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B'day: अशोक कुमार और बिमल रॉय में जब हो गई थी अनबन, साथ काम करने से कर दिया था इनकार

अशोक कुमार ने हर तरह की भूमिकाएं की हैं (फोटो news18)

अशोक कुमार ने हर तरह की भूमिकाएं की हैं (फोटो news18)

'दादा मुनि' के नाम से लोकप्रिय अशोक कुमार (Ashok Kumar) ऐसे पहले एक्टर हैं , जिन्होंने पहली बार एंटी हीरो की भूमिका निभाई थी. उन्होंने अपने अभिनय से छह दशकों तक लोगों का भरपूर मनोरंजन किया.

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    नई दिल्ली. बॉलीवुड में पिछले कुछ सालों से स्टार्स, एंटी हीरो बनकर दर्शकों की जरूर वाहवाही लूट रहे हैं, मगर एक वक्त ऐसा था जब कोई भी हीरो अपनी छवि से बाहर निकल कर काम करने की सोचता भी नहीं था. सदाबहार एक्टर अशोक कुमार (Ashok Kumar ) ने पहली बार हीरो की परंपरागत शैली को तोड़ा और फिल्म ‘किस्मत’ (Film Kismat ) में एंटी हीरो की भूमिका निभाई. यह फिल्म साल 1943 में रिलीज हुई थी, जिसे बॉम्बे टॉकीज ने प्रोड्यूस किया था. फिल्म में अशोक कुमार की एक्टिंग की जबरदस्त तारीफ हुई थी.

    बिहार के भागलपुर में 13 अक्टूबर 1911 को जन्मे अशोक कुमार (Ashok Kumar) ने अपने फिल्मी करियर की शुरूआत न्यू थिएटर में बतौर लेबोरेट्री अस्सिटेंट के रूप में की थी. उस समय उनके बहनोई शशाधर मुखर्जी बाम्बे टॉकीज में काम कर रहे थे. मुखर्जी ने अशोक कुमार को अपने पास बुला लिया. आपको बता दें कि दोनों एक साथ इलहाबाद यूनिवर्सिटी में पढ़ते थे, जहां वे गहरे दोस्त बन गए. फिर अशोक कुमार ने अपनी एकलौती बहन की शादी मुखर्जी से करवा दी.

    बॉम्बे टाकीज पहुचने के बाद अशोक कुमार की किस्मत पलट गई. बात 1936 की है. उस समय बॉम्बे टाकीज के मालिक हिमांशु राय फिल्म “जीवन नैया” बना रहे थे. शूटिंग शुरू ही हुई थी कि फिल्म का हीरो गंभीर रूप से बीमार पड़ गया. फिर हिमांशु राय की नजर अशोक कुमार पर पड़ी. उन्होंने अशोक से ‘जीवन नैया’ का हीरो बनने का अनुरोध किया. इसके बाद कुमार की  एक्टिंग की गाड़ी चल पड़ी.

    बॉलीवुड में ‘दादा मुनि’ के नाम से फेमस अशोक कुमार ने अपने जमाने की सभी बड़ी हीरोइनों के साथ काम किया. 1939 में फिल्म ‘कंगन’, ‘बंधन’ और ‘झूला’ जैसी फिल्मों में वे एक्ट्रेस लीला चिटनिस के साथ नजर आए. सभी फिल्में हिट रहीं. 1943 में हिमांशु राय का निधन हो गया. अशोक कुमार ने बॉम्बे टॉकीज छोड़ दी और फिल्मीस्तान स्टूडियो का रूख किया. उन्होंने एक्ट्रेस देविका रानी के साथ मिलकर फिल्म ‘मशाल’, ‘जिद्दी’ और ‘मजबूर’ जैसी फिल्मों का निर्माण भी किया. बाद में पचास के दशक में उन्होंने खुद का प्रोडक्शन हाउस खोल लिया. अपने प्रोडक्शन के बैनर तले फिल्म ‘समाज’ और ‘परिणीता’ का निर्माण किया. मगर दोनों ही फिल्में बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह से फ्लॉप हुई. फिर उन्होंने अपनी प्रोडक्शन कंपनी बंद कर दी.

    बताया जाता है कि फिल्म ‘परिणीता’ के दौरान डायरेक्टर बिमल राय से उनकी अनबन हो गई. उसके बाद अशोक कुमार ने उनके साथ काम न करने का फैसला किया. फिर एक्ट्रेस नूतन के कहने पर वे बिमल दा के साथ काम करने के लिए राजी हुए.  1963 में प्रदर्शित फिल्म ‘बंदिनी’ में  अशोक कुमार और बिमल राय ने  एक साथ काम किया. बॉलीवुड के इतिहास में ‘बंदनी’ को कल्ट फिल्म माना जाता है.

    अपने छह दशक के लंबे करियर में अशोक कुमार ने हर तरह की फिल्में की.  फिल्म ‘चलती का नाम गाड़ी’ में वे अपने सभी भाइयों के साथ नजर आए थे. इस फिल्म में उनकी कॉमेडी टाइमिंग देखते ही बनती है. उन्होंने देव आनंद की फिल्म ‘ज्वैलथीफ’ में पहली बार विलेन का किरदार निभाया. जब टीवी का दौर आया तो अशोक कुमार यहां भी छा गए. उन्होंने ‘हम लोग’, ‘भीम भवानी’, ‘बहादुर शाह जफर’ और ‘उजाले की ओर’ जैसे सीरियलों में काम किया.

    अशोक कुमार को दो बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्म पुरस्कार भी मिला. फिल्म आशीर्वाद के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था. साल 1988 में भारत सरकार ने फिल्म इंडस्ट्री में योगदान के लिए उन्हें ‘दादा साहब अवार्ड’ से भी सम्मानित किया. अशोक कुमार अपने बेमिसाल अभिनय के लिए हमेशा याद किए जाएंगे.

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