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डेब्यू वेबसीरीज के लिए अभिषेक खान ने कम किया 9 किलो वजन, ऐसी है उनकी पूरी कहानी

News18Hindi
Updated: October 23, 2019, 5:27 PM IST

हालिया नेटफ्लिक्स रिलीज वेब सीरीज 'बार्ड ऑफ ब्लड' में बलूचीस्तानी फौज के हेड नुसरत मारी का किरदार निभाने वाले अभ‌िषेक खान (Abhishekh Khan) की असल जिंदगी की कहानी बेहद दिलचस्प है.

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  • Last Updated: October 23, 2019, 5:27 PM IST
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मुंबई. नेटफ्लिक्स रिलीज हुई वेबीसीरीज 'बार्ड ऑफ ब्लड' से अभिनेता अभिषेक खान (Abhishekh Khan) ने डेब्यू किया. महज 23 साल की उम्र में उन्होंने वेब सीरीज में बलूचीस्तान फौज के हेड नुसरत मारी का एक प्रमुख किरदार निभाया. इस वेब सीरीज में प्रमुख भूमिकाओं में इमरान हाशमी (Emraan Hashmi) और विनीत कुमार (Vineet Kumar) थे. हाल ही में अभिषेक खान ने अपने एक्टिंग डेब्यू पर न्यूज 18 हिन्दी से बात की. असल में ये अभिषेक का डेब्यू नहीं बल्कि करीब आठ सालों की मेहनत का नतीजा है.

अभिषेक को आपको 'बार्ड ऑफ ब्लड' के लिए कैसे चुना गया?
एक कास्टिंग डायरेक्टर हैं, प्रशांत सिंह. उन्‍होंने शायद मेरी शॉर्ट फिल्म 'बंदिश' देखी थी. उन्होंने मुझे ऑडिशन के लिए बुलाया. आखिरकार 5 सितंबर को फोन आया कि आपको साइन कर रहे हैं.

बड़े स्तर पर यह आपका पहला प्रोजेक्ट ‌था, शूटिंग के अनुभव कैसे रहे?

मैंने काफी तैयारी की थी इसके लिए. पहली बार माइनस टेंपरेचर में रहा, काफी अच्छा एक्सपीरिएंस रहा. लेकिन सबसे अच्छी बात ये रही कि जब मैंने अपना पहला शॉट दिया, वो मेरे किरदार नुसरत मारी का एंट्री सीन था. पहले ही शॉट में मेरी डायरेक्टर रिभू दासगुप्ता ने कहा, बस यही चाहिए था. इसके बाद पूरी शूटिंग के दौरान मेरी डायरेक्टर रिभू दासगुप्ता से काफी सपोर्ट मिला, जिसके चलते ही मैं यह प्रोजेक्ट कर पाया. साथ ही मैं फाहेबा खान के बारे में कहूंगा कि यह उनकी मेहनत ही थी कि मैं अपने किरदार में काफी सटीक बैठ पाया. उन्होंने इस तरह से कॉस्ट्यूम डिजाइन किए थे कि किरदार वास्तवकि दिखने लगा था.

इसके अलावा मेरी कास्ट्यूम डिजाइनर फाहेबा खान से भी मुझे काफी ज्यादा सपोर्ट मिला. यह किरदार अगर उभरा तो रिभू और फाबेहा की वजह से ही उभरा. दोनों ने ना केवल मेरा मनोबल बढ़ाया ब‌ल्कि मैं कह सकता हूं कि उनके मार्गदर्शन के चलते ही मैं इस किरदार को निभा पाया.

abhishek khan
अभिषेक खान ने बार्ड ऑफ ब्लड में नुसरत मारी का किरदार निभाया.

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सुना है आपने अपने किरदार के लिए अपना वजन काफी कम कर लिया था. पूरी कहानी क्या है?
असल में मुझे ऐसा करने के लिए कहा नहीं गया था. लेकिन बलूचीस्तान और किरदार का जैसा नेचर था उससे मुझे खुद ही एहसास हुआ कि वहां खाने-पीने की चीजें इतनी आसानी से उपलब्‍ध नहीं होतीं. इसलिए मुझे अपना वजन थोड़ा कम करना चाहिए. तब मेरे पास महज 30-31 दिन की मोहलत थी.

मैंने तुरंत खुद को शाकाहारी बना लिया. सुबह केला, ब्लैक कॉफी और रात में सलाद वो भी बिना टमाटर के लेने लगा. यही नहीं शाम को मैंने जमकर बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया और जिम जाना बंद कर दिया. इसका मुझे काफी फायदा मिला. मैंने अपना वजन करीब नौ किलो तक घटा पाया था.

abhishek khan
अभिषेक की मां भी एक्ट्रेस बनना चाहती थीं.


अभिषेक आपकी जर्नी कैसे शुरू हुई? इस वेबसीरीज के लिए चुने जाने से पहले आप क्या करते थे?
देखिए मैंने महज 15 साल की उम्र में ही काम शुरू कर दिया था. सबसे पहले मैंने पृथ्वी थ‌िएटर ज्वाइन किया. यहां मैंने बैकस्टेज संभालने से लेकर एक्स्ट्रा मैन का भी काम किया. लेकिन वहां स्टेज पर लगातार रहने का मौका ज्यादा मिलता नहीं था तो मैंने होस्टिंग शुरू कर दी. फिर मुझे जो-जो काम मिलता गया मैं करता गया. मैंने कभी ऐड, कभी बैक स्टेज, कभी खुद शॉट फिल्म बनाई.

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इसी दौरान मेरी बनाई गई फिल्म पांच मिनट की शॉर्ट फिल्म 'सुसू' को साल 2017 में मामी में शो होने का मौका मिला. वहां मेरा वर्ल्ड सिनेमा से परिचय हुआ और सिनेमा को लेकर मेरी पूरी धारणा ही बदल गई. वहां आए फिल्मकारों को देखने के बाद मेरा वास्तविक कहानियों पर बने सिनेमा की ओर अधिक झुकाव हो गया.

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अभिषेक को मलयाली सिनेमा काफी पसंद है.


भविष्य में कैसा सिनेमा करना चाहेंगे?
मैंने बताया, मैं अब रियलिस्टिक सिनेमा की ओर अधिक ध्यान दे रहा हूं. मुझे मलयाली सिनेमा काफी पसंद है. यहां तक कि मैं मलयालम सीख भी रहा हूं. निजी तौर पर मुझे हाल-फिलहाल में 'आक्टोबर, न्यूटन' जैसी फिल्में बहुत पसंद आईं.

आपकी प्रेरणा कहां से मिलती है? आप किसकी तरह बनना चाहते हैं?
सही कहूं तो मुझे अपनी मां से सबसे ज्यादा प्रेरणा मिलती है. मेरे काम के लिए वो सबसे बड़ी मोटिवेशन हैं. उन्होंने मुंबई के वर्सोवा में महज एक रूम वाले घर में पाला. उन्होंने कपड़े बेचने से लेकर, खुद के अरमानों को पीछे रखकर वो सबकुछ किया जो हमारे लिए कर सकती थीं. वो खुद भी एक्ट्रेस बनना चाहती थीं, लेकिन उन्होंने हमें आगे बढ़ाया.

आपको नहीं लगता कि आपने यहां तक आने के लिए 8 सालों तक मेहनत की, लेकिन स्टारकिड्स को बिना किसी मेहनत के बड़ी फिल्में मिल जाती हैं?
मेरे कई दोस्त स्टारकिड हैं. लेकिन अच्छी बात ये है कि एक न्यू कमर के नाते मेरे पास आज नौ साल का अनुभव है. कई बार आप स्टारकिड हैं, तो इस मेहनत से चूक जाते हैं. मुझे उनसे कोई जलन नहीं है. असल में उनका कोई दोष नहीं है. एक बात ये भी है कि उनके ऊपर भी नाम बचाने का काफी दबाव होता है. शायद उनको मौका जल्दी मिलता है. लेकिन इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता. क्योंकि अब इतने प्लेटफॉर्म हैं कि सबको मौका मिलता है.

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First published: October 16, 2019, 6:32 PM IST
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