बाटला हाउस
3/5
पर्दे पर : 15 अगस्त 2019
डायरेक्टर : निखिल आडवाणी
संगीत : तनिष्क बागची, अंकित तिवारी व अन्य
कलाकार : जॉन अब्राहम, मृणाल ठाकुर, रवि किशन
शैली : ड्रामा/मिस्ट्री
यूजर रेटिंग :
0/5
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Batla House Movie Review: जॉन अब्राहम की स्वतंत्रता दिवस पर देशभक्ति से लबरेज फिल्म सीट से उठने नहीं देती

बाटला हाउस की समीक्षाः जॉब अब्राहम (John Abraham) की दमदार एक्टिंग और बॉलीवुड की मुख्यधारा की फिल्मों के सारे मसालों से भरी बाटला हाउस दशर्कों का मनोरंजन करती है.

News18Hindi
Updated: August 16, 2019, 11:39 AM IST
Batla House Movie Review: जॉन अब्राहम की स्वतंत्रता दिवस पर देशभक्ति से लबरेज फिल्म सीट से उठने नहीं देती
फिल्म समीक्षा: देशभक्ति तो थ्रिलर से लबरेज है बाटला हाउस
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Updated: August 16, 2019, 11:39 AM IST
'बाटला हाउस' के एक जरूरी सीन में यह दावा किया जाता है कि ये एक पक्षीय फिल्म नहीं है. इस दृश्य में कोर्टरूम दो पक्षों के लोग अपना-अपना पक्ष रख रहे होते हैं. लेकिन यह अजीब लगता है, क्योंकि पूरी फिल्म एक खास धारा में बहती है. यही नहीं, बाटला हाउस देखते वक्त आप जो भी अंदाजा लगाते हैं वह आगे चलकर सच साबित होता है. फिल्म में कुछ भी चौंकाता नहीं है. हालांकि इसके बाद भी अभिनेता जॉन अब्राहम (John Abraham) और निर्देशक निखिल आडवाणी (Nikhhil Advani) की जोड़ी फिल्म को सुस्त नहीं पड़ने देती. सिनेमेटोग्राफी और बॉलीवुड की मुख्यधारा की मनोरंजक फिल्मों के सारे गुण इसमें मौजूद हैं.

जिस घटना पर 'बाटला हाउस' आधारित है, उसके हाउस नंबर एल-18 में 19 सितंबर 2008 को क्या हुआ था, असल में आज तक किसी को नहीं पता. लेकिन न‌िखिल आडवाणी की फिल्म इसके नतीजे पर पहुंचने के‌ लिए बेताब दिखती है. इस चक्कर में निर्देशक को कुछ प्रमुख किरदार नये तरीके से गढ़ने पड़े हैं. इनमें यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर से लेकर वकील और समाज सेवी तक किरदार हैं. जबकि बाटला हाउस एनकाउंटर के समय की घटनाएं टीवी पर दिखाई जा चुकी है. लोगों के जेहन में आज भी दोनों विश्वविद्यालयों के मारे गए छात्रों की स्मृतियां ताजी हैं.

कुछ नये किरदार गढ़े हैं बाटला हाउस में
निखिल आडवाणी ने बड़ी चालाकी से शुरुआत में ही अपनी फिल्म में दिल्ली पुलिस के अधिकारी संजय कुमार (जॉन अब्राहम) के साथ एनकाउंटर के सीन को एक मिनट के भीतर खत्म कर देते हैं. इसकी पूरी उम्मीद की जाती है कि आगे चलकर इस सीन के बारे में पूरी जानकारी मिलेगी. इसी दौरान एक दूसरे अधिकारी केके (रवि किशन) की मौत हो जाती है. इससे पुलिस के भीतर की दुश्मनी का अंदेशा होता है.

John-Abraham
बटला हाउसः जॉन अब्राहम को दशभक्ति आधारित ये तीसरी फिल्म है.


इन सब के बीच संजय कुमार की अपनी निजी तनावपूर्ण जिंदगी भी चलती रहती है. अगर संक्षेप में कहें तो बॉलीवुड की पारंपरिक मुख्यधारा की फिल्मों में होने वाली सभी गुण इसमें मौजूद हैं. इसमें संजय कुमार के लिए सहानुभूति भी जागती है.

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जॉन अब्राहम के खाते में एक बेहतर फिल्म साबित होगी बाटला हाउस
निखिल आडवाणी ने बड़ी चालाकी से फिल्म में पुलिस के असल किरदार पर कोई टिप्पणी नहीं की है. उन्होंने यह दर्शकों पर छोड़ दिया है कि वे फैसला करें कि पुलिस सही है या गलत है. लेकिन फिल्म एक विचार तैयार करती है. इसमें यह एक खास पक्ष में खड़ी दिखाई देती है.

जॉन की ये फिल्म परमाणु और रॉ के आगे जाती है.


यह फिल्म जॉन अब्राहम के खाते में एक बेहतर फिल्मों में गिनी जाएगी. क्योंकि इसमें उन्हें अच्छे मोनोलॉग (एकांकी संवाद) और अच्छी पंचलाइन्‍स मिली हैं. कुछ सीन्स में उन्होंने कमाल की डायलॉग डिलिवरी भी की है. आमतौर उन्हें उनके डायलॉग बोलने के अंदाज की जमकर आलोचना होती है. लेकिन इस फिल्म में उन्होंने अपने संवाद अदायगी पर खास जोर दिया है. साथ ही निखिल आडवाणी की भी तारीफ करनी होगी. वे प्राकृतिक तौर पर आगे बढ़ते दिखाई देते हैं.

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देशभक्ति वाली फिल्मों पर जॉन अब्राहम का फोकस
'परमाणु' और 'रॉ' के बाद जॉब अब्राहम की ये तीसरी फिल्म है जिसमें वे देश के लिए लड़ते नजर आते हैं. वह देशभक्ति आधारित फिल्मों के नये ब्रांड एक्टर बनते जा रहे हैं. बटला हाउस इसी लाइन को आगे बढ़ाती है. साथ इस फिल्म में उन्हें एक गंभीरत अभिनेता के तौर पर पहचान मिल सकती है. क्योंकि उन्होंने अपने किरदार को पर्दे पर बेहद शानदार अंदाज में उतारा है. उनकी बॉडी लेंग्वेज देखकर लगता है कि उन्होंने अपने किरदार पर कितनी मेहनत की है.

batla house
बटला हाउस के सिनेमेटोग्राफी की तारीफ होनी चाहिए.


यही वजह है बाटला हाउस 2 घंटे 20 मिनट तक दर्शकों को सीट पर बैठाए रखती है. फिल्‍म में मृणाल ठाकुर के अभिनय की तारीफ की करनी होगी. उनके हिस्से ज्यादा सीन नहीं आए हैं. लेकिन सीमित समय में वह पर्दे पर प्रभाव जमाने में सफल रही हैं. नूरा फतेही के 'ओ साकी साकी' आइटम सांग को भी दर्शक बड़े पर्दे पर देख सकते हैं.

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डिटेल्ड रेटिंग

कहानी :
3/5
स्क्रिनप्ल :
2.5/5
डायरेक्शन :
3/5
संगीत :
3/5
First published: August 15, 2019, 8:37 PM IST
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