं 60 साल से इंडस्ट्री में हूं और अभी भी अपने तरीके से इससे जुड़ी हुई हूं.’

आशा पारेख ने ‘बाप बेटी’ में पहली बार की थी एक्टिंग
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आशा पारेख को ‘दादा साहब फाल्के पुरस्कार’ से सम्मानित करने से पहले, उनके ट्रिब्यूट में एक शॉर्ट फिल्म दिखाई गई थी. उनका पहला प्रोजेक्ट ‘बाप बेटी’ था. उन्होंने साल 1959 में शम्मी कपूर के साथ ‘दिल देके देखो’ में एक लीड एक्ट्रेस के रूप में अपने अभिनय सफर की शुरुआत की थी.

मराठी टीवी शो ‘ज्योति’ को किया था डायरेक्ट
आशा पारेख ने शुरुआत में एक बाल कलाकार के रूप में काम किया था. उनकी अन्य उल्लेखनीय फिल्मों में ‘जब प्यार किसी से होता है’ (1961), ‘तीसरी मंजिल’ और ‘दो बदन’ (1966), ‘कटी पतंग’ (1970), ‘कारवां’ (1971) और ‘मैं तुलसी तेरे आंगन की’ (1978) शामिल हैं. उन्होंने अभिनय छोड़ने के बाद मराठी टीवी शो ‘ज्योति’ से निर्देशन की शुरुआत की थी.

Tags: Actress, Bollywood news, Dadasaheb phalke award, Entertainment news.

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